एक मुलाकात जानकी दास और सतीश कौल से

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मायापुरी अंक 15.1974

फिल्मीस्तान में ‘वारंट’ की शूटिंग होने वाली थी। जब मैं वहां पहुंच तो सतीश कौल मेकअप कर रहे थे मैं उनसे कुछ बात करने ही वाला था कि जानकीदास ताजे समाचारों के साथ वहां आ पहुंचे। इसके पहले कि मैं कोई बात छेड़ूं उन्होनें स्वयं ही मुझे खबर दी कि ‘वारंट’ के निर्माता एन.पी.सिंह और निर्देशक प्रमोद चक्रवर्ती, दोनों कहानी के कानूनी विवाद में जीत गये है और से अब दावा करने वाले ओ.पी. रल्हन से अदालती खर्चे के साथ मुआवजा मांगने वाले है। उन्होनें बताया कि ‘वारंट’ की कहानी ओ.पी. रल्हन की कहानी से कतई नही मिलती यह बात मैंने सब लोगों को पहले ही बता दी थी। स्मरण रहे, कुछ ही दिनों पहले ओ.पी.रल्हन ने अदालत मैं दावा पेश किया कि ‘वारंट’ की कहानी उनकी कहानी है।

जानकीदास ने एक और मजेदार सूचना दी कि अमेरीका में इस समय जिस तेजी से अमरीकी युवक-युवतियां जिंदगी से निराश होकर सिखधर्म स्वीकार कर रहे है। उस विषय पर शाम बहल एक बड़ी शानदार फिल्म बनाने जा रहे है। हाल ही में इस विषय पर इलस्ट्रेटड वीकली के संपादक जी खुशवंत सिंह ने अपने पत्र में काफी दिलचस्प प्रकाश डाला है और शायद इस फिल्म की कहानी और पटकथा वे ही तैयार करें। मैंने पूछा लेकिन शाम बहल की ‘गोल्ड मैडल’ का क्या हुआ ?

जानकीदास ने बताया अब वह बहुत जल्द ही तैयार हो जायेगी उस में धर्मेन्द्र का रोल बढ़ा दिया गया है। उसमें काम करने वाले जितेन्द्र, शत्रुघ्न सिन्हा और प्रेमनाथ तीनों का मार्कैट बढ़ गया है इसलिए अब इस फिल्म के बनने में अधिक देर नही होगी। उन्होनें यह भी बताया कि शाम बहल की ‘आजादी’ फिल्म का प्रस्ताव भी किसी रद्दी की टोकरी में नही गया है जैसा कि कुछ लोग कहने लगे है।

इसी बीच सतीशकौल मेकअप रूम से निकले। वे सैट पर जाने ही वाले थे कि मैंने कहा देव साहब पहले बड़े कलाकार है। जिनके साथ आप ‘वारंट’ में काम कर रहे है आपको उनके साथ काम करते हुए कैसा लग रहा है?

मेरे इस सवाल पर सतीशकौल ने मुझे अपने मेकअप रुम में बुला लिया और सोफें पर मेंरे पास ही बैठते हुए कहा मैं सचमुच भाग्यशाली हूं कि मुझे ‘वारंट’ में देव साहब के साथ काम करने का मौका मिला है, वो मुझे छोटे भाई की तरह ट्रीट कर रहे है। उनसे बहुत कुछ सीख रहा हूं। जब कोई सीन होने वाला होता है तो कोने में ले जाते हैं और हौसला बढ़ातें हुए टिफ देते है। इसके अलावा समय पर आना, फुर्ती से काम करना, डायलॉग को जल्द से याद कर लेना, एक्शन को समझ कर फौरन एक्ट कर देना उनकी कुछ ऐसी विशेषताएं है जिनका मैं कायल हो चुका हूं यह कह कर सतीशकौल ने यह भी बताया कि एक दिन जब मैंनें उनसे कहा कि मुझे कुछ सीखने को मिल रहा है तो उन्होनें मेरी ओर तीखी निगाहों से देखा फिर मुस्कुरा कर कहा “किसी भी आर्टिस्ट की नकल करना ठीक नही है। अपने आप में ऑरिजीनेलिटी पैदा करो,


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Mayapuri

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