मूवी रिव्यू: रामू की एक और आपराधिक फिल्म – ‘वीरप्पन’

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रेटिंग***

अपराधियों पर फिल्में बनाने में मास्टर निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने इस बार फिल्म ‘वीरप्पन’ में करीब बीस वर्षों तक कर्नाटका और तमिलनाडू में आतंक और दरींदगी का पर्याय बन चुके ‘वीरप्पन’ को प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। इससे पहले वे कन्नड में इस फिल्म को किलिंग वीरप्पन नाम से बना चुके हैं। लेकिन हिन्दी में उन्होंने काफी फेरबदल किया है।

कहानी

कर्नाटक और तमिलनाडू के सीमावर्ती जगलों में वीरप्पन ने करीब बीस सालों तक भारी उत्पात मचाये रखा। इस बीच उसने न जाने कितने मर्डर किये कितने अपहरण लेकिन उसे हाथी दांत और चंदन की लकड़ी के तस्कर के तौर पर जाना जाता था। जंगल में रहते हुये ही उसने मुथुलक्ष्मी से विवाह भी किया। उसे पकड़ने के लिये न जाने कितने पुलिस के जवानों ने अपनी जानें गवांई। अंत में ऑपरेशन कोकुन के तहत उसे दो हजार चार में घेर कर मारा गया। वीरप्पन की दरींदगी का आलम ये था कि पुलिस से बचने के लिये उसने अपनी जन्मजात बच्ची को भी मार दिया था।

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निर्देशन, अभिनय

राम ने वीरप्पन की कहानी के साथ काफी सारा फिक्शन भी जोड़ दिया है। जैसे वीरप्पन द्वारा एक बहादुर पुलिस ऑफिसर की हत्या के बाद उसकी विधवा लीजा हेडन का पुलिस के लिये मुखबरी करना। वीरप्पन की पत्नि उषा जाधव का बिना किसी रोक टोक के कहीं भी आना जाना तथा वीरप्पन को मारने वाले आईएएस ऑफिसर सचिन जोशी का विस्तारित हीरो वाला किरदार दर्शाना। रामू की सबसे बड़ी विशेषता रही है अपनी किसी भी फिल्म की कास्टिंग। इस फिल्म में भी उनकी कास्टिंग देखते बनती है। वीरप्पन की भूमिका में उन्होंने दिल्ली के एक कलाकार संदीप भारद्वाज को लिया जो एक हद तक वीरप्पन ही लगते हैं। उन्होंने अभिनय भी बहुत शानदार किया है। इसके अलावा सचिन जोशी को शायद पहली बार ऐसा किरदार मिला है जिसमें उन्हें काफी कुछ दिखाने की खूली छूट थी और वे पहली बार अपनी भूमिका में अभिनय करते भी दिखाई दिये हैं। मुथुलक्ष्मी को उषा जाधव ने प्रभावशाली ढंग से निभाया। लेकिन लीजा हेडन को विडो के रोल में लेना रामू की भूल ही कही जा सकती है। इनके अलावा अनेक ऐसे कलाकार हैं जो दर्शकों के लिये अंजाने हैं लेकिन वे सभी अपनी अपनी भूमिकाओं में कमाल लगे हैं। रामू के इस बार भी कई जाने पहचाने शॉट्स हैं लेकिन वे अच्छे लगते हैं। फिल्म की लोकेशन कमाल की है। लेकिन बैंकग्राउंड संगीत बहुत ज्यादा लाउड है।

क्यों देखें

वीरप्पन को नजदीक से जानने के लिये ये फिल्म देखी जा सकती है।

 

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Mayapuri