स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विधा बालन भारतीय हैंडलूम साड़ी में

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इस स्वतन्त्रता दिवस पर बॉलीवुड दिवा विद्या बालन की बात करें तो बता दें कि वे भारतीय परंपरा को दिल से निभाने वाली अभिनेत्रियों में से वे एक है। फ़िल्म एक्ट्रेस रेखा की तरह विधा भी साड़ी को ही स्त्रियों की सबसे खूबसूरत पहनावा मानती है और तीज त्योहारों पर वो विश्व प्रसिद्ध भारतीय पहनावा यानी साड़ी जरूर पहनती है। हमारे स्वतन्त्रता दिवस पन्द्रह अगस्त से पहले सात अगस्त को नेशनल हैंडलूम डे पर विधा हैंडलूम की साड़ियों पर हमेशा फोकस जरूर करती है और स्वत्रंता दिवस पर भारतीय हैंडलूम साड़ी में ही सजती है। इस बार भी विधा ने इस दिवस को रेखांकित करते हुए देश की स्वतंत्रता दिवस की बधाई के साथ भारतीय हैंडलूम मैजेंटा रंग की साड़ियों में अपनी तीन तस्वीरें शेयर की, बिना मेकअप , सिर्फ बोल्ड लिपस्टिक, स्टेटमेंट कान की बालियां और बालों के जुड़े में विधा का भारतीय रूप उनके फैंस को खूब पसंद आया।

इन तस्वीरों को कैप्शन देते हुए विधा ने लिखा, “भारतीय हैंडलूम में सिल्क के फूलों की खूबसूरती। वाकई हैंडलूम इंडियन सिल्क की लुभावनी कलाकृति की कोई सानी नहीं है। चलो हम सब हैंडलूम सिल्क प्रोडक्ट को गर्व के साथ पहने और हमारे देश के बुनकरों  की जादुई रचनाओं का जश्न मनाए, ये सिर्फ आज के लिए ही नहीं, बल्कि हर दिन के लिए है। ये हमारे बुनकर कलाकारों के इस मास्टरक्राफ्ट पैशन और लगन के प्रति सच्ची सम्मान होगा।“  स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर विधा अपने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहती है कि बचपन से वो इंडिपेंडेंस डे स्कूल और फिर घर पर मनाती आ रही है। उनके बहुत से रिश्तेदार आर्मी में हैं। इस वर्ष विधा ने अपने पति सिद्धार्थ के साथ, इंडियन आर्मी द्वारा ऑर्गनाइज की गई गुलमर्ग विंटर फेस्टिवस्ल भी अटेंड किया था। भारतीय सिनेमा में विधा की अतुलनीय योगदान के कारण इंडियन आर्मी ने उन्हें सम्मान देते हुए अपने एक फायरिंग रेंज को विधा का नाम दिया। ’द विधा बालन फायरिंग रेंज’ गुलमर्ग कश्मीर में स्थित है।

शाहरुख का अपने देश और देश के खिलाड़ियों के प्रति प्रेम

देश प्रेम से ओतप्रोत शाहरुख खान भारतीय खेल और भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। चाहे कितनी भी व्यस्तता रहे वे भारतीय खिलाड़ियों द्वारा देश विदेश में खेले जा रहे हर खेल को बैठकर देखते, सराहते और  चीयर अप करते हैं। स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष्य में वे अपने घर आंगन में तिरंगा फहराने और अपने बच्चों के साथ इंडिपेंडेंस डे उत्सवों में जोर शोर से हमेशा भाग लेते दिखें हैं। पिछले दिनों अपने देश की महिलाओं द्वारा हॉकी खेले जाने को लेकर उनका उत्साह और देश प्रेम मुखरित था।

महिला हॉकी टीम द्वारा ओलिंपिकस ब्रॉन्ज़ मेडल ना ला पाने को लेकर हालांकि शाहरुख के दिल टूट गया लेकिन भारतीय महिला खिलाड़ियों का हौसला देख कर शाहरुख गद गद हो उठे। शाहरुख ने कहा, “दुनिया भर के खेल प्रेमी हमारे देश की हॉकी खिलाड़ियों  का बेहतरीन प्रदर्शन देख कर बहुत प्रेरित होंगे। हमारी भारतीय महिला हॉकी टीम भले ही मेडल जीत ना पाए होंगे लेकिन उनके जोशीले परफॉर्मेंस ने सबका मन जीत लिया। हम सब भारतीयों को गर्व है हमारे भारतीय खिलाड़ियों पर, वेल प्लेड। यह भी अपने आप में एक जीत है। शाहरुख के हॉकी प्रेम देखकर हॉकी खिलाड़ियों और कोच ने शाहरुख से ’चक दे इंडिया पार्ट 2“ बनाने की भी गुजारिश की।

