अच्छी भूमिकाएं सौभाग्य से मिलती हैं – विनोद खन्ना

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मायापुरी अंक 49,1975

फेमस स्टूडियो में विनोद खन्ना ‘राज महल’की शूटिंग कर रहे थे। हमें पता चला तो हम भी वहां पहुंच गए। बातचीत के दौरान हमने उनसे पूछा।

कहते हैं ‘अचानक’ और ‘इम्तिहान’ के पश्चात आप ‘एक्शन’ से अधिक गंभीर भूमिकाएं करने में अधिक रूचि लेने लगे थे। किंतु इस समय आप अधिकतर ‘एक्शन’ फिल्में कर रहे हैं, इसका क्या कारण है?

आदमी चाहता तो बहुत कुछ है किंतु जो चाहता है वह होता नहीं दुर्भाग्य से वैसे रोल मिले नहीं। दूसरे मैं अपने आप को टाइप्ड करना नहीं चाहता मैं फिल्मों में बतौर एक्टर हर प्रकार के रोल करना चाहता हूं। मैं जो एक्शन फिल्में कर रहा हूं उनमें भी आपको अन्य फिल्मों की अपेक्षा काफी कुछ अलग हट कर मिलेगा। विनोद ने कहा।

“आने वाली किन फिल्मों में ऐसी बात है?” हमने पूछा।

फिल्में तो बहुत हैं किंतु जो फिल्म सबसे पहले आने वाली हैं वह ‘सेवक’ है। उसमें एक ओर मैंने भोले-भाले मेहनती रिक्शाचालक की भूमिका की है और दूसरी ओर वही रफ टफ भूमिका की “नहले पे दहला”“हेरा फेरी”“महा बदमाश”“राज महल”“आखिरी डाकू” आदि ऐसी ही फिल्में हैं। विनोद ने बताया।

हमने सुना था कि आप “प्रेम कहानी” में राजेश खन्ना और शशि कपूर के साथ काम नहीं करना चाहते थे। लेकिन फिर भी आपने काम किया। ऐसी क्या बात थी? हमने पूछा।

मुझे पता चला था कि रोल बहुत छोटा है किंतु जब राज साहब (राज खोसला) ने वह रोल सुनाया तो मुझे रोल में काफी जान लगी। हालांकि कि वह तीन सीन का ही रोल था। लेकिन मुझे ऐसा लगा कि अगर में ठीक तरह से निभा गया तो लोग बरसों याद करेंगे। उसमें अपनी प्रतिभा दिखाने के काफी अवसर थे। और वैसा ही हुआ। जैसा कि मैंने सोचा था। प्रशंसको और प्रैस ने रोल की बड़ी सराहना की। और लिखा कि वह मेरा स्मरणीय रोल है। विनोद खन्ना ने बताया।


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Mayapuri

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