आर. के. स्टूडियो में कुछ बातें फिल्मीं सितारों से

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उस दिन मैं राजा मुराद से मिलने आर. के. स्टूडियो गया। रजा ‘फंदा’ की शूटिंग कर रहे थे और वही रणधीर कपूर अपनी फिल्म ‘धरम करम’ की।

स्टूडियो के अन्दर मैदान में रणधीर कपूर नीचे जमीन पर बैठे थे। रजा को देख उन्हौंने आवाज दी, ‘चाय पियोगे? फिर मेरी ओर देखकर कहा, और आप? रणधीर ने पूछने के बाद जवाब पाये बिना ही चाय का आर्डर दे दिया। (हालांकि यह चाय लगभग चालीस मिनट तक नही आई)

चाय के स्थान पर स्टूडियो का कोई कर्मचारी आया। बोला, साहब कोई साहब फोन पर आपको पूछ रहे हैं। उन्हें ‘बॉबी’ के फ्री पास चाहिए।

यह सुनकर रणधीर ने कहा, उन साहब से कहो ‘बॉबी’ जैसी बेकार फिल्म क्यों देखते हो? अरे हमारी फिल्म ‘रिक्शावाला भी लगी हुई है। कहें तो चालीस फ्री पास भिजवा दूं। क्यों ठीक है ना ।

स्टूडियो कर्मचारी रणधीर का आशय समझ कर लौट गया। तभी ऑफिस की खिड़की से चिंटू का चेहरा बाहर निकला। चिंटू को देखकर रणधीर जोर से चिल्लाये, ‘हाय चिंटू’ (ऋषि कपूर) ने बड़े प्यार से जवाब दिया और गायब हो गये।

उसके बाद बातें चली। हीरोइनों पर बातचीत के बीच रणधीर ने बताया, रेखा जैसी हीरोइन पूरी इंडस्ट्री में नही। इसके बाद भी बहुत कुछ कहा (जो यहां लिखी नही जा सकती) और फिर सेट पर चला गये। उनके जाते ही मेरी नजर चिंटू पर पड़ी मैं देखकर दंग रह गया कि वह स्टूडियो के ‘मेस’ में एक्स्ट्रा कलाकारों के साथ बैंच पर बैठकर सादा खाना खा रहे थे। विश्वास नही हुआ तो करीब पहुंचा। मुझे देखते ही चिंटू बोले, आइए, साथ दीजिये।

मुझे अभी भी आश्चर्य हो रहा था क्योंकि चिंटू कोई छोटा कलाकार नही हैं। वह तो प्रथम श्रेणी के कलाकारों में प्रमुख हैं और उनकी फिल्म ‘बॉबी’ ने न सिर्फ भारत में धूम मचाई है बल्कि विदेशों में भी बड़ी शान से दिखाई जा रही है।

मैंने जब चिंटू से यही सवाल पूछा तो उन्हौंने जवाब दिया, मैं इस स्टूडियो में बरसों से खाना खा रहा हूं जब भी इच्छा होती है यही खा लेता हूं। बस वक्त बदल गया है।

और इसी वक्त ने आपको स्टार बनाया है। यह आप क्यों भूलते हैं?

‘स्टार’ बनने का मतलब यह तो नही कि मैं घमंड करने लगूं। बड़ी बड़ी बातें करने लगूं या हवा में उड़ने लगूं अभी तो ‘बॉबी’ प्रदर्शित हुई है। दूसरी कई फिल्में शीघ्र प्रदर्शित होगी। देखना तो यह है कि ये फिल्में भी क्या ‘बॉबी’ की तरह हिट होती हैं या फिरइसके आगे कुछ कहने की बजाय चिंटू ने अपने हाथ का कौर मुंह में रख लिया। तभी मुझे ख्याल आया कि चिंटू तो खाना खा रहा हैं और मैं जबरदस्ती उनका इंटरव्यू लिये चला जा रहा हूं मैंने तुरन्त क्षमा मांगी तो वह बस मुस्करा दिये।

