एक बार फिर से ‘द जंगल बुक’ का शोर मचा है…

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वॉल्ट डिज्नी की फिल्म ‘द जंगल बुक’  की चर्चा इन दिनों चारों तरफ हो रही है अब इसके पीछे की वजह हम तो आपको क्या बताएं क्योंकि जंगल बुक का किस्सा कोई आज का नहीं बल्कि सालों पुराना है, जिससे हर कोई अच्छी तरह से वाकिफ है। सबसे पहले जंगल बुक को सन् 1967 में एनिमेशन के जरिए पर्दे पर उतारा गया था। उसके बाद 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित की गई ‘द जंगल बुक’ की श्रंख्ला भला किसे याद नहीं होगी जिसका गाना ‘चड्डी पहन कर फूल खिला है’ (इस गाने के बोल लिखे हैं गुलजार ने और इसकी कंपोजर हैं विशाल भारद्वाज) आज भी कानों में गूंजता है। भारतीय दर्शकों के बीच द जंगल बुक कितनी लोकप्रिय है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ये फिल्म अमेरिका से पहले भारत में रिलीज की गई। वहीं अब इस साल रिलीज हुई ‘द जंगल बुक’ ने हॉलीवुड की सर्वाधिक क्लैकशन करने वाली फिल्म का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। ‘द जंगल बुक’ निश्चित रूप से हमें उन यादों के गलियारों में ले जाएगी जो कहीं न कहीं पीछे छुट गए थे तो चलिए आपको बताते हैं इस फिल्म से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जिनके बारे में जानने के लिए हर कोई इच्छुक होगा।

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ये फिल्म उन लोगों के लिए बेहद खास है जो 90 के दशक से ताल्लुक रखते हैं क्योंकि उस समय में दूरदर्शन पर जंगलबुक की कहानी बेहद प्रचलित थी। ये फिल्म देखकर उन्हें जरूर ऐसा लगा होगा कि उनका बचपन एक बार फिर से लौट आया है साथ ही इस फिल्म के इतने क्लैकशन के पीछे एक वजह ये भी है कि जो लोग 80 और 90 के दशक से है वो ज्यादातर मां बाप बन चुके हैं और वो इस कहानी को अपने बच्चों को जरुर दिखाना चाहेंगे जो उनके लिए एक अलग ही अनुभव होगा।

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दिलचस्प बात ये भी है कि सन् 1967 में जो ‘जंगल बुक’ बनाई गई थी वो सेल एनिमेशन (फ्रेम बाई फ्रेम) के जरिए बनाई गई थी लेकिन इस बार निर्देशक जॉन फेवरुउ ने इस फिल्म को एक वास्तविक रुप दे कर इसे और भी खूबसूरत बना दिया है। इस बार मोगली कोई एनिमेटिड कैरेक्टर न होकर बल्कि एक जीता जागता बच्चा है। हैरानी वाली बात ये भी है कि ये जंगल बुक की कहानी और इसके पात्र काल्पनिक हैं और असल जिंदगी में इस तरह की कोई घटना घटित ही नहीं हुई है बावजूद इसके फिल्म का आधुनिक रूप और भी अद्भुत है और लोगों के दिलों में इसके लिए एक अलग ही स्थान बन गया है।

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बता दें कि फिल्म में मोगली की भूमिका अदा कर रहे नील सेठी फिल्म के इकलौते मानवीय कलाकार हैं बाकी सबको ग्रफिक्स के जरिए किएट किया गया है बावजूद इसके ये सभी पर्दे पर सटीक तालमेल बैठाते हैं और आपको एक यात्रा पर ले जाते हैं। जहां नील सेठी के चयन 2000 बच्चों में किया गया था वहीं खास बात ये भी है कि फिल्म ‘द जंगल बुक’ के हिंदी संस्करण में बॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों ने अपनी आवाजें दी हैं। ओम पुरी ने बघीरा, इरफान खान ने बलू, नाना पाटेकर ने शेर खान, शेफाली ने रक्षा और प्रियंका चोपड़ा ने का की आवाज दी हैं।

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‘द जंगल बुक’ रुडयार्ड किपलिंग की कहानी पर आधारित है खबरों की मानें तो रुडयार्ड किपलिंग का जन्म भारत में हुआ था ऐसे में स्वाभाविक है कि उन्हें भारतीय जंगलों से ही ये कहानी और इस कहानी के पात्रों को लेकर आईडिया मिला होगा। किस तरह से भेड़ियों का झुंड मिलकर एक बच्चे का पालन पोषण करता है और उसे परेशानियों से बचाता है ये अपने आप में एक अनोखा संदेश है जो मनुष्य और जानवरों के बीच के तालमेल को भी दर्शाता है। वैसे ये कहानी अब ऐतिहासिक बन चुकी है क्योंकि ‘द जंगल बुक’ की सफलता के बाद फिल्मकार ने फिल्म के सीक्वल पर भी काम शुरु कर दिया है।

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अब इतनी सारी बातें जिस कहानी से जुड़ी हो वो आम कैसे हो सकती है घने जंगल के बीच जानवर ही जानवर और इन सब के बीच शेरखान और मोगली की लड़ाई वो भी थ्री डी तकनीक के साथ ये अपने आप में एक रोमांचकारी अनुभव है यकिनन जब इस का अगला भाग बनकर तैयार होगा वो और भी आधुनिकता के साथ परोसा जाएगा यानि की मोगली का किस्सा सालों साल यूं ही चलने वाला है इस पर समय की धूल कभी नहीं पड़ेगी और ये धुन भी हमारे कानों में हमेशा गूंजती रहेगा कि ‘जंगल जंगल बात चली है पता चला है चड्डी पहन के फुल खिला है फुल खिला है’।

 

 


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