कांस फिल्म फेस्टिवल से हिट साबित हुए – विक्की कौशल

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मैनें पहली बार विक्की कौशल को देखा जो कि  हैंडसम थे। शाम कौशल के बेटे विक्की कौशल भारत के प्रसिद्ध, सफल, विनम्र डायरेक्टर में से एक है, शाम कौशल ने अपनी जिंदगी के 25 साल समर्पित करने के बाद इंटरनेशनल स्तर को अपने तरीके से बनाया। शाम कौशल मुम्बई के बड़े अर्पाटमेंट में अपनी बीवी व दो बच्चों (विक्की, सनी) के साथ रहा करते थे साथ ही जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी तब उनके बीवी व बच्चें उनके लिए सर्मथन के स्तंभ स्थापित हुए थे। शाम के दोनों पुत्रों को विनम्रता का गुण अपने पिता से विरासत में मिला था, जिस तरह दोनों पुत्र अतिथि का सम्मान करते चाहे वह बड़ा हो या छोटा, खासतौर पर उनका जिन्होनें उनके पिता के साथ काम किया। ये दोनों जीवन के जिस भी क्षेत्र में जाएंगे लोगों का दिल जीत लेंगे। दोनों ही बेटे बहुत छोटे थे जब उनके पिता शाम कौशल योग्यताओ के साथ फिल्मों के साथ जुड़े थे। विक्की एक प्रशिक्षित टेलिकाॅम्यूनिकेशन इंजीनियर थे पर इसके साथ ही उनकी फिल्मों में दिलचस्पी थी। विक्की नें गुणवत्ता फिल्में बनाने के लिए एक आंदोलन शुरू किया था और इसलिए वह अनुराग कश्यप , विकास बहल, विक्रमादित्य जैसे युवा पुरुषों व फिल्म निर्माताओं के साथ नियमित रूप से रहा करते थे।

 Shweta Tripathi, Vicky Kaushal and Richa Chadha
Shweta Tripathi, Vicky Kaushal and Richa Chadha

उसी समय अनुराग कश्यप ‘गैंग्स आॅफ वासेपुर’ बना रहे थे और विक्की नें इस फिल्म में सहायक निर्देशक काम किया।यही वह समय था जब वह अपने अंदर एक नए और आत्मविश्वास से भरे विक्की कौशल की खोज कर सकते थे।इसके साथ ही उन्हें यह भी पता चला कि वह एक जुनून, दृढ़ संकल्प के साथ एक्टिंग भी कर सकते है। यह सब देख पिता नें भी इनका साथ दिया व शाम बहुत ही खुश थे साथ ही बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित भी थे, बेटे नें इस क्षेत्र में खुद को साबित करने का निर्णय लिया था। इन्ही सब के बीच उन्होनें महसूस किया कि डायरेक्टर मोजेज सिंह जिन्होनें अपनी पहली फिल्म जुबान से शुरुआत की वह एक असामान्य फिल्म की कास्टिंग कर रहे हैं। जब जुबान की शूटिंग चल रही थी वही दूसरी तरफ नीरज घायवान नें अनुराग कश्यप के प्रोजेक्ट गऊ में असिस्ट किया था वह एक स्वतंत्र डायरेक्टर के रुप में उभर कर आए। मोजेज नें फिल्म मसान के लीड रोल के लिए हजारों युवा लोगों के आॅडिशन लिया। मोजेज नें विक्की का नाम नीरज को सिफारिश किया तो नीरज नें केरेक्टर को मसान के लिए उनका केरेक्टर तैयार किया। प्रसिद्ध फिल्मकार विक्रमादित्य मोटवानी मसान फिल्म में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे थे क्योंकि वह नए डायरेक्टर नीरज घायवान द्वारा किये गये काम को देखना चाहते थे। मसान फिल्म में विक्की कौशल, ऋचा चड्ढा, संजय मिश्रा, श्वेता त्रिपाठी जैसे कलाकारो ने काम किया। जिस तरह फिल्म का शूट हुआ था यह देख फिल्म की पूरी टीम खुश थी अब उन्हें आगे की प्रतिक्रिया का इंतजार था।