इसके बाद मैं लौट आया।

और आज जब यह सुनाता हूं कि चिंटू आने वाले वर्षों का सर्वाधिक लोकप्रिय सितारा होगा तो मुझे कोई अतिश्योक्ति नही लगती। बल्कि मैं भी यही कहूंगा कि अगर वह अपनी सीमा में रहे कोई भी ऐसी शक्ति नही, जो उनकी सफलता को रोक सके। आज की तारीख में इस दशक की सबसे बड़ी हिट फिल्म‘बॉबी’ की सफलता का भूत उनके सर पर सवार नही हो पाया है।

कुछ लोग यह कहते हैं कि अभिनय उन्हें विरासत में मिला है। यह तो सच है और इसमें चिंटू का कोई दोष नही। शम्मी कपूर, शशि कपूर उनके चाचा और स्वर्गीय पृथ्वीराज कपूर के पोता हैं। राज कपूर का बेटा हैं, रणधीर कपूर का भाई हैं। वैसे अभिनय तो रणधीर को भी विरासत में ही मिला है। फिर उन्हें चिंटू जैसी सफलता आज तक क्यों नही मिली?

चिंटू से मेरी दूसरी मुलाकात भी आर. के स्टूडियो में ही हुई। वह कही आउटडोर शूटिंग (शायद मद्रास) पर जा रहे थे। दो पल बातें करने के पश्चात उन्हौंने फिर शीघ्र ही मिलने का वादा किया।

एक दिन रेडियो प्रोग्राम के सिलसिले में चिंटू से मेरी मुलाकात श्री साउंड स्टूडियो में हुई तो मैंने अपने मतलब की काफी बातें पूछ ली। वहां वह ‘लैला मजनू’ की शूटिंग कर रहे थे। और मजनू की ड्रेस में थे। क्या आप ‘बॉबी’ की सफलता का रहस्य बता सकते हैं?

‘इसमें रहस्य कुछ भी नही है, चिंटू ने बताया, सीधी-सी बात है जब हम कोई नयी बात कहेगें, तो पब्लिक बड़े प्यार से उसे सुनेगी। जैसे शैलेन्द्र जी के गीत। वे अपने हर गीत में कोई न कोई ऐसी बात कहते थे कि श्रोता बार-बार वही गीत सुनना चाहते हैँ। ठीक यही बात ‘बॉबी’ की है। थीम का रूप बिल्कुल अलग है। लिंक से हटकर है हालांकि यह चीज बहुत पुरानी है, लेकिन इसका रूप ‘जवान’ है। जनता को बस यही बात भली लगी। क्या आप प्यार-व्यार करते हैँ हां हां क्यों नही, ऐसा कई बार हुआ है, लेकिन प्यार से अधिक ध्यान मैं अपने भविष्य की ओर दे रहा हूं ‘प्यार’ शादी, जैसी बातें मेरे करियर पर निर्भर करती हैँ, अगर मैं आर्टिस्ट बना रहा तो ‘प्यार’ भी अच्छा लगेगा और शादी वादी भी लेकिन आप तो शादी-वादी के बारे में अभी कुछ सोच ही नही सकते हैँ?

नही, मैंने कहा न कि मेरा ध्यान अभी करियर पर ज्यादा है, फिर भी आप यह तो बता सकते हैँ कि आपकी पसंद क्या है? आप किस तरह की लड़की से शादी करना पसंद करेंगे?

सबसे पहली बात तो यह कि वह ‘माडल गर्ल’ हो खूबसूरत तो हो ही, साथ ही आकर्षक भी, नेचुरल हो, इसके अलावा वह मुझे समझे, मेरी बातों को, आदतों को। यह कहकऱ चिंटू चुप हुए तो मैंने अगला सवाल पूछा,

बुरा न माने तो एक सवाल कुछ तीखा सा पूछूं?

