क्या आशा पारेख फिर से लौट आएंगी?

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उस जमाने के लोग जिन्होंने आशा पारेख के फिल्म कैरियर का जलवा देखा था और जो आज फिर से उन्हें लाइफ स्टाइल आइकॉन के रूप में पुरस्कृत होते देख रहे हैं, उनका कहना है कि आशा जी के चेहरे पर वही नूर अब भी बरकरार है जो उन्होंने उनके चेहरे पर साठ या  सत्तर के दशक में देखा था। 10 वर्ष की कच्ची उम्र में फिल्म ‘आसमान’ के साथ फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाली आशा पारेख अब चौहत्तर वर्ष की  हो गई है  उनसे पूछा गया कि क्या वे दोबारा फिल्मों में काम करना पसंद करेंगी? तो वे अपनी वही चुम्बकीय मुस्कान  (जिसकी कसमे उनके दीवाने आज भी खाते हैं) के साथ बोली, ” अगर कोई बहुत दमदार दिल छूने वाली भूमिका मुझे ऑफर हो तो मैं उसे कभी इंकार नहीं कर पाऊंगी, वरना मैं दोबारा लौटना पसंद नहीं करूंगी।”

1959 में आशा पारेख ने सिर्फ सोलह वर्ष की उम्र में शम्मी कपूर की हिरोइन के रूप में फ़िल्म ‘दिल देके देखो’ के साथ करियर शुरू किया था।। आशा जी ने बताया, “मैं शम्मी कपूर जी को चाचा कहकर पुकारती थी। उनकी पत्नी, गीता बाली जी तो अक्सर मजाक मजाक में कहती थी, “चलो हम इस बच्ची को गोद ही ले लेते है।” उन दिनों आशा जी को मेक अप भी करना नहीं आता था, ऐसे में कई बार गीता बाली (अब स्वर्गीय) ही उनका मेक अप कर दिया करती थी। आशा जी ने बताया कि आज भी शम्मी कपूर जी के परिवार के साथ उनका करीबी रिश्ता है।

 


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Mayapuri

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