INTERVIEW: मां से झगड़ा करना सबसे सेफ होता है – विद्या बालन

1 min


लिपिका वर्मा

अभिनेत्री विद्या बालन इन दिनों अपनी फिल्म ‘बेगम जान’ के प्रमोशन में जी जान से जुटी है। श्रीजीत मुखर्जी के निर्देशन में बनी ‘बेगम जान’ अपने पोस्टर के टैगलाइन को लेकर भी काफी चर्चे में है जिसमें लिखा है मेरा जिस्म, मेरा घर, मेरा देश और मेरे नियम।  ये टैगलाइन पूरी फिल्म को चंद शब्दों में बयां कर देती है।

फिल्म के सिलसिले में लिपिका वर्मा  से बातचीत के दौरान  जीवन के संघर्ष की बात पर विद्या ने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से संघर्ष और फाइट….. जीवन का एक ऐसा हिस्सा है जो हमेशा साथ चलता है।’’

‘बेगम जान’ को लेकर विद्या कहती हैं, ‘‘श्रीजीत जब बंगाली में इस फिल्म को ‘राजकहिनी’ के नाम से बना रहे थे तब उन्होंने मुझे इसका ऑफर दिया था। लेकिन उस समय मेरी थोड़ी तबियत खराब थी और बाद में मैं आराम करने के मूड में थी। इसलिए मैंने मना कर दिया। जिसके बाद उन्होंने रितुपर्णा सेनगुप्ता को लेकर फिल्म बना ली। बाद में मैंने जब ये फिल्म देखी तो मुझे लगा कि ये फिल्म हिंदी में भी बननी चाहिए।’’vidhya-

विद्या आगे कहती है, ‘‘ मैंने जब श्रीजीत को मना किया था तो मुझे लगा नहीं था कि वह दोबारा मुझसे संपर्क करेंगे किसी डायरेक्टर को जब एक बार आप किसी फिल्म के लिए मना कर दो तो वह नाराज हो जाते हैं, मुझे लगा था श्रीजीत भी नाराज हो गए होंगे। मुझे तब बहुत खुशी हुई जब वह ‘बेगम जान’ का बंगाली रूप लेकर वापस मेरे पास आए और कहा कि मैंने बंगाली  में फिल्म बना ली हैं अब अगर आप चाहें तो इसे हिंदी में भी बना सकते हैं, आप इसे देख लीजिए और बताइए। इस बार मैंने दो दिन में ही फिल्म करने के लिए हां कर दिया था। ‘न नेपटिजम’ का शिकार हुई न किसी कैम्प में शामिल हुई।’’

विद्या  आगे कहती हैं, ‘‘मेरा बॉलिवुड में काम करने का अनुभव अलग रहा है इसलिए मैं नहीं मानती कि फिल्म इंडस्ट्री में नेपटिजम होता है। अगर आपके अंदर हुनर हो, अगर आप मेहनत करने के लिए तैयार हैं और अगर आपमें आत्मविश्वास है तो आप कुछ भी कर सकते हैं। यहां पर कंगना का अनुभव गलत रहा है तो इसमें कोई सही या गलत नहीं है।’’

‘नेपटिजम’ की बहस पर बेगम जान (विद्या बालन) कहती हैं, ‘‘सबसे पहली बात मैंने शो देखा नहीं, दूसरी बात मैं फिल्मी गॉसिप बिलकुल नहीं पढ़ती इसलिए मुझे पता नहीं है कि सचमुच हुआ क्या है। मैं इस मामले में कंगना के खुलकर बोलने की सराहना करूंगी। एक औरत या लड़की का किसी मामले में आवाज उठाने का फैसला बहुत ही मुश्किल होता है। रही बात मेरी तो मैंने अब तक कभी भी बॉलिवुड में वंश-वाद का सामना नहीं किया है।’’vidya-ritu

बॉलिवुड में होने वाली कैम्प-बाजी पर विद्या कहती हैं, मैं बॉलिवुड के किसी कैम्प का हिस्सा नहीं बनना चाहती है। यह मुझे बहुत उबाऊ लगता है। कैम्प का हिस्सा  बनना आपकी लिमिट तय कर देता। मैं कभी भी किसी भी कैम्प का हिस्सा बनना भी नहीं चाहती थी। मैंने अब तक सिर्फ विधु विनोद चोपड़ा के बैनर में ही सबसे ज्यादा यानी शुरू की तीन फिल्में की हैं। मैं किसी कैम्प में शामिल होकर उन लोगों के साथ काम करने का मौका नहीं खोना चाहती जिनके साथ मैंने कभी काम नहीं किया है।

