AAFT में वर्चुअल प्रोग्राम, आर्ट और कल्चर के प्रमोशन के लिए दिया अटल बिहारी बाजपेयी नेशनल अवार्ड

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नोएडा में Marwah Studios के AAFT इंस्टिट्यूट में एक तीन दिन का प्रोग्राम किया किया था जो कि एक वर्चुअली कंडक्ट किया गया था। आज इस प्रोग्राम का आखरी दिन था जो 2 बजकर 30 मिनट पर शुरू हुआ था।

इस दौरान कई सारी चीजें बच्चों द्वारा प्रसतुत की गई थी। जैसे फोटोग्राफी एग्जीबिशन, नॉन फिक्शन राइटिंग और मुशायरा। कई नामी लोग इस प्रोग्राम के लिए जुड़े थे। फोटोग्राफी एग्जीबिशन के दौरान- आनंद राज, डॉ रजत शर्मा, डॉ रेखा राजवंशी। वहीं नॉन फिक्शन राइटिंग के लिए डॉ विवेक गौतम, डॉ प्रेम जमेजाल, संध्या सुरी, कुमार अनुपम सभी से जुम एप के द्वारा जुड़े थे।मुशायरा के दौरान जैसे डॉ खालिद अलवी(नामी उर्दु कवि), डॉ रहमान मुसाविर, प्रताप सोमवांशी(उर्दु कवि), नज़ीम नक्वी, अलीना इतरत, ममता किरण, लक्ष्मी संकर बाजपेयी, डॉ मृदुला टंडन(फाउंडर जस्न-ए-हिंद), ।इस प्रोग्राम में संदीप मारवाह (प्रेसिडेंट, ICMEI) और सुशील भारती(फेसटिवल डायरेक्टर) थे। इस दौरान अटल बिहारी बाजपेयी नेशनल अवार्ड दिया गया था आर्ट और कल्चर को प्रमोट करने के लिए।

आधुनिक समय में कहानियां लिखी नहीं जातीं बल्कि सुनी जाती हैं, जैसे-जैसे समय बदल रहा है, लोग कम पढ़ रहे हैं और अधिक सुन रहे हैं, इसलिए हमें पॉडकास्ट या ऑडियो लेखन के रूप में कहानियों का एक नया रूप सुनने को मिलता है, जिसमें हम खुद से जुड़े होते हैं।  मुझे लगता है, अगर हम पहले के बारे में बात करते हैं, तो प्रेमचंद, मंटो, निराला, हरिवंश राय बच्चन जैसे कई लेखक और कवि कहे जाने लगे, लोग समझ गए कि उन्होंने क्या लिखा क्योंकि उनका लेखन बोलचाल की भाषा में था। यदि आप प्रेमचंद को पढ़ते हैं तो उस समय की समस्याओं के बारे में उन्होंने जो लिखा वह आज भी निरंतर है। जबकि आज हम चेतन भगत को पढ़ते हैं, तो ऐसा लगता है कि हम वर्तमान जीवन जी रहे हैं, इन दिनों लिखी जा रही कहानियां और उपन्यास आज के समय में अच्छी तरह फिट बैठते हैं। संदर्भ ने कहा, मारवाह स्टूडियो के निदेशक डॉ संदीप मारवाह ने सातवें वैश्विक साहित्य महोत्सव, नोएडा के दूसरे दिन वेबिनार “फिक्शन राइटिंग में नए रुझान” में कहा।

जिसमें चेक गणराज्य दूतावास के रोमन मसारिक और कई लेखक शामिल थे जैसे तन्मय दुबे, महेश दर्पण, विवेक मिश्रा, लेखक एरा तक और लेखक प्रतिभा जोशी। इसके साथ ही कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया जिसमें सर्वेश अस्थाना, सत्यपाल सत्यम, मनोज कुमार, श्रेयस्कर गौर, डॉ भावना तिवारी, डॉ. रमा सिंह और सोनरूपा विशाल जैसे कई प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाएँ सुनाईं। रोमन मसारिक ने कहा कि महामारी के पिछले दो वर्षों में हमने कई प्रसिद्ध हिंदी पुस्तकों का अपनी भाषा में अनुवाद किया है। लेखक एरा टाक ने कहा कि आजकल कहानियों की मांग कम हो रही है और उपन्यासों की मांग अधिक है, इसलिए कहानियां पीछे छूट जाती हैं।

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Mayapuri