मूवी रिव्यू: रिश्तों को आइना दिखाती है ‘वेंटिलेटर’ (मराठी)

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रेटिंग***

फरारी की सवारी फेम निर्देशक राजेश मापुष्कर की मराठी फिल्म ‘वेंटिलेटर’ की बेहतरीन कहानी के अलावा सबसे बड़ी खूबी है आशुतोष गोवारिकर को एक अरसे बाद एक एक्टर के रूप में देखना।

कहानी

आशुतोष गोवारिकर एक नामचीन डायरेक्टर है। अचानक उसे पता चलता है कि उसके अंकल गजानन इतने बीमार हैं कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। इसके बाद एक एक करके गजानन के सगे संबन्धी सामने आते हैं। इन सब के बीच आशुतोष और उनके पिता के विचारों को लेकर अनबन, गजानन और उसके बेटे प्रसन्ना के बीच कड़वाहट तथा उसके सगे संबन्धीयों को गजानन की बीमारी से ज्यादा चिंता इस बात की है कि सात दिन बाद गणपति का आगमन होने वाला है अगर गजानन इस बीच नहीं रहे तो सूतक के तहत वे गणपति भगवान को अपने यहां स्थापित नहीं कर पायेगे। बाद में जब गजानन के बेटे प्रसन्ना द्धारा अस्पताल का भारी बिल न चुकाने का उसके रिश्तोदारों को पता चलता है तो वे किस प्रकार कन्नी काटने लगते हैं जबकि उनमें से हर एक के लिये गजानन ने कुछ न कुछ किया है।ventilator

निर्देशन, संगीत, अभिनय

राजेश मापुष्कर इससे पहले हिन्दी फिल्म फरारी की सवारी जैसी उत्कृष्ट फिल्म बना चुके हैं। इस बार मराठी में भी उन्होंने इस फिल्म के जरिये रिश्तों की बानगी को बड़ी बारीकी से दिखाया है। फिल्म व्यंग्य और इमोशन को प्रभावशाली ढंग से लेकर आगे बढ़ती है फिल्म में नये पुराने करीब अस्सी कलाकारों से निर्देशक ने बड़ा सुंदर काम करवाया है। खास कर आशुतोष गोवारिकर, जीतेन्द्र दीक्षित, उषा नाडकर्णी, अच्युत पौद्दार, सुलभा आर्या तथा दीपक शिर्के आदि का सुदंर अभिनय देखते बनता है।ventilator-image-12

क्यों देखें

रिश्तों को आयना दिखाती इस फिल्म को देखते हुये आपको पता चलेगा कि एक इंसान के जीवन में रिश्तों का कितना महत्व होता है।


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Mayapuri

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