INTERVIEW!! बारूद के बाद ही तो सब कुछ – शोमा आनंद

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मायापुरी अंक, 55, 1975

कहते हैं दो अक्तूबर को पैदा हुए कुंभ राशि वाले शख्स के जीवन में काफी उतार चढ़ाव आते है। नवोदित हीरोइन शोमा आनंद का जन्म इसी तारीख को अमृतसर में हुआ और उनकी राशि भी वही है देखना यह है कि उनके जीवन में कितने उतार चढ़ाव आते हैं। वैसे लगता है उतार चढ़ाव का सिलसिला शुरू हो गया है। शोमा आनंद के जन्म का नाम नीलम अरोड़ा था। जिसके बाद उन्होंने अपना नाम रखा नीलू बाबी और इसी नाम से उन्होंने चार छोटे बजट की फिल्में भी साइन कर ली। पर अचानक उनके जीवन में ज्वार आया और प्रमोद चक्रवर्ती ने उन्हें अपनी फिल्म ‘बारूद’ में चिंटू कपूर के साथ हीरोइन बना दिया। प्रमोद चक्रवर्ती के निर्देशन में चिंटू के साथ हीरोइन बनने के लिए उन्हें अपनी सारी फिल्म छोड़नी पड़ी उस पुराने इतिहास को भुलाने और नयी जिंदगी को शुरू करने के लिए उन्होंने अपना नाम भी नीलू बाबी से बदल कर शोमा आनंद कर लिया। इतना ही नही, अब वह चक्की साहब (प्रमोद चक्रवर्ती) की दूसरी फिल्म ‘चमत्कार’ में भी राजेश खन्ना और परवीन बॉबी के साथ चुन ली गयी हैं। निसंदेह उसके जीवन में तूफान तो आ गया है पर यह तूफान उसे किस किनारे पर ले जाकर छोड़ेगा, हम नही जानते।

पिछले दिनों मैं गुरूनगर वरसीवा रोड़ स्थित उनके फ्लैट पर उनसे मिला। सुबह के नौ बज चुके थे। आसमान साफ था और धूप खुल चुकी थी। शोमा आनंद के बिखरे बालों, अलसाई आंखो और खोये-खोये चेहरे से लग रहा था जैसे वे अभी-अभी उठी है। इतना ही नही, कहीं जाने की उत्कंठा भी उनको बेचैन किये हुए थी। बाद में पता चला कि उस दिन उनको ब्रेक देने वाले डायरेक्टर प्रमोद चक्रवर्ती की वर्षगांठ थी और वह उन्हें बधाई देने के लिए बेचैन थी।

इंटरव्यू का सूत्र पकड़ते हुए मैंने सीधा प्रश्न किया सोफिया कॉलेज में आप कहां तक पढ़ी है।

शोमा आनंद ने मुस्कुरा कर कहा ओह! मैं समझ गयी। पर मैंने तो सोफिया कॉलेज देखा तक नही है। मैं चिनॉय कॉलेज में इंटर तक पढ़ी हूं।

फिल्मों में कार्य मिल जाने पर मैं आगे नही पढ़ सकी। पर हां अग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू और मराठी मुझे आती है।

मैंने कुछ ही दिनों पहले दिल्ली की कुछ फिल्मी-पत्रिकाओं में उनकी खोज की दिलचस्प कहानी के बारे में पढ़ा था कि फिल्मों के एक प्रोडक्शन डिज़ाइनर ने बुर्का ओढ़ कर सोफिया कॉलेज से उन्हें ढूंढा था और प्रमोद चक्रवर्ती से मिलाया था। प्रमोद चक्रवर्ती से मिलाया था। फिल्म की किसी हीरोइन की खोज की यह कहानी वाकई बड़ी दिलचस्प हो सकती है। पर जब उन्ही ने उस कांड का खंडन कर दिया तो मेरे सवाल का मज़ा ही किरकिरा हो गया ।

मैंने शोमा आनंद का ध्यान ‘बारूद’ की प्रकाशित कुछ स्टीलों की ओर आकर्षित करते हुए पूछा आपको एकदम मॉडर्न और वेडिंग कास्टयूम में पोज़ देने मे ऐतराज नही हुआ? क्या आगे भी आप इसी तरह के सेमिन्यूड रोल करती रहेंगी?

ना बाबा ना.. बारूद मेरी पहली बड़े बैनर और बड़े सेटअप की फिल्म है। इसलिए मैं किसी तरह का ऐतराज नही कर सकती। यह मेरे करियर की बात है। यह कह कर शोमा ने पलंग पर पास बैठी अपनी मां की ओर देखा कि कहीं उन्होंने कोई गलत जवाब तो नही दिया है। तो आपने कैरियर के लिए कम्प्रोमाइज़ किया है मैंने कहा। शोमा आनंद ने बिना कुछ कहे हल्की मुस्कुराहट के साथ सिर हिला दिया।

Shoma anand

उनकी पहली चर्चित फिल्म बारूद की चर्चा छेड़ते हुए मैंने कहा सुना है, चिंटू बड़ा रोमांटिक हीरो है और लेडी कीलर भी क्या ख्याल है आपका?