आमिर खान को देश के इस स्वर्ग में फिर से फ़िल्म इंडस्ट्री के चहल पहल की उम्मीद

“दुनिया में अगर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है”, कश्मीर की खूबसूरती पर यह कहावत हमारे देश में बसे इस स्वर्ग को दुनिया के लिए ईष्र्या का कारण बनाती है। पिछली पीढ़ी ने वो सुंदर ज़माना देखा है जब कश्मीर की घाटियों में बॉलीवुड की तमाम फिल्में शूट होती थी लेकिन वो ज़माना लद गया तो फिल्मों से कश्मीर के दृश्य भी खत्म हो गए। अब इतने वर्षों बाद जब फिर से वहां भरतीय सिनेमा की शूटिंग, नए फ़िल्म पॉलिसी लागू होने के बाद पूरी शिद्दत से शुरू होने की बात चल रही है तो सुपरस्टार आमिर खान का खुश होना तो लाज़मी है। उनकी नवीनतम फ़िल्म ’लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग कश्मीर में हो रही है औऱ आमिर अपनी माँ, बहनें, एक्स वाइफ किरण और किरण के परिवार के साथ आम के आम और गुठलियों के दाम का मज़ा ले रहें हैं।

इस नए फ़िल्म पॉलिसी को लेकर आमिर अब निश्चित हो चुके हैं जम्मू कश्मीर में शूट करना बहुत सुविधापूर्ण हो जाएगा और यहाँ ज्यादा फिल्में बनेगी। आमिर कश्मीर की वादियों में ही स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। वे कहतें हैं, “पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह एक खुशी की बात है। अब हम फ़िल्म वालों को बहुत सारी फैसिलिटीज मिल जाएगी  और फिल्में यहां आसानी से बनेगी। अपनी हाल की शूटिंग अनुभव को साझा करते हुए आमिर ने कहा, “हालाँकि अभी ये पॉलिसी हमारी फ़िल्म में लागू नहीं हुई है लेकिन फिर भी यहां सभी हमारी टीम को सहयोग कर रही है। पुलिस, प्रशासन और भी कई एजेंसियां है। सब हमें हर तरह से मदद कर रहें हैं, बहुत सपोर्टिव हैं। यहां के लोकल लोगों ने भी बहुत प्यार और सहयोग दिया। जितनी खूबसूरत कश्मीर है, उतनी ही खूबसूरत यहां के रहवासियां हैं। सबने बहुत साथ दिया। मुझे इतना अच्छा अनुभव मिला है कि अब मैं यहां बार बार आऊँगा और कश्मीर की वादियों को गले लगाऊँगा।” आमिर ने यह भी कहा, “अब तो कश्मीर के युवाओं को भी फ़िल्म इंडस्ट्री के रचनात्मक फील्ड में आकर बहुत कुछ सीखने का मौका मिलेगा। अब वो दिन दूर नहीं जब कश्मीर से एक इंडस्ट्री का उदय होगा।”

स्वतन्त्रता दिवस के साथ अब अगर भारतीय  फ़िल्में  बिंदास जम्मू कश्मीर के लोकल्स में शूट हो, वहां शूटिंग्स, स्क्रीनिंग्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनें, बन्द सिनेमाघरों को फिर खोल दिया जाए, मौजूदा सिनेमाहॉल्स को और बेहतरीन बनाया जाए, मल्टीप्लेक्स शुरू हो डेस्टिनेशन मार्केट तो बस समझ लीजिए अब फिर से ’आरज़ू’ टाइप की फिल्में बनने लगेंगी।

टाइगर श्रॉफ कावंदे मातरमदेश प्रेमियों के दिल की पुकार है

टाइगर श्रॉफ के स्वर में गाया गया, ‘वंदे मातरम’ सॉन्ग स्वतन्त्रता दिवस से पहले युवाओं के बीच वायरल हो गया है। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक्शन किंग टाइगर की आवाज़ इतना स्मूद है। खुद टाइगर भी अपने गाए गीत पर बहुत अच्छा महसूस कर रहे है। टाइगर ने बहुत पहले एक बार बताया था कि वो बाथरूम सिंगर है। लेकिन बाथरूम से निकलकर अपने दुनिया भर के फैन्स और देश प्रेमियों के दिल में ‘वंदे मातरम’ गाकर वो मंझे हुए युवा सिंगर्स की श्रेणी में शामिल हो जाएगा ऐसा उसने कभी नहीं सोचा था। टाइगर बताते हैं, “भारत माता और हमारे देश के डिफेंस फोर्सेस और हमारे देश वासियों के देश भक्ति स्पिरिट को सलाम करते हुए मैंने ये गीत गाया था, थैंक्स टू जैकी भगनानी कि उन्होंने मुझे यह गाना गाने के लिए पुश किया था।

