वहीदा रहमान

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वहीदा रहमान का जन्म 14 मई 1936 में हैदराबाद के एक परंपरागत मुस्लिम परिवार में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री हैं। वहीदा रहमान भारतीय फ़िल्म इतिहास की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक हैं। गाइड, प्यासा, चौदहवीं का चाँद, काग़ज़ के फूल, साहिब बीबी और ग़ुलाम, तीसरी कसम आदि वहीदा रहमान की उल्लेखनीय फ़िल्में हैं। वहीदा रहमान का चयन वर्ष 2013 की भारतीय फ़िल्म हस्ती के शताब्दी पुरस्कार के लिए किया गया। वहीदा रहमान को यह पुरस्कार गोवा में भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में 20 नवम्बर 2013 को प्रदान किया गया।

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बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना संजो रखा था वहीदा रहमान ने पर किस्मत को ये मंजूर न था, फेफड़ों में इंफेक्शन की वजह से वह यथोचित शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकी। भरतनाट्यम में प्रवीण वहीदा रहमान को अपने अभिभावकों से अभिनय की प्रेरणा मिली। सन् 1955 में उन्हें एक के बाद एक करके दो तेलुगू फ़िल्मों में काम करने अवसर मिल गया।

फ़िल्म सी.आई.डी. (1956) में खलनायिका का रोल दे कर गुरु दत्त वहीदा को बंबई (वर्तमान मुंबई) ले आये। सी.आई.डी. की सफलता के बाद फ़िल्म प्यासा (1957) में वहीदा रहमान को हीरोइन का रोल मिला। फ़िल्म प्यासा से ही गुरु दत्त और वहीदा रहमान का विफल प्रेम प्रसंग का आरंभ हुआ। गुरु दत्त एवं वहीदा रहमान अभिनीत फ़िल्म काग़ज़ के फूल (1959) की असफल प्रेम कथा उन दोनों की स्वयं के जीवन पर आधारित थी। दोनों ही कलाकारों ने फ़िल्म चौदहवीं का चाँद (1960) और साहिब बीबी और ग़ुलाम (1962) में साथ-साथ काम किया।

10 अक्टूबर, 1964 को गुरुदत्त ने कथित रुप से आत्महत्या कर ली थी जिसके बाद वहीदा अकेली हो गई, लेकिन फिर भी उन्होंने कॅरियर से मुंह नहीं मोड़ा और 1965 में गाइड के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड का पुरस्कार मिला। 1968 में आई ‘नीलकमल’ के बाद एक बार फिर से वहीदा रहमान का कॅरियर आसमान की ऊंचाइयां छूने लगा। साल 1974 में उनके साथ काम करने वाले अभिनेता कमलजीत ने उनसे शादी का प्रस्ताव रखा जिसे वहीदा रहमान ने सहर्ष स्वीकार कर लिया और शादी के बंधन में बंध गईं। वर्ष 2000 उनके ज़िंदगी में एक और धक्के के रुप में आया जब उनके पति की आकस्मिक मृत्यु हो गई पर वहीदा ने यहां भी अपनी इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए दुबारा फ़िल्मों में काम करने का निर्णय लिया और ‘वाटर’, ‘रंग दे बसंती’ और ‘दिल्ली 6’ जैसी फ़िल्मों में अपनी बेजोड़ अदाकारी का परिचय दिया।

सन 1963 में गुरु दत्त और वहीदा रहमान के बीच अनबन हो गयी और उनके बीच दूरी बढ़ गई। सन् 1964 में गुरु दत्त ने आत्महत्या कर ली। वहीदा रहमान ने 27 अप्रैल 1974 को कमलजीत सिंह, जो कि फ़िल्म शगुन (1964) में उनके साथ हीरो थे, से विवाह कर लिया।

अभिनय के क्षेत्र में बेमिसाल प्रदर्शन के लिए उन्हें साल 1972 में पद्म श्री और साल 2011 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ वहीदा रहमान को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड भी मिल चुका है। भारत के तीसरे सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण के लिए नामित किए जाने पर बॉलीवुड की सदाबहार अभिनेत्री वहीदा रहमान ने सिनेमा उद्योग में और काम करने की उम्मीद ज़ाहिर की है।

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वहीदा रहमान को 1972 में पद्मश्री, 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया, साथ ही उन्हें 1966 में फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार ‘गाइड’, 1967 बंगाल फ़िल्मी पत्रकार संघ पुरस्कार ‘तीसरी कसम’, 1968 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार ‘नीलकमल’, 1971 राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार ‘रेशमा और शेरा’  के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरूस्कार मिला।
उन्हें 1994 में फ़िल्म फ़ेयर लाइफ़टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड और 2006 में एनटीआर राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

आज भी वहीदा रहमान फ़िल्मों में सक्रिय हैं और भारतीय सिनेमा के स्वर्ण काल की याद दिलाती हैं। उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फ़िल्में दीं। पति की मृत्यु के पश्चात वहीदा बैंगलोर छोड़कर मुंबई में अपने दो बच्चों के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं। उनका अभिनय सफर जारी है।


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Mayapuri

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