‘‘अमिताभ बच्चन के साथ पुनः फिल्म करना चाहूंगा…’’ -धनुष

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तमिल भाषा में वह दस साल के अंदर 25 फिल्मों में अभिनय करने तथा हिंदी फिल्म‘‘रांझणा’’में अभिनय कर शोहरत बटोर चुके धनुष इन दिनों फिल्म‘‘शमिताभ’’को लेकर चर्चा में हैं,जिसमें उनके साथ अमिताभ बच्चन और अक्षरा हासन हैं.

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‘‘रांझणा’’की रिलीज के बाद बालीवुड के अलावा दक्षिण भारत की फिल्म इंडस्ट्री में आपको किस तरह के रिस्पाॅंस मिले?

मेेरे लिए फिल्म‘रांझणा’में अभिनय करने का अर्थ एक सपने को जीना था. इसी फिल्म की वजह से हिंदी भाषी दर्शको के बीच मेरी पहचान बनी.अब मुझे मुंबई ज्यादा अच्छा लगता है,क्योंकि लोग मुझे पहचानते हैं.‘रांझणा’की रिलीज के बाद दक्षिण भारतीय फिल्मकारों ने मुझको लेकर गर्व महसूस किया.वहाॅं मुझे सभी प्यार करते हैं.सभी ने हौसला बढ़ाया कि मैं ज्यादा से ज्यादा बेहतरीन हिंदी फिल्में करुं. हिंदी

फिल्म‘‘रांझणा’’की सफलता के बावजूद‘‘रांझणा’’से ‘‘शमिताभ’’तक पहुॅचने में इतना लंबा समय क्यों लग गया?

इसकी एकमात्र वजह यह रही कि मैं अच्छी स्क्रिप्ट का इंतजार कर रहा था.पर मैं उन सभी फिल्मकारों का एहसानमंद हू,जो ‘रांझणा’ के बाद मेरे साथ फिल्म बनाना चाहते हैं.कुछ स्क्रिप्ट अच्छी थी,मगर मेरी सोच के अनुसार उनके किरदारों में मैंने खुद को फिट नहीं पाया.इइंतजार करते करते ‘शमिताभ’का आफर आया.स्क्रिप्ट सुनते ही मुझे लगा कि हाॅं कर देना चाहिए.

फिल्म‘‘शमिताभ’’की सिक्रप्ट का कोई प्वाइंट जो आपको लगा कि यह आपके लिए है?

चरित्र चित्रण ही अनूठा है.पर इस पर मैं अभी विस्तार से रोशनी नहीं डाल सकता।

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फिल्म‘‘शमिताभ’’के निर्देशक आर बालकी के साथ काम करने के अनुभव क्या रहे?

सुखद अनुभव रहा.उन्होने मुझसे जो चाहा,मैने उसे देने की कोशिश की.आर बालकी ने एक कलाकार के तौर मेरे सामने जो चुनौतियां रखीं,उन्हे मैंने इंज्वाॅय किया.आर बालकी उन निर्देशकों में से हैं,जिन्हे पता है कि उन्हे जो कुछ चाहिए,वह सामने वाले कलाकार से किस तरह निकलवाया जा सकता है।

अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव क्या रहे?

शुरूआत के चार पाॅच दिन मैं इस कदर उत्साहित था कि मुझे रीयल में लग ही नहीं रहा था कि मैं अमिताभ बच्चन के साथ एक साथ कैमरे के सामने खड़ा हूं या उनके साथ ‘स्क्रीन षेयर’कर रहा हूं. मैं बहुत ही ज्यादा रोमांचित था.मैं एक बच्चे की तरह रोमंचकारी अनुभव से गुजर रहा था.उन्हे आब्जर्व करते हुए मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा.मुझे लगता है कि उन्हे आॅब्जर्व करने के लिए मुझे समुचित समय नहीं मिला.मुझे अभी और समय चाहिए.इसलिए उम्मीद करता हूं कि मुझे उनके साथ पुनः किसी फिल्म में अभिनय करने का मौका मिले।

हिंदी भाषा को सुधारने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

हिंदी पर बहुत ज्यादा काम कर रहा हूं .मैं अपनी तरफ से जल्दी से जल्दी हिंदी सीखने के प्रयास में लगा हुआ हूं.इसीलिए मैंने आपसे कहा कि आप मुझसे हिंदी में सवाल कीजिए.आप हिंदी में सवाल करते हैं,तो मैं उससे हिंदी सीखने की कोशिश कर रहा हूं. आज मैं आपको हिंदी की बजाय अंग्रेजी में जवाब दे रहा हूं,बहुत जल्द हिंदी में दूंगा।

किसी भी किरदार को निभाने के लिए‘‘लुक’’कितना मायने रखता है?

लुक बहुत महत्व रखता है.पर यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि किरदार की माॅंग किस तरह के लुक की है.‘रांझणा’में बहुत साधारण लुक था.‘शमिताभ’ में थोड़ा सा स्टाइलिष लुक है.पर स्क्रिप्ट की मांग न हो, तो लुक कोई मायने नहीं रखता।

बालीवुड में ज्यादातर कलाकार विभिन्न प्रकार के किरदार निभाने की बजाय हर फिल्म में अपने लुक को बदलने पर जोर देते हैं?
-यह उनकी मर्जी है.मैं इस पर कुछ कह नहीं सकता।

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संगीत अलबम लेकर आने की कोई योजना है?

फिलहाल सारा ध्यान ‘शमिताभ’’ पर है।

क्या बालीवुड में जमने के बाद आप दक्षिण भारत की यानी कि तमिल फिल्मो को बाय बाय कर देंगे?

ऐसा नहीं सोचना चाहिए.मेरे लिए हर भाषा की फिल्म समान महत्व रखती है।

क्या आप नहीं चाहते कि आपके भगवान यानी कि दक्षिण भारत के भगवान माने जाने वाले कलाकार रजनीकांत राजनीति से जुड़कर आम इंसानों की समस्याओं को दूर करने की दिषा में कुछ काम करें?

आप तो कन्फ्यूज करते हैं.कभी आप ईश्वर की बात करने लगते हैं,तो कभी आप हमारे फिल्मों के गाॅड की बात करने लगते हैं.पर आपने जो सवाल पूछा,उसके मैं दो जवाब दूंगा.प्रषंसक के तौर पर हम हमेशा उन्हें अपने साथ पाना चाहेंगे.हम चाहेंगे कि वह राजनीति में भी नाम कमाएं.पर पारिवारिक सदस्य के रूप में मैं कुछ नहीं कह सकता.पूरा तमिल नाड़ु चाहता है कि वह राजनीति से जुडे़.प्रशंसक के तौर पर मैंने अपने दिल कि बात आप से कह दी.आप बहुत संजीदा सवाल कर रहे हैं।


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Mayapuri

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