रिव्यु: फिल्म ‘अगली’ तेज रफ्तार सस्पेंस थ्रिलर

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आज हर दूसरी फिल्म या तो थ्रिलर है या फिर हाॅरर सस्पेंस थ्रिरल। लेकिन अगर वास्तव में आपको अलग सी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म देखने की चाह हैं तो अनुराग कश्यप द्धारा निर्देशित फिल्म ‘अगली’ देख लें। इस फिल्म को देखते हुए आप रोमांचित तो होगें ही साथ ही आपको ये भी पता चल जायेगा कि अनुराग की फिल्में क्यों सबसे अलग होती है।

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राहुल भट्ट एक ऐसा स्ट्रगलर है जिसने संघर्ष के दिनों में ही एक अमीर बाप की बेटी तेजस्वनी कोल्हापुरे से शादी तो कर ली और उसकी एक बेटी भी हो गई, लेकिन वो अपने एक्टर बनने के संघर्ष में मां बेटी तक को भूल गया। और एक दिन उसने अपनी पत्नि से तलाक ले लिया। बाद में तेजस्वनी से उसके कालेज के साथी और एक हद तक राहुल के दुश्मन रोनित राय ने शादी कर ली। रोनित अब पुलिस में एसीपी है। कालेज टाइम में राहुल ने तेजस्वनी को लेकर रोनित को एक बार बहुत मारा था। वो कड़वाहट रोनित में अभी भी बाकी थी इसलिये प्रतिशोध लेने के लिये ही उसने तेजस्वनी से शादी की, और उसे एक तरह से घर में कैद कर दिया। इससे तेजस्वनी फ्रस्टेटिड हो सिगरेट और शराब पीने लगी। तलाक के बाद कोर्ट ने हर सप्ताह राहुल को उसकी बेटी कली के साथ रहने की इजाजत दे दी। एक दिन राहुल अपने दोस्त विनीत कुमार सिंह से मिलने जाता है पीछे उसकी कार से उसकी बेटी गायब हो जाती है। उसके बाद परत दर परत कहानी के पात्रों की अगली नेस यानि बुरा पहलू सामने आता है।

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फिल्म में जब बच्ची के गायब होने के बाद जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है फिल्म के हर पात्र का बुरा पहलू सामने आता जाता हैं। उनमें कुछ बच्ची को ढूंढ रहे हैं तो कुछ उसके गायब होने का फायदे उठाने की ताक में हैं। दर्शक इन दोनों के साथ शुरू से अंत तक जुड़ा रहता है। अंत में जब असली अपराधी का पता चलता है तो दर्शक भी ठगा सा रह जाता है। फिल्म करीब तीन साल तक सेसंर के लफड़े मे फंसी रही, बावजूद इसके उसकी ताजगी बनी रही। निर्देशन की बात की जाये तो एक टाइट स्क्रीनप्ले के साथ अनुराग कश्यप ने फिल्म की रफ्तार बनाये रखी। हर आर्टिस्ट से उन्होंने मनचाहा काम निकलवाया। राहुल भटट की करीब आठ नो साल बाद इस फिल्म से सुखद वापसी हुई। उसने एक संघर्षशील कलाकार और अपनी बेटी से ज़्यादा प्यार करने वाले पिता की भूमिका एक अनुभवी अभिनेता की तरह निभाई। उसी तरह दो-दो पतियों के बीच पिसी हुई औरत की भूमिका में तेजस्वनी कोल्हापुरे ने एक अच्छी अभिनेत्री होने का परिचय दिया। रोनित राय एक बार फिर एक जैलेस पति और पुलिस आॅफिसर के रूप में प्रभावित करते हैं।

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सुरविन चावला की हेट स्टारी टू पहले रिलीज हुई लेकिन ये उसकी पहली फिल्म है। आइटम गर्ल की छोटी सी भूमिका में उसे ज्यादा कुछ करने का अवसर नहीं मिल पाया।विनीत कुमार सिंह राहुल के दोस्त की भूमिका में सहज रहे। एक पुलिस आफिसर के रोल में सबसे ज्यादा प्रभाव छौड़ते हैं गिरीश कुलकर्णी। छोटी बच्ची अनिष्का श्रीवास्तवा तथा सिद्धांत कपूर आदि का काम अच्छा रहा।

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फिल्म का बैंकग्राउंड म्युजिक फिल्म की जान है। फिल्म में फ्लैशबैक बहुत ज्यादा है लिहाजा वे शुरू से अंत तक दर्शक को कन्फयूज करते रहते हैं। इसलिये फिल्म देखते हुए दर्शक को बहुत सर्तक होकर बैठना पड़ता है तभी फिल्म और उसके पात्र उसकी समझ में आते हैं लेकिन पूरी तरह नहीं। अगर अनुराग कहानी को थोड़ा सरल कर देते तो फिल्म का मजा आम दर्शक भी ले सकता था। थ्रिलर सस्पेंस फिल्मों के दर्शकों के लिये अगली एक ऐसी फिल्म है जो उनकी पसंद पर खरी साबित होती है।

-श्याम शर्मा


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