vicky kaushal shweta tripathi
vicky kaushal shweta tripathi

पूरी टीम के लिए इससे बेहतर प्रकिया क्या हो सकती थी कि कान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान संयुक्त राष्ट्र के कुछ सम्मान अनुभाग में फिल्म की स्क्रीनिंग हुई साथ ही उन्हें सम्मान भी मिला। दर्शकों ने फिल्म को शान्तिपूर्वक देखा व 5 मिनट तक तालियों की गुंज से साथ स्टैंडिग ओवेशन से सम्मान किया। यह फिल्म की पूरी टीम के लिए गर्व की बात थी। फिल्म नें जब पीछे के डायरेक्टर को नहीं पता था कि तालियों की गूंज उनके फिल्म के लिए है। यह देख उनके आखों में आसूं आ गये थे, लोग उनके पास आकर उन्हें गले लगा कर बधाई दे रहे थे। इन तालियों का हकदार वह युवा व्यक्ति भी था जिसने अपनी काबलियत को सिद्ध किया वो और कोई नहीं बल्कि विक्की कौशल थे। वह जिस सफलता की ऊंचाईयों को पाना चाहते थे उन्होंने पहले ही कदम पर उस सफलता को हासिल कर लिया।

वह जो अब निश्चित रूप से पहुंच चाहता था सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए अपने पहले ही ट्रेक पर एक खजाना मिला था। शाम व उनकी पत्नी की आखों में आसूं आ गये बेटे की फिल्म मसान में सफलता देख कर। फिल्म में यह रोल निभाना विक्की के लिए आसान नही था पर उनके काम के जुनून नें उन्हें इंटरनेशनल फेस्टिवल में लाजवाब साबित कर दिया और उनके लिए सबसे गर्व की बात यह थी कि जिस गौरवपूर्ण कांस फिल्म महोत्सव में दुनिया भर के हुनर आते हैं वहा विक्की ने लोगों की वाहवाही बटोरी। विक्की की वापसी हुई व उन्हें पता है कि कितना जरूरी हैं उम्मीदों पर खरा उतरना व इसके साथ ही फिल्म की सफलता के प्रदर्शन को जगाए रखना। विक्की की फिल्म जुबान भी रिलीज होने की कतार में थी।फिल्म में उनके साथ एक नया चेहरा भी था जिसका नाम सारा जेन डायस था वह इस फिल्म की हीरोइन थी साथ ही अन्य कलाकार भी शामिल थे।

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जुबान के डायरेक्टर मोजेज सिंह थे और हिंदी सिनेमा की महिमा को वापस लाने में विश्वास रखने वाले गुनीत मोंगा, मोहित रस्तोगी, तरुण रेवो, मोजेंज सिंह और शान व्यास इसके निर्माता थे। फिल्म की टीम के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण रिलीज था क्योंकि जुबान को हिन्दी फिल्मों से अलग बनानें के लिए सबने बहुत मेहनत की थी। विक्की खुद को भाग्यशाली  समझते है क्योंकि उनकी शुरुआत उन दो फिल्मों से हुई जिसकी कहानी व प्रदर्शन की लोगों बाते किया करते थे। ऐसा बहुत कम होता है कि किसी युवा एक्टर को इस तरह की फिल्मों में काम करने का मौका मिलता है। विक्की कौशल जानते थे कि इस तरह के सपने की शुरूआत होना का क्या मतलब होता है। यह एक प्रकार का हुनर है जिसमें ज्यादा समय नहीं लगता सफल भविष्य को देखने के लिए साथ ही मैं इससे ज्यादा मैं विक्की को सफल होता देखना चाहता था क्योंकि विक्की के पिता को सफलता हासिल करने के लिए बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इसके साथ ही वह विक्की की सफलता को देखने के लिए विनम्र हो गए व कहने लगे कि भगवान बहुत ही दयावान है और मैं आशा करता हूं कि भगवान विक्की पर भी अपनी दयादृष्टि बनाए रखे।

 


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Mayapuri

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