जब शक्ति कपूर और महेश भट्ट के लिए फरिश्ता बनकर आए विनोद खन्ना            

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मिथिलेश सिन्हा

दमदार कलाकार तो फिल्म इंडस्ट्री में बहुत आए, लेकिन विनोद खन्ना जैसे दिलदार इंसान बिरले ही देखने को मिलते हैं। शक्ति कपूर उन दिनों पुणे फिल्म इंस्टिट्यूट से एक्टिंग की ट्रेनिंग लेकर मुंबई में स्ट्रगल कर रहे थे। उनके एक सहपाठी ने बताया था कि फिल्म स्टार विनोद खन्ना का छोटा भाई प्रमोद खन्ना उसका बहनोई है। शक्ति कपूर को फिल्मों में छोटा-मोटा काम तो मिल रहा था, लेकिन रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी। उन दिनों वे बतौर पेईंग गेस्ट दिन गुजार रहे थे और आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। एक दिन विनोद खन्ना से जब उनकी मुलाकात हुई तो उन्होंने खुशखबरी सुनाई कि मुझे सुनील दत्त की फिल्म में विलन का रोल मिला है, लेकिन साथ ही निराशा भी जाहिर की कि मेरा नाम सुनील कपूर से बदल कर उन्होंने शक्ति कपूर कर दिया है। विनोद खन्ना ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि तुम लकी हो क्योंकि मेरा करियर भी बतौर विलेन सुनील दत्त की ही फिल्म से शुरू हुआ था। बातों-बातों में उन्होंने शक्ति कपूर से पूछा, ‘कहां रहते हो?’ शक्ति ने सकुचाते हुए कहा, ‘आज यहां, कल वहां।’  विनोद खन्ना दो पल को अंदर गए और लौटे तो उनके हाथ में एक चाबी थी। शक्ति कपूर को सौंपते हुए बोले, ‘ये लो मेरे फ्लैट की चाबी। जुहू बीच के पास। बिल्डिंग का नाम है उदधि तरंग। आज से तुम वहीं रहोगे।’ शक्ति कपूर की आंखें छलछला आईं। किसी व्यक्ति का दिल इतना भी उदार हो सकता है! एक अनजान स्ट्रगलर को अपने घर की चाबी सौंप देना सबके बस की बात नहीं। शक्ति कपूर के लिए ‘उदधि तरंग’ लकी साबित हुआ। यहां वे बिना कोई किराया दिए तीन साल रहे और हीरो बनकर अपने खुद के घर में शिफ्ट हुए। विनोद खन्ना की चाबी उनके हाथों में वापस सौंपते समय भी शक्ति कपूर की आंखों में आंसू थे। धन्यवाद और खुशी के आंसू।

 इसी तरह राज खोसला के यहां प्रोडक्शन कंट्रोलर का काम करने वाले महेश भट्ट ने जब निर्देशन के मैदान में भाग्य आजमाने का फैसला किया तो ‘लहू के दो रंग’ में हीरो का रोल स्वीकार कर दोस्ती का फर्ज निभाने में विनोद खन्ना ने पल भर की भी देरी नहीं की। यही नहीं, शादी के बाद अपना खुद का घर खरीदने की जरूरत जब महेश भट्ट ने महसूस की तो ऐसे वक्त में विनोद खन्ना ही आगे आए और उनके नए घर का पूरा पैसा भरा। बिना किसी लिखा-पढ़ी के इतनी बड़ी रकम भला कौन देता है! महेश भट्ट की परेशानी को विनोद खन्ना ने भांप लिया। बोले,’अगर पैसे चुकाने की इतनी ही चिंता है तो तुम्हारे छोटे भाई को अपने स्टाफ में रख लेता हूं।’ अगले दिन से मुकेश भट्ट उनके सेक्रेटरी के रूप में काम करने लगे। आज वे एक बड़े फिल्म निर्माता हैं।


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Mayapuri

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