हां हां बड़े आराम से। मान लीजिए आपकी कोई फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो जाये और। आप रातों रात फ्लॉप आर्टिस्ट बन जाये, जैसा कि हमारी फिल्म इंडस्ट्री में होता है तो आप क्या करेंगे?

‘सफलता-असफलता प्राप्त करना किसी के बस की बात नही, अगर बदकिस्मती से मेरे साथ यह हुआ तो मैं पुन: बड़े परिश्रम और लगन के साथ सफलता पाने के लिए जुट जाऊंगा। कोशिश करूंगा पुन: सफल कलाकार बनने के लिए, लोग कहते हैँ कि आपने एक ही फिल्म में इतना उत्तम अभिनय पेश किया कि बड़े-बड़े सितारों की छुट्टी हो गयी इस बारे में आपका क्या ख्याल है?

ये सब बेकार की बातें है। कोई कलाकार किसी की छुट्टी नही करता और न ही कोई ऐसा समझता है। फिर दूसरों के मन की बात मैं नही कह सकता, अपनी बात तो साफ है। अभी तो मुझे बहुत कुछ करना है, सीखना है।

‘सुना है आप ने ढेर सारी फिल्में हाथों में ले ली हैँ। क्या आप समझते हैँ कि आप की यह सब फिल्में भी दर्शकों को ‘बॉबी’ जैसे ही जबरदस्त पसंद आएँगी?

‘पहली बात तो यही कि मेरे पास फिल्में बहुत कम है, मैंने चुन-चुनकर फिल्में साइन की हैँ। और मेरा ख्याल है इन फिल्मों में मेरा अभिनयदर्शकों को निराश नही करेगा। आपकी शीघ्र प्रदर्शित फिल्में ‘जहरीला’ इंसान’ और ‘रफू चक्कर’ हैँ? इन फिल्मों के बारे में आप कुछ कहेंगे?

बस एक ही बात कह सकता हूं ये दोनों फिल्में पब्लिक को बहुत ही पसंद आंएगी कहानी भी अच्छी है।‘जहरीला’ इंसान और रफू चक्कर की दोनों कहानियों में बहुत अंतर है। दोनों का टेस्ट अलग है। इसलिए विश्वास है ये दोनों फिल्में चलेंगीया फिर पब्लिक जाने

बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि चिंटू में आत्मविश्वास की कमी नही है। उनके पास रोजाना ढेर सारी डाक आती हैं जिनमें अधिकतर लड़कियों के पत्र होते हैं कई प्यार भरी बातें एक प्रेमिका की तरह लिखती हैं तो कई तरह-तरह के सुझाव भी देती हैं।

इसके अलावा चिंटू को उनका बड़ा भाई रणधीर कपूर बहुत प्यार करता है। किसी से उन्हें मिलवायेगें तो बड़ी शान से परिचय करवायेगें,

‘मेरे छोटे भाई से मिलो मेरा दोस्त भी है और कॉलेज फ्रैन्ड भी। देखना एक दिन बहुत बड़ा स्टार बनने वाला है। और क्यों न बने आखिर है किसका बेटा किसका भाई है? कपूर खानदान से संबंध है इसका।

पिछले दिनों सुना था दोनों जब दिन में एक-दूसरे को देख न लें, दोनों को चैन नही पड़ता। डब्बू की शूटिंग खत्म हो तो वे चिंटू से मिलने के लिए भागते हैं और अगर चिंटू का ‘मेकअप’ हो जाता है तो वह डब्बू से मिलने भागते हैं।

आखिर में मैं एक बात लिखना ही भूल गया कि चिंटू को ‘चिंटू नाम बिल्कुल पसंद नही। वह कहते हैं मेरा नाम ऋषि कपूर है। पत्र में यह ध्यान न रख पाये, इसके लिए मै क्षमा चाहता हूं। और पाठकों से भी निवेदन है कि वे उन्हें अब चिंटू न समझें, क्योंकि अब वह बॉबी स्टार ऋषि कपूर हैं


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Mayapuri

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