माय लॉर्ड, मेरे क्लाइंट प्रेमनाथ पागल व्यक्ति नहीं है जैसा कि दुनिया दावा करती है, मैं उनके बचाव के लिए खड़ा हूं – अली पीटर जॉन

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मुझे वो दिन आज भी याद है जब मैनें अपना पहला इंटरव्यू प्रेमनाथ का लिया था। मुझे उनके पागल व बुरे व्यवहार के लिए पहले ही चेतावनी दे दी गई थी। अपने सहयोगियों की बातों से मैं डर गया क्योंकि बहुत से लोगों ने कहा था कि वह एक सनकी व्यक्ति है। मैं पूरी रात सो नहीं पाया और सुबह भी बैचेन रहा अंत में मैंने मालाबार हिल में प्रेमनाथ के अपार्टमेंट तक पहुंचने के लिए एक टैक्सी ली। मेरे पूर्वजों के अनुसार मालाबार हिल पहले जंगल था बाद में यह क्लस्टर कंक्रीट के जंगलों में बदल गया जहां प्रेमनाथ जैसे जानवर रहा करते हैं।

मेरे कदम उनके घर के दरवाजों की तरफ बढ़ रहे थे तो वही मेरे दिल की धड़कन तेज होती जा रही थी। मैनें घंटी बजाई और मेरे कानों में हजारों खतरनाक आवाजें सुनाई देने लगी। दरवाजा खुला और मैंने दरवाजे पर खड़ा एक बिना बाल और उम्रदराज आदमी को देखा। उन्होंने सिल्क लुंगी व गले में मालाएं पहनी हुई थी। मैंने उनकी उस समय की फोटोज देखी जब वह एक हेडसम यंग हीरो थे। हीरो से अंत में वह एक बड़े और डरावने खलनायक के रूप में नजर आने लगे। दो घंटो के लिए वह अपने निजी कमरे में ले गए जो एक ऐसी जगह पर था जो सभ्यीकरण से कोसों दूर था और वो कोशिश कर रहे थे जो मेरे दोस्तों और शुभचिंतकों ने उनके बारे में मुझे बताया था। उन्होंने गाना गाया, डांस किया, मंत्रों का पाठ भी किया। उन्होंने मुझे फिल्म भी दिखाई जिसके प्रोड्यूसर, डायरेक्टर,लेखक,एडिटर,म्यूजिक व सॉन्ग प्रोड्यूसर ‘प्रेमिया’ रहे। ‘प्रेमिया’ प्रेमनाथ का निक नेम था। प्रेमनाथ के साथ हुई बातचीत के अंत में मैंने यह महसूस किया कि मैं एक ऐसे आदमी से मिला जिसे मैंने पहले ही गलत समझ लिया था। जिसे लोग मॉनस्टर भी कहा करते थे। जो कि असलियत में एक प्रबुद्ध और अत्यधिक आध्यात्मिक व्यक्ति थे। जैसे ही मैं उनके घर से निकलने लगा उन्होंने मुझे कुछ मालाएं दी जो उन्हें उनके स्वामी ने दी थी। वह जंगल में कई साल रहे जहां उन्होंने कविताओं की दो किताब लिखी थी। एक  किताब का नाम ‘श्रद्धांजलि’  तथा दूसरी किताब का नाम ‘टियर्स ऑफ द हार्ट’  था।

