INTERVIEW: ‘‘तकरीबन हर औरत की यही कहानी होती है’’ – उर्वशी शर्मा जोशी

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नकाब, बाबर आक्रोश तथा खट्टा मीठा आदि फिल्मों की अभिनेत्री उर्वशी शर्मा उर्फ रैना जोशी ने निर्माता व एक्टर सचिन जोशी से शादी करने के तकरीबन पांच साल बाद जीटीवी के धारावाहिक ‘एक मां जो लाखों के लिये बनी ‘अम्मा’ में शीर्षक भूमिका के साथ टीवी से वापसी की है । हैदराबाद रामो जी राव स्टूडियों में इस शो के सेट पर उर्वशी से हुई एक मुलाकात ।

भूमिका में ऐसा क्या खास लगा ?

दरअसल मेरा एक दो साल का बेटा है उसकी वजह से मैं काम नहीं कर रही थी लेकिन इस शो के प्रोड्यूसर ने कहा कि यह रोल इतना जबरदस्त है लिहाजा इसे करने के लिये कितनी ही फिल्मी अभिनेत्री भी तैयार हैं। लेकिन भूमिका को देखते हुये हमें आप ज्यादा फिट लग रही हैं। बाद में मैने इस बारे में पति सचिन से सलाह मशवरा किया तो उन्होंने मुझे यह शो जरूर करने के लिये कहा। इसके बाद मैने भी इसे करने के लिये मन बना लिया।

Urvashi Sharma with Cast
Urvashi Sharma with Cast

इस भूमिका को किस तरह आब्जर्व किया?

मुझे नहीं लगता कि इस भूमिका के लिये होमवर्क करने की कोई जरूरत थी। दरअसल यह हर औरत की कहानी है। रोल के मुताबिक जिस औरत का पति उसे एक बच्चे समेत छोड़कर जा चुका है, आगे उसे अपने बच्चे के लिये तो कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा क्योंकि ऐसा हर औरत करती है। मैं पंजाबी हूं और यह किरदार एक मुस्लिम औरत का है इसलिये आगे मुझे मुसलमान महिला की तरह बोलने, चलने फिरने या ओढ़ने पहनने पर ध्यान देना था,  वह भी साठ के दशक में। बस थोड़ा बहुत वही मेरे लिये मुश्किल रहा।

एक अभिनेत्री के तौर पर क्या सोचती हैं ?

मैने अपनी शुरूआत फिल्मों से की थी। मेरी पहली फिल्म ‘नकाब’ थी, बाबर, खट्टा मीठा और आक्रोश आदि फिल्में की, इनमें एक साउथ की फिल्म भी थी। उसी दौरान सचिन जोशी से मुलाकात हुई हम दोनों ने एक दूसरे को पंसद किया और फिर हमने शादी कर ली। हमारा दो साल का एक बच्चा भी है ।

Urvashi-Sharma-with-husband

क्या टीवी पर पहले भी काम किया है?

मैं दिल्ली से हूं। मुबंई आने के बाद मैने अपने करियर की शुरूआत मॉडलिंग से की, फिर टीवी पर फेयर फैक्टर शो भी किया। इसके बाद मैने शादी कर ली। करीब पांच साल बाद इस शो का ऑफर आया तो मुझे लगा कि दोबारा इस फील्ड में जाने का इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता ।

शो में आपकी भूमिका क्या है  ?

यह उस समय की कहानी हैं जब बंटवारे की बात चल रही थी। उससे पहले मैं आजादी के लिये प्रर्दशनों में भाग लिया करती थी, लेकिन हर आदमी की तरह मेरे पति की भी टिपिकल मेंटेलिटी थी यानि मैं कमाकर लाता हूं तुम्हें सिर्फ घर चलाना है। बाकी चीजों से परहेज करना है और जब मैं नहीं मानती तो वह मुझे छोड़ देता है। इसके बाद अपने बच्चे के साथ मैं संघर्ष कर उस जगह तक पहुंचती हूं जहां औरतें मुझसे प्रेरणा लेने लगती हैं।

Urvashi sharma joshi

ये कहानी फिल्म गॉड मदरसे काफी मेल खाती है ?

देखिये आप चाहे गॉड मदर की बात करें या मदर इंडिया की, कमोबेश हर औरत की ऐसी ही मिलती जुलती कहानी होती है। अगर औरत अकेली होगी तो उसे समाज में रहने वाले गलत लोगों से लड़ना ही होगा। ऐसे में कुछ औरतें कमजोर पड़ जाती हैं तो कुछ समाज से जमकर लोहा लेती हैं। अम्मा भी वैसी ही औरत है।


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Mayapuri

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