वरूण ने मारे एक तीर में दो निशाने..

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वरूण धवन अपनी पिछली फिल्म बदलापुर के किरदार में इतने रम गए थे कि दिन रात उनके दिमाग में बदलापुर का चरित्र ही हावी होता जा रहा था, यह मानसिक अहा पोह का वह दौर या जब उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था, ऐसे में उन्होने दो रास्ते अपनाये अपने को संतुलित करने के लिए, एक साइकोलोजिस्ट से मदद ली और दूसरा जमकर वर्क आउट किया और अपना पूरा ध्यान बाॅडी बिल्डिंग में लगा दिया। इसका फायदा यह हुआ कि अपनी अगली फिल्म में, एक रिप्ड डांसर जैसी बाॅडी उन्हें चाहिए थी जो मिल गई और दिमाग भी बदलापुर से हट गया।


Mayapuri