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जिसमें उन्होंने भगवान, प्यार, धोखा, मौत और प्यार की मौत के भाव के बारे में वर्णन किया था। मैंने महसूस किया वह किताब जो उन्होंने मुझे उपहार के रूप में दी थी, जिसमें उन्होंने जीवन के सभी पागलपन को प्रस्तुत किया था। वह किताब न पढ़ कर मैंने उस व्यक्ति के साथ गलत किया। मैं अपने पुस्तकालय में कुछ खोज कर रहा था और शेल्फ की हर किताब अपने समय की कहानियां व लोगों के बारे में बता रहा था। मैं पुरानी किताबें देख कर हैरान रह गया जो समय के साथ पीली पड़ गई थी पर क्षतिग्रस्त नहीं हुआ थी। ‘टियर्स ऑफ द हार्ट’ नामक किताब के लेखक व कवि प्रेमनाथ थे। मैं अपने सभी खोज और अपने पुस्तकालय के बारे में भूल गया और ‘प्रेमिया’  पढ़ने के लिए बैठ गया जो साठ साल पहले प्रेमनाथ द्वारा लिखी गई थी। यह एक ऐसा अनुभव था जो मैं कभी नहीं भूल सकता था। मैंने अपना नाश्ता, लंच, डिनर भूला उस किताब को शुरू से अंत तक पढ़ा। उनके द्वारा लिखी कविता की हर पक्तिं किसी रतन से कम नहीं थी। उन्होंने ईमानदारी से अपने प्रेम संबंधो के बारे में बताया। साथ ही बिना मधुबाला का नाम लिए प्रेमनाथ ने उनकी सुदंरता व उनके प्रति अपने प्यार का वर्णन भी किया और तो और उन्होंने उस समय का वर्णन किया जब मधुबाला की कम उम्र में मृत्यृ हो गई व उनका शरीर कब्रिस्तान की मिट्टी में घुल गया। उन्होंने अपनी किताब में यह भी लिखा था कि उनके अशांत जीवन में बहुत से प्यार करने वाले लोग आए, बहुत सी महिलाएं उनसे सच्चा प्यार करती थी और वह उनसे प्यार का नाटक किया करते थे उसे प्यार करते हैं और बेरहमी से धोखा देते थे।

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उन्होंने कहा कि उन्हें एक दुखी शादीशुदा, दुखद परिवार का जीवन मिला जिसने उनकी दुनिया ही बदल दी अपनी दुखी दुनिया से परेशान होकर व प्यार, शांति और समझ पाने के अन्य तरीकों की खोजने लगे थे। उन्होंने पाया कि वह एक ऐसी दुनिया में रह रहे है जहां समय के साथ रहना कठिन होता जा रहा था। उन्होंने यह भी लिखा था कि इस इंडस्ट्री के सहयोगी व अन्य लोग उनके साथ गंदे गेम खेलते थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह किस तरह मरना पसंद करेंगे उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य स्वर्ग और नरक तक पहुंचना नहीं है क्योंकि वह इस धरती पर नरक व स्वर्ग देख चुके हैं उनकी नजर मे इस धरती पर नरक व स्वर्ग का मिश्रण है। वह कवि, दार्शनिक पुजारी व संत थे साथ ही वह रंगीन, विवादास्पद और शुरुआत और प्यार का अंत भी थे, उनके बारे में कहा जाता था कि वह अपने समय के सबसे अधिक प्रबुद्ध व्यक्तियों में से एक थे। मैं उनकी किताब पढ़ कर ऐसा महसूस करता था कि मैं उनकी दुनिया में हूं मैं उनके द्वारा लिखी किताब पढ़ता रहता था, जहां भी जाता उनकी किताब साथ रखता, मैं जब भी उनकी कविाताएं पढ़ता उनकी दुनिया में चला जाता उनके सारे शब्दों, विचारों और भावनाओं और प्रकाश की एक नई किरण मुझ में समा जाती, एक दिन वह किताब लापता हो गई और मुझे कई बैचेन और उथलपुथल भरे दिन और रात दे दी उस किताब ने। मैं खुद से बहस करने लगा था। मैं प्रेमनाथ की असत्य आदमी की वास्तविकता के बारे में सोचने लगा था। अंततरू उनके बारे में जानकर मेरे दिल में उनके प्रति सम्मान की भावना पैदा हो गई थी। मैंने इन सभी आरोपों को अपने खिलाफ कर दिया, अपने बंधनों को  दुनिया को दे दिया, जिन्हें इस आदमी के बारे में फिर से सोचने की जरूरत है।

 

 

 

 


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Mayapuri

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