विवान शाह और जोया अफरोज अभिनीत फिल्म ‘कबाड़ द क्वाइन’ 17 मई को एमएक्स प्लेअर पर आएगी

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कोरोना वायरस की महामारी के चलते देष के सभी सिनेमाघर बंद चल रहे हैं। परिणामतः पिछले डेढ़ साल से तैयार पड़ी फिल्मो के उनके निर्माता अब ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज कर रहे है। पिछले सवा एक साल में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, आयुष्मान खुराना, विद्या  बालन सहित  कई बड़े कलाकारों की फिल्में ओटीटी पर प्रदर्शित हुई हैं।13 मई को सलमान खान की फिल्म ‘‘राधे ’’भी  ओटीटी प्लेटफार्म पर ही आ रही है। तो वहीं अब वरदराज स्वामी द्वारा निर्देशित तथा विवान शाह और जोया अफरोज अभिनीत फिल्म ‘‘कबाड़ द क्वाइन’’ भी 17 मई को अग्रणी ओटीटी प्लेटफॉर्म एम एक्स प्लेयर पर प्रदर्शित होगी। – षान्तिस्वरुप त्रिपाठी

‘‘कबाड़ द क्वाॅइन पैसे की ह्यूमन साइकोलॉजी है,जो कि प्यार,रोमांस, छल, फरेब सहित हर भावनाओं को बयाँ करती है। हमें अक्सर सुनने को मिलता है कि पैसा नहीं, तो कुछ भी नहीं। पैसा ही सब कुछ है।पैसा ही खुदा और माँ बाप है। मुझे पैसा चाहिए सही या गलत तरीके से, कैसे भी आए, पूरी दुनियाँ में पैसे को लेकर एक मारा मारी चल रही है। एक युद्ध जैसा चल रहा है। सभी लोग पैसे के पीछे भाग रहे हैं और पैसा सभी को मार रहा है। इस विषय को फिल्म ‘‘कबाड़ द क्वॉइन’ में मनोरंजक तरीके से उठाया गया है।

फिल्म‘‘कबाड़ द क्वाइन’’की कहानी मुम्बई के एक झोपड़पट्टी इलाके में रहने वाले बंधन नाम के एक लड़के से शुरू होती हैं। कबाड़ का काम करने वाले बंधन को एक दिन बहुत कीमती सम्राट अकबर के जमाने के पाँच सौ साल पुराने राम सिया सोने के सिक्के मिल जाते हैं। तो वह आत्म विश्वास से भर जाता है।इसी बीच बंधन को एक हाई सोसाइटी की लड़की रोमा से प्यार हो जाता है। बंधन, रोमा को एक सोने का सिक्का देकर अपने प्यार का इजहार करता है। रोमा को पता चलता है कि यह सोने के महँगे सिक्के हैं तो वह अपने ब्वॉयफ्रेंड सैम के कहने पर बंधन से महज सिक्के ऐठने के लिए उससे प्यार का नाटक करती है। लेकिन रोमा को बंधन से प्यार हो जाता है। पैसे, प्यार और धोखे की कहानी दिलचस्प हो जाती है। क्या बंधन, रोमा के इस धोखे का शिकार हो जाता हैं? या बंधन के प्रेम में रोमा अपनी योजना बदल देती है? पैसे के लालच में अपनी प्रेमिका को इस्तेमाल करने वाला सैम क्या करता हैं?

एम बी एन एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले निर्मित, फिल्म ‘‘कबाड़ द क्वाॅइन’’के निर्माता बब्बन नेगी और मीरा नेगी हैं और सह निर्माता दीपक प्रजापत हैं। फिल्म की कहानी,पटकथा और संवाद संयुक्त रूप से शहजाद अहमद और वरदराज स्वामी ने लिखा हैं।फिल्म के निर्देषक वरदराज स्वामी तथा  संगीतकार संदेश शांडिल्य हंै। फिल्म ‘‘कबाड़ द क्वाइन’’ में मुख्य भूमिका में विवान शाह और जोया अफरोज के साथ ही अतुल श्रीवास्तव, अभिषेक बजाज, इमरान हसनी, भगवान तिवारी, यशश्री मसूरकर शहजाद अहमद महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएँगे।

निर्देशक वरदराज स्वामी कहते हैं-‘‘इस फिल्म का मुख्य आकर्षण विवान शाह हैं।आज के समय में एक निर्देशक को विवान शाह जैसा अभिनेता मिलना बहुत ही सुखद संयोग हैं। एक कलाकार का  ऐसे परिवार में जन्म हुआ है। यहाँ अभिनय और कला की बातें माता पिता के रोज की जिंदगी का हिस्सा होती हैं तो वह प्रतिभाशाली कलाकार और भी अधिक निखरकर सामने आता हैं। दुनिया भी उससे यही उम्मीद करती हैं। विवान शाह ने खुद को साबित किया हैं कि वह बेहतरीन कलाकार है। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की विवान शाह चुनौती पूर्ण भूमिका निभा सकते है। अभिनय उनके खून में हैं। मुझे उनके स्किल पर पूरा भरोसा हैं।’’

निर्माता बब्बन नेगी कहते हैंे-‘‘फिल्म ‘कबाड़ द क्वाइन’की कहानी कही जानी जरूरी हैं। यह समाज को नयी दिशा देने वाली फिल्म हैं।सबसे खास बात यह है की मनोरंजक तरीके से फिल्म एक बहुत महत्त्वपूर्ण संदेश देती है।लेकिन निर्देशक वरदराज ने बहुत ही रोचक अंदाज में एक महत्वपूर्ण बात इस फिल्म के माध्यम से कह जाते हैं, हमें पूरा विश्वास है कि दर्शकों को यह फिल्म बहुत पसंद आएगी।’’

अभिनेता विवान शाह कहते हैं-‘‘एक कबाड़ी वाले का किरदार निभाना बहुत खास रहा। हम सभी ने अपने रोजमर्रा के जीवन में सड़क पर हाथ गाड़ी खींचने वालों को देखा है। यह बहुत सामान्य लगता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं हैं। निर्देशक वरदराज स्वामी और लेखक शहजाद अहमद मुझे एक कबाड़ी वाले की बारीकियों, बाॅडी लंगवेज को समझने और अपनाने में बहुत सहायता की। इसके अलावा हम तीनों मुंबई की टपोरी भाषा के साथ बहुत ही एन्जाॅय किया । मुझे टपोरी भाषा का आनंद लेना था,क्योंकि वह वह भाषा है जिसे मैंने अपने दोस्तों के साथ बोलते हुए बड़ा हुआ हूँ। एक ऐसे किरदार को निभाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी, जो मेरे अनुभव के दायरे से बाहर था। वरदराज स्वामी सबसे प्रतिभाशाली निर्देशकों में से एक हैं, उनके साथ काम करना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है।वह नए जमाने के फिल्म निर्देशक हैं।


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Mayapuri

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