यह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि देश प्रेम से लबालब भरे करोड़ो देशवासियों की पावरफुल इमोशन है।” स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर टाइगर ने बताया  “इस खूबसूरत देशभक्ति और देश के रक्षकों के लिए सलामी वाले गीत को बनाने की जर्नी का अनुभव अतुलनीय है। देश के प्रति मेरा, मेरे परिवार, बल्कि सारे भारतवासियों का प्रेम ने इस गीत को स्पेशल बनाया। बचपन से लेकर आज तक, पन्द्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी, मैं अपने स्कूल और हर समारोह में मनाता आ रहा हूँ। हमारा पूरा परिवार इन समारोहों को लेकर बहुत उत्साहित और भावुक है। हमारे देश की स्वतंत्रता के लिए हमारे देश के कितने नेता, जवान, स्वतन्त्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। उन सबके सर्वोच्च बलिदान के प्रति हम सब भारतवासी ऋणी है। वंदे मातरम।”

सोनू सूद का देश प्रेम उनके कर्मों से साफ जाहिर है

सोनू सूद अपने देश और देशवासियों के प्रेम के लिए बॉलीवुड का रियल हीरो के रूप में आज बेहद फेमस है।  सोनू वो हीरो है जो सिर्फ अपने स्वार्थ और फायदे के लिए काम नहीं करता है। जब अन्य हीरो हीरोइन लॉक डाउन के दौरान अपने मजेदार, फनी, वीडियो बना बना कर लोगों का टाइम पास कर रहे थे और कमा रहे थे तब सोनू सूद, कड़ी धूप और कोविड प्रकोप के बीच अपनी जान को जोखिम में डालकर गरीब, मजदूर, प्रवासी कामगारों को दो वक्त की रोटी , कपड़ा, छत, रुपये और अपने गाँव लौटने की व्यवस्था में पसीना बहा रहा था। इसलिए सोनू सूद का देश प्रेम उनके कर्मों से साफ जाहिर होता है, उसे चींख चींख कर अपने देश प्रेम की दुहाई देने की कोई ज़रूरत नहीं। वो जहां भी जाते है वहां की जनता उसे देवता की तरह सर माथे पर उठाते हैं।

पिछले दिनों जब वे श्रीनगर कश्मीर गए थे तो लोगों ने उनकी जयजयकार की। सोनू सबके साथ वहां मस्ती मज़ाक से बातें करते रहे थे। वहां बटमालू के एक लोकल मार्किट में अचानक सड़क किनारे एक जूते चप्पल बेचने वाले के सामने वे रुक कर चप्पलें देखने लगे। फिर एक फुटवेअर उठाकर वे चप्पल बेचने वाले वेंडर शमीम से मज़ाक में मोल भाव करने लगे। सोनू ने पूछा, “कितना डिस्काउंट दोगे?“ जिसपर शमीम ने कहा, “बीस परसेंट” फिर दोनों खूब हँस पड़े। आखिर शमीम के बताए भाव में ही फुटवेअर खरीदने के साथ साथ सोनू ने शमीम का भला करने की गरज में अपने फैन्स से अर्ज किया कि जिसको भी जूते चप्पल खरीदना हो वो शमीम भाई के दुकान में आकर मेरा नाम ले कर जूता खरीदे तो उसे थोड़ा डिस्काउंट जरूर मिलेगा।

यह पहली बार नहीं कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए किसी लोकल सेलर को प्रोमोट करने का बीड़ा लिया। इससे पहले भी सोनू ने साइकल चलाते हुए अंडे और ब्रेड बेचते हुए सोशल मीडिया फ़ॉलोअर्स से गुजारिश की थी कि वे छोटे छोटे दुकानदारों से सामान खरीद कर उन्हें भी इस कोरोना काल में जीने का हक दें।  पिछले कुछ समय पहले एक माइग्रेशन सीरीज़ में सोनू ने कहा था, “अभिनय करना बहुत अच्छा लगता है लेकिन वो टेम्परेरी फीलिंग है, आम आदमी ही आखिर सुपरहीरो होता है।”

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Mayapuri