विद्या आगे कहती हैं, ‘‘मैं उस लड़की या औरत का सम्मान करती हूं जो अपनी बात कहना जानती है फिर चाहे वह गलत हो, सही हो या कुछ भी हो। एक लड़की का खुद के लिए खड़े होकर आवाज उठाना आसान नहीं है। आवाज उठाने के लिए बहुत साहस की जरूरत होती है। मैं लड़की की उस हिम्मत का सपॉर्ट करती हूं।’’

विद्या कहती हैं, ‘‘मैं एक फाइटर हूं, मेरी मां हमेशा कहती है कि अगर किसी काम के लिए सिचुएशन आसान होगी तब भी तुम उसे टफ बना देती हो क्योंकि तुम्हे फाइट करना अच्छा लगता है। यह सच भी है, मुझे मुश्किल काम साहस देता हैं। मैं एक्टर भी इसी लिए बनी ताकि मैं तमाम अलग-अलग मुश्किल किरदार निभा कर बहुत सारे लोगों की जिंदगी जी सकूं। इसलिए मैं अलग-अलग तरह के किरदार की तलाश करती रहती हूं।’’-vidya-twitter

विद्या आगे कहती हैं, ‘‘संघर्ष लाइफ का एक हिस्सा है। मेरी पिछली कुछ फिल्में नहीं चली तो वह संघर्ष ही है। आप इतनी मेहनत करते हो किसी फिल्म के लिए और फिल्म नहीं चलती तो इसे संघर्ष ही तो कहा जाएगा। जब ‘हे बेबी’ के आस-पास – में लोग मेरी तारीफों के पुल बांध रहे थे, उसके बाद मेरी आलोचना शुरू हो गई।

मेरे कपड़ों, वजन और फिल्मों को लेकर लोग कई तरह की बातें करने लगें,  हर जगह मेरी आलोचना हुई तब मुझे लगा इससे पहले जो तारीफ हो रही थी वह क्या था ? यही नहीं मुझे तो साउथ में भी रिजेक्शन का बहुत ज्यादा संघर्ष सहना पड़ा था।’’

विद्या बताती हैं कि एक समय तो ऐसा आ गया था कि मुझे लगा यह एक्टिंग का काम छोड़ दूं। वह कहती हैं, ‘‘बॉलीवुड में आने से बहुत पहले मुझे बड़ी निराशा महसूस होती थी। मैं रोती रहती थी। असफलता की वजह से बहुत गुस्सा भी आता था। मां से भी मेरे बहुत झगड़े होते थे। मेरी मां ने भी मुझे कहा कि बेटा हो सकता है कि फिल्में आपके लिए नहीं बनी हो। उनको डर था कि बॉलिवुड में हमारा कोई जानने वाला नहीं है। वह कहती थीं पढ़ाई कर लो एक्टिंग भी करनी है तो कर लो जिस दिन एक्टिंग की बात बननी होगी बन जाएगी। वैसे भी मां से झगड़ा करना सबसे सेफ होता है। मैं चेम्बूर के साई बाबा मंदिर में जाती थी और वहां खूब प्रार्थना करती थी और रोती थी। मुझे लगता था कि एक्टिंग छोड़ दूं लेकिन फिर अगली सुबह उठकर खुद से कहती थी कि मुझे तो एक्टर ही बनना है।’’begum jaan

विद्या की फिल्म ‘बेगम जान’ में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के समय की कहानी है। यह एक कोठे के बारे में है जो हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बॉर्डर के बीच पड़ता है। विद्या बालन इस कोठे की मालकिन ‘बेगम जान’ की मुख्य भूमिका में हैं, जिनके साथ और भी लड़कियां रहती हैं। वह इन सभी के साथ मिलकर अपने घर को बचाने की लड़ाई लड़ती हैं। फिल्म की पहली झलक में विद्या के कई पावरफुल डायलॉग हैं। फिल्म का निर्देशन श्रीजीत मुखर्जी ने किया है, ‘बेगम जान’ श्रीजीत मुखर्जी के निर्देशन में ही बनी बंगाली फिल्म ‘राजकहिनी’ का हिंदी रीमेक है। फिल्म में विद्या के अलावा गौहर खान, इला अरुण, राजित कपूर, आशीष विद्यार्थी, नसीरुद्दीन शाह और राजेश शर्मा जैसे अभिनेताओं की भी अहम भूमिकाएं हैं।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये