निर्देशक को काम नही आता – विद्या सिन्हा

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Choti Si Baat

 

मायापुरी अंक 46,1975

विद्या सिन्हा आजतक अपनी ‘राजाकाका’ की असफलता को नहीं भूली हैं। उनकी किस्मत ने साथ दिया और ‘रजनीगंधा’ हिट हो गई और वह स्टार हो गई हैं। वह अब हर बात का इल्जाम ‘राजाकाका’ के निर्देशक पर और हीरो किरण कुमार पर लगाती हैं।

अरे वह क्या निर्देशक था, मुझसे एक्टिंग ही नहीं करवा सका। फिर जब किरण ही एक्टिंग न कर पाये तो मै क्या करती..!

मैं यह मान भी लूं तो भी यह कैसे मान लूं कि कोई निर्देशक यह कहेगा एक्टिंग अच्छी ना करो। कितना भी घटिया रोल हो। फिल्म भले ही अच्छी न हो। एक अच्छा आर्टिस्ट कुछ न कुछ जान डाल ही देता है। उस फिल्म में प्रेमनाथ जी को ही ले लो। सब सीन ना सही कुछ सीन तो अच्छे किये थे उन्होंने विद्या सिन्हा को ‘रजनीगंधा’ में सराहा गया है। इसके पीछे कितनी मेहनत, कितना समय, कितना रॉ- स्टाक फिजूल में गया। यह तो उस फिल्म के निर्माता, यूनिट वाले जानते हैं या? कुछ न कहना ही ठीक है, क्योंकि आज विद्या सिन्हा का टाईम है और यह मशहूर कहावत है अल्ला मेहरबान तो गधा पहलवान।


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Mayapuri

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