बर्थ एनिवर्सरी: पान की दुकान पर मिला था पहली फिल्म का ऑफर, हीरो से भी ज्यादा फीस लेते थे प्राण

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हिंदी फिल्मों के मशहूर विलेन और एक सफल, शानदार और बेहतरीन अभिनेता प्राण के बारे में जितना कहा जाए और उनकी जितनी तारीफ की जाए वो भी कम है। अपनी खलनायिकी के दम पर फिल्मों में सुपरहिट बनाने वाले प्राण पर्दे पर जितना बुरा और डरावना किरदार निभाते थे, असल जिंदगी में वो उतने ही अच्छे और दरियादिल इंसान थे। प्राण का सपना था कि वो एक फोटोग्राफर बनें। लेकिन उनकी किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। तो आइए आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको बताते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से…

– प्राण ने 12वीं की परीक्षा रामपुर के राजा हाईस्कूल से पास की। अपना फोटोग्राफर बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने दिल्ली की एक कंपनी ‘ए दास & कंपनी’ में अप्रेंटिस भी की। 1940 में लेखक मोहम्मद वली ने जब पान की दुकान पर प्राण को खड़े देखा तो पहली नजर में ही उन्होंने अपनी पंजाबी फ़िल्म ‘यमला जट’ के लिए उन्हें साइन कर लिया।

– यह प्राण की पहली फिल्म थी और सुपरहिट रही। लौहार फिल्म इंडस्ट्री में एक खलनायक के तौर पर उभरने वाले प्राण को हिंदी फिल्मों में पहला ब्रेक 1965 में फिल्म ‘खानदान’ से मिला। दलसुख पंचोली की इस फिल्म में उनकी एक्ट्रेस नूरजहां थीं। बंटवारे से पहले प्राण ने 22 फिल्मों में निगेटिव रोल किया। वे उस समय के काफी चर्चित विलेन बन चुके थे।

– आजादी के बाद उन्होंने लाहौर छोड़ दिया और बंबई आ गए। यह उनके लिये संघर्ष का समय था। मुंबई आने के बाद प्राण को फिल्म ‘जिद्दी’ में मिला था। इस फिल्म के लीड रोल में देवआनंद और कामिनी कौशल थे। ‘जिद्दी’ के बाद इस दशक की सभी फिल्मों में प्राण खलनायक के रोल में नजर आए।

– 1955 में दिलीप कुमार के साथ ‘आजाद’, ‘मधुमती’, ‘देवदास’, ‘दिल दिया दर्द लिया’, ‘राम और श्याम’ और ‘आदमी’ नामक फिल्मों के किरदार महत्वपूर्ण रहे तो देव आनंद के साथ ‘मुनीमजी’ (1955), ‘अमरदीप’ (1958) जैसी फिल्में पसंद की गई। फिल्म ‘जंजीर’ के किरदार विजय के लिए प्राण ने निर्देशक प्रकाश मेहरा को अमिताभ बच्चन का नाम सुझाया था।

– प्राण की वजह से मिली इस फिल्म ने अमिताभ का करियर पलट कर रख दिया था। इस किरदार को पहले देव आनंद और धर्मेन्द्र ने नकार दिया था। प्राण ने अमिताभ की दोस्ती के चलते इसमें शेरखान का किरदार भी निभाया। इसके बाद अमिताभ बच्चन के साथ ‘ज़ंजीर’, ‘डान’, ‘अमर अकबर अन्थोनी’, ‘मजबूर’, ‘दोस्ताना’, ‘नसीब’, ‘कालिया’ और ‘शराबी’ जैसी फिल्में महत्वपूर्ण हैं।

– प्राण को तीन बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला। 1997 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट खिताब से नवाजा गया। प्राण को हिन्दी सिनेमा में उनके योगदान के लिए 2001 में भारत सरकार के पद्म भूषण और इसी साल दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। प्राण ने तकरीबन 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

– कापते पैरों की वजह से वह 1997 से व्हीएल चेयर पर जीवन गुजार रहे थे। प्राण की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने 18 अप्रैल 1945 को शुक्ला आहलुवालिया से शादी की थी। उनके तीन बच्चे हैं। अरविंद और सुनील और एक बेटी पिंकी। 1998 में प्राण में दिल का दौरा पड़ा था। उस समय वह 78 साल के थे।

– साल 2013 में 93 साल की उम्र में प्राण ने अंतिम सांस ली थी। प्राण ने एक बार राज कपूर की भी मदद की थी। उनकी फीस हीरो से भी ज्यादा हुआ करती थी लेकिन उन्होंने राज कपूर की फिल्म ‘बॉबी’ मात्र एक रुपए में साइन की थी। उस दौरान राज कपूर आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। इसको देखते हुए प्राण ने फीस नहीं ली।

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Sangya Singh

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