‘‘अपनी जिंदगी के कुछ अनुभवों को  अपने किरदार में डालते हैं’’ -अर्जुन रामपाल

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फिल्म‘राॅक आॅन’’के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने व फिल्म ‘डी डे’ में अंडर कवर एजेंट के चरित्र को निभाकर शोहरत पाने वाले कलाकार अर्जुन रामपाल अब अपने कैरियर को लेकर काफी सतर्क हो गए है। इसी के चलते अब वह काफी सोच समझकर फिल्में करते हैं.इन दिनों वह विक्रमजीत निर्देशित फिल्म‘‘राॅय’’को लकर सुर्खियाो में हैं.इस फिल्म में उनके साथ रणबीर कपूर और जैकलीन फर्नाडिश भी हैं। तो दूसरी तरफ वह मुंबई के गैंगस्टर से राज नेता बने अरूण गवली के जीवन पर बन रही फिल्म‘डैडी’को लेकर भी चर्चा में हैं,जिसमे वह अरूण गवली के चरित्र को निभाने वाले हैं।

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फिल्म‘‘राॅय’’के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

मैंने इसमें कबीर ग्रेवाल का किरदार निभाया है.जो कि बहुत सफल निर्देशक है.अब तक उसने हमेशा सभी एक्शन फिल्में ही बनायी हैं.उसकी फिल्म का नाम होता है-‘गन’, ‘गन पार्ट वन’, ‘गन पार्ट टू’अब वह ‘गन पार्ट थ्री’बनाने जा रहा है.उसके पास पैसे तो बहुत है, पर कहानी नहीं है, स्क्रिप्ट नहीं है. कबीर के पास ऐसी आइडिया भी नही है। आखिर यह फिल्म कैसे बनेगी? जबकि कबीर ग्रेवाल पर जल्द से जल्द फिल्म बनाने का दबाव है। क्योंकि उसके पास पैसे आ गए हैं। जिसने पैसे दिए हैं, यानी कि फायनेंसर चाहता है कि जल्द से जल्द फिल्म बने.तो वह मलेशिया की इस लोकेशन पर पहुंचता है.जहां उसकी मुलाकात आएशा (जैकलीन फर्नाडिस) से होती है। आएशा के पास बहुत प्यारी स्क्रिप्ट है, पर उसके पास पैसा नहीं है।पहले वह अपनी फिल्म की शूटिंग पेरिस में करना चाहती थी.पैसे ना होने की वजह से वह भी मलेशिया पहुंची है. उसे उम्मीद है कि मलेशिया में कुछ सरकारी अनुदान मिल जाएगा. कबीर व आएशा की मुलाकात होती है. आएशा की स्क्रिप्ट से कबीर प्रेरित हो जाता है और फिल्म बनाना शुरू करते है.फिर इनकी मुलाकात एक तीसरे किरदार राॅय से होती है.उसके बाद किस तरह इनकी जिंदगी में उथल पुथल मचती है,वही कहानी है।

तो ‘राॅय’फिल्म जिस बैक ग्राउंड पर बनी  है वैसी  फिल्मे आज के दौर में सफल नही होती ?

मैं नहीं मानता.मेरी, शाहरुख खान व दीपिका पादुकोण की फिल्म‘‘ओम शांति ओम’’भी तो फिल्म की पृष्ठभूमि पर थी,जो कि सफल थी. देखिए, हर फिल्म अलग होती है.यह फिल्म पर निर्भर करता है कि उसे दर्शक पसंद करता है या नहीं.अब कौन सी फिल्म चलती है,कौन सी नहीं,इसका जवाब मेरे पास नहीं है.

कबीर ग्रेवाल और अर्जुन रामपाल कितना अलग हैं,कितना समान हैं?

इस पर हमने फिल्म में भी बात की है। जब हम कोई चरित्र लिखते हैं,या अभिनय से संवारते हैं, तो कहीं न कहीं हम अपने संग बीती हुई चीजों को भी डालते हैं. अपनी जिंदगी के कुछ चीजों अनुभवों को उसमें डालते ही हैं.इस फिल्म के दौरान मेरे साथ ऐसी कई चीजें हुई, जिन्हें मैं इस फिल्म में पिरो सका। पिछले साल निजी जिंदगी में मैंने अपने पिता को खोया था. फिल्म में भी कबीर के पिता को खोने का सीन है, तो वह चीज मैंने उसमें तुरंत डाली। इस तरह की कुछ स्ट्रेंज चीजें होती रहती हैं।

फिल्म के निर्देशक विक्रमजीत को लेकर क्या कहेंगे?

जब वह मेरे पास स्क्रिप्ट लेकर आए थे,तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा था.मैंने उससे कहा कि स्क्रिप्ट और इसकी आइडिया तो बहुत अच्छी हैं, पर इसे बनाओगे कैसे? उसने मुझसे कहा कि वह बेहतर काम करेगा. जब फिल्म की शूटिंग चल रही थी,तो हम अलग लोकेशन पर थे. काम इस गति से हो रहा था कि पता नहीं चल रहा था कि काम क्या बन रहा है. हमें अपने निजी दृश्य अच्छे लग रहे थे.यूं भी इस जटिल स्क्रिप्ट को एक प्रवाह में लाना आसान नहीं था. इस कथा को लोग समझ सकें, इस अंदाज में पेश करना बहुत बड़ी चुनौती थी। पर जब मैंने फिल्म देखी,तो अवाक रह गया.मैंने जो उससे अपेक्षाएं की थी, उससे कहीं ज्यादा बेहतर फिल्म बनायी है. प्रतिभा शाली निर्देशक है. कहानी बताने का उसका अपना एक अलग अंदाज है। अब तक ऐसा निर्देशक मैंने नहीं देखा.मुझे यकीन है कि हर दर्शक को विक्रमजीत का इस तरह कहानी सुनाने का अंदाज पसंद आएगा.वह हर सीन में जो फीलोसोफी लेकर आया है, उसे भी लोग इंज्वाॅय करेंगे।

किसी किरदार को निभाने में लुक कितना मायने रखता है?

बहुत मायने रखता है.कलाकार के तौर पर जब किरदार का एक लुक पकड़ते हैं,तो आपकी बाॅडी लैंगवेज,आपके बोलने का तरीका, आपका एक्सप्रेशन सब कुछ बदल जाता है.लुक बदलते ही आपको लगता है कि आप कुछ और हैं.सेट पर कबीर की टोपी पहनते ही मेरे हाव भाव बदल जाते थे.मैं कबीर ग्रेवाल हो जाता था.

2006 में ‘आई सी यू’का निर्माण किया था.उसके बाद आपने कोई फिल्म नहीं बनायी.जबकि आप एक अच्छे व सफल बिजनेसमैन भी है। आपका रेस्टोरेंट का बिजनेस अच्छा चल रहा है?

वक्त वक्त की बात है.फिल्म बनाने का इरादा है.मेरे पास कुछ अच्छी स्क्रिप्ट भी हैं.वैसे तो मैं जिस फिल्म में अभिनय करता हूं,उस फिल्म में भी निर्माता की तरह काम करता हूं.फिल्म अच्छी बने,यह ध्यान रखता हॅू.हर विभाग पर ध्यान रखता हूं.
अभिनय के अलावा आपके दूसरे शौक क्या हैं?

मुझे कुत्ते,घोड़े व हाथी प्रिय हैं. अब घर पर मैं घोड़े व हाथी तो रख नहीं सकता,पर कुत्ता पाल रखा हैं.मुझे टेनिस खेलना और यात्राएं करना बहुत पसंद हैं।

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Mayapuri