उर्दू के लिए कुछ भी करेंगे

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दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में दूसरा उर्दू महोत्सव ‘जश्न-ए-रेख्ता’ का आयोजन हुआ। इस मौके पर गुलज़ार, जावेद अख्तर , महेश भट्ट, शबाना आजमी, इम्तियाज अली , तिग्मांशु धूलिया, हुमा कुरैशी और नंदिता दास सहित अन्य जानी-मानी हस्तियां मौजूद थी। इस महोत्सव में मुशायरा , कव्वाली, दास्तानगोई , गज़ल, फिल्म स्क्रीनिंग, नृत्य, नाटकों का प्रदर्शन किया गया।  उर्दू उपन्यास का स्तंभ माने जाने वाले प्रसिद्ध उर्दू लेखक इस्मत चुग़ताई और राजिंदर सिंह बेदी का जन्म सदी समारोह इस महोत्सव का विशेष आकर्षण रहा।

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साथ ही इस मौके पर प्रसिद्ध भारतीय कवि, गीतकार व फिल्म निर्देशक गुलज़ार ने कहा कि ‘उर्दू आज भी उसी तरह जीवित है जिस तरह पहले थी। उर्दू ने अपनी ऊर्जा कम नहीं की है। शायद इसके पहलू बदल गए है। बचपन मे मुझे उर्दू सीखने का बहुत शौक था, उर्दू, यह जीवित भाषा है व समय के साथ आगे बढ़ रही है, बचपन में जब मैं उर्दू सीखता था तब मुझे डांट के साथ-साथ मार भी खानी पड़ती थी।‘

 

 

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Mayapuri