शोमा आनंद ने जोर से खिल खिलाकर कहा चिंटू जैसा युवक रोमांटिक हीरो नही होगा तो और कौन होगा और फिर आप ही बताइये आज तक उसने किस औरत को मारा है इस प्रसंग में शोमा आंनद का भोलापन देख कर मुझे हंसी आ गयी और आश्चर्य भी हुआ।

‘बारूद’ के सिलसिले में उसने विदेशों में हुई आउटडोर शूटिंग की चर्चा करते हुए कहा कि वह दो बार विदेश यात्रा कर चुकी है पहले शेड्यूल में वह पेरिस, स्विटजरलैंड अमेरिका में दो माह तक शूटिंग में व्यस्त रही। हाल ही में वह फिर दोबारा पेरिस होकर आयी है। इस फिल्म में वह एक विदेशी लड़की की भूमिका अदा कर रही है इसलिए उनके अधिकांशत: सीन विदेशों में ही लिये गये है। इस फिल्म के कुछ रोमांचक दृश्यों के लिए उन्होंने मोटर साइकिल चलाना सीखा है क्योंकि उन्हें उस पर बैठ कर एक गैंग का पीछा करना होता है। इसी तरह एक हीरोइन के लिए जो जरूरी बातें सीखनी होती है वह सीख रही हैं। उन्हें तैरना तो पहले से ही आता था। नृत्य भी वह खूब सीख चुकी है और आज भी उनका अभ्यास चल रहा है। एक्टिंग रोमांटिक संबंध की चर्चा के बारे में कुछ पढ़ा है?

इस तरह की बातें तो बहुत छपती रहती है। पर मैं उन बातों पर ध्यान नही देती। मैं तो इतना कह सकती हूं कि वे बहुत ही भले आदमी है। पूरे यूनिट के साथ इस तरह का बर्ताव करते है कि हमें कुछ पता ही नही चलता कि वे हमारे बॉस है। खाना भी सबके साथ बैठकर खाते है। यूरोप में मैं उनके साथ यहां-वहां खूब घूमी हूं पर मैंने उनमें ऐसी कोई बात नही देखी जैसी लोग लिखते रहे है। लोग तो खामख्वाह किसी न किसी के बारे में कुछ न कुछ उड़ाते ही रहते है। आप विदेशों में अकेली गयी थी? मैंने पूछा। शोमा आनंद ने तपाक से कहा, जी नही, पहले शूटिंग शेड्यूल में मेरी मां मेरे साथ थीं और दूसरे शूटिंग शेड्यूल में मेरा भाई मेरे साथ था। कॉन्ट्रैक्ट करते समय मेरे घर वालों की यह एक मुख्य शर्त थी।

शोमा आनंद के पास ही बैठी उनकी मां ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा, मैं अपनी बेबी को कभी अलग नही छोड़ती। उनकी दो बहने विवाहित है और उनके भाई की शादी इसी वर्ष होने वाली है। यहीं अकेली रह गयी है और सबसे छोटी होने के कारण सबको प्यारी है।

शोमा आनंद अपने निर्देशक प्रमोद चक्रवर्ती से पूछ कर ही कोई फिल्म साइन कर सकती है। चक्की साहब ने उनके साथ एक्सक्लुसिव कॉन्ट्रैक्ट पांच साल के लिए किया हुआ है। इसलिए उनके पास इस वक्त दो ही प्रमुख फिल्में है ‘बारूद’ और ‘चमत्कार’ ‘बारूद’ तेजी से बन रही है जो इसी वर्ष प्रदर्शित हो जायेगी। उसके प्रदर्शन के बाद ही शोमा आनंद का मूल्याकंन होगा’

उनका खुद का कहना है कि बारूद के बाद ही सब कुछ होगा ।

उस समय की प्रतीक्षा कर रही हूं। तो इस वक्त आप घर मैं बैठ कर समय कैसे काटती है?

मेरे इस सवाल पर शोमा ने कुछ मुस्कुरा कर कहा, मैं खूब उपन्यास पढ़ती हूं जो भी रोचक उपन्यास मिल जाता है चाहे वह हिन्दी में ही हो, मैं नही छोड़ती। और फिर घर का काम भी तो है।

शोमा आनंद जिस चुस्ती और फुर्ती से जवाब दे रही थी। उससे लगता था कि ‘बारूद’ की शूटिंग के बाद उनमें गहरा आत्म-विश्वास आ गया है यह वही लड़की है जो पहले फिल्मों में रोल ढूंढने के लिए एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो जाती थी पर अब ‘बारूद’ के बाद उस समय की धैर्य से प्रतीक्षा कर रही है। जब उस ‘बारूद’ का विस्फोट होगा।

‘बारूद’ के बाद ही तो सब कुछ…..

 

 


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Mayapuri

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