‘क्या लेकर आए थे, क्या लेकर जाएँगे’ कहा था सिद्धार्थ ने एक अनन्त शांति के साथ

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कोरोना काल में, आम लोगों की समस्याएं और फ्रंटलाइन वॉरियर्स की तकलीफों से व्यथित सिद्धार्थ शुक्ला खुद भी सबकी मदद करते थे और दूसरों को भी प्रेरित करते थे सबकी मदद करने के लिए। उन्होंने कहा था, ‘यह देखना अच्छा है कि इस पेंडमिक के दौरान कैसे लोग दूसरों की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। सिद्धार्थ ने ये भी कहा कि कोरोना महामारी एक खतरनाक समय है जो जाति, वर्ग, पंथ या लिंग के बीच अंतर नहीं करता है।

जब उनसे पूछा गया कि, क्या यह पेंडमिक के कारण सब कुछ बुरा ही बुरा हुआ है तो उन्होंने अपने अंतर्मन के  सकारात्मकता की भावना को बुलंद करते हुए कहा था, ‘हर मुसीबत का एक श्वेत पहलू भी होता है। इस महामारी ने हमें अपने रिश्तों को और अधिक महत्व देना सिखाया। ये वो वक्त है जब हम किसी से मिल नहीं सकते, कुछ ले दे नहीं सकते तो रह जाता है भावना का आदान प्रदान। इस पेंडमिक ने हमारे जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण को ही बदल दिया है।‘अपने इस दार्शनिक वक्तव्य को विस्तार देते हुए वे बोले थे, ‘इस नई परिस्थिति और नए भय ने हमें जीवन की नजाकत का एहसास दिलाया है! लेकिन सब कुछ अभी खत्म नहीं हुआ है, ऐसी दर्दनाक और भयानक परिस्थिति में भी कितने सारे महान लोग उठ खड़े हुए और अपने जान की परवाह न करते हुए अपने कर्तव्य की पुकार को तरजीह दें रहें हैं। यह सब देखकर दिल में आशा का संचार होता है। जरा देखिए तो, किस तरह हमारा देश भी अपने पड़ोसी देशों की मदद करने के लिए उठ खड़ा हुआ हैं। ‘‘वाकई इस महामारी ने हमें अपने रिश्तों को और अधिक महत्व देना सिखाया है। अब हम अपने रिश्तों और भावनाओं को हल्के में नहीं ले सकते हैं। आज के समय में जब हम सब अपने प्यारों को खोने के डर से जूझ रहे है तब कोई भी दूसरी भावना, कोई भी काम इस मन की तकलीफ से बड़ा नहीं हो सकता। यह डर  जाति, वर्ग, पंथ या लिंग के बीच अंतर नहीं करता है! ‘जब सिद्धार्थ से प्रश्न किया गया कि आज की स्थिति से वे किस तरह खुद जूझ रहे हैं, क्या उन्हें कोई समस्या हो रही है?, तो सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया था, ‘हर कोई अलग-अलग तरीकों से इस समय की तकलीफों से जूझ रहे हैं, अपने तनाव को कोई न कोई रास्ता दे रहें हैं। लेकिन चाहे कोई कुछ भी करे पर मुझे नहीं लगता कि इस दर्द, पीड़ा और भयावह स्थिति से कोई मुक्त हो सकता है जो हम अपने चारों ओर देख और सुन रहे हैं। लेकिन मैं निराश नहीं हूँ। मुझसे जो बन पड़ रहा है, मेरे हाथ में जो है, वो मैं कर रहा हूँ। अपने लिए तो सब करते हैं पर अपनी अपनी हैसियत के अनुसार जो कुछ भी हम कर सकते हैं हमें करना चाहिए, मैं जितना हो सके कोविड के प्रति जागरूकता पैदा करने और कोविड उपयुक्त व्यवहार के बारे में प्रचार करने का प्रयास करता हूं। मुश्किल की इस घड़ी में  मन ही मन घुटते रहने के बदले अपने परिवार के साथ और अपने दोस्तों, रिश्तेदारों तथा शुभचिंतकों से बातचीत करने से बहुत मदद मिलती है, क्योंकि ऐसा करने से आपको अलग-अलग दृष्टिकोण मिलते हैं, जो आपको इस मुसीबत को बेहतर तरीके से सामना करना सिखाते है’

उनके करियर और फैन फॉलोइंग के बारे में जब उनसे पूछा गया कि  उन्हें अपना भविष्य कैसा नजर आ रहा है तो उन्होंने उत्साह से कहा था, ‘यह बहुत अद्भुत है कि लोग मुझसे बहुत जुड़ाव महसूस करते हैं। बिग बॉस 13 के बाद मैं जैसे हर घर का अपना सदस्य बन गया। आज जब कोरोना की वजह से लोगो के मन में इतनी चिंताएं और बहुत सारे नए किस्म के काम आ गए है तब भी वे मुझसे जुड़ने के लिए अपना बहुमूल्य समय निकालते हैं इससे मैं अभिभूत हूँ। मैं धन्य महसूस करता हूं। मैं कह नहीं सकता कि मेरे प्रति सबके प्रेम का कारण क्या है, शायद मेरी ईमानदारी हो। मैंने अपने भूत, वर्तमान भविष्य को लेकर कभी बनावट नहीं की, मैं एक आम आदमी हूँ और आम आदमी से आसानी से कनेक्ट कर पाता हूँ। शायद ये वजह हो।’

खबर ये भी थी कि सिद्धार्थ को जिस बिग बॉस 13 ने घरघर का हीरो बना दिया था उसे स्वीकार करने से पहले उन्होंने दस बार सोचा था, एक बार तो उन्होंने सोचा था ‘मना कर दूँ‘ फिर ऐसा क्या हुआ कि आखिर वे मान गए?  इस बारे में सिद्धार्ध ने कहा था, ‘‘ हाँ, पहले सोच रहा था, क्या मैं इतने दिनों तक अपने को बिग बॉस के घर मे कैद रख सकता हूँ, क्या मैं वहाँ के प्रेशर और हर पल कैमरे की जद  में अपने को कम्फर्टेबल महसूस कर सकता हूँ? फिर मुझे मेरे हर प्रश्न का जवाब ‘हाँ में मिल गया तो मैं तैयार हो गया! मुझे अपने फैसले के बारे में कोई शक नहीं रह गया था। क्योंकि जैसा मैंने कहा था कि पहले मैं इतना उत्सुक नहीं था। मुझे याद है कि एक दिन मैं अकेला बैठा सोच रहा था, कि ‘ऐसा क्या है जो तुम्हें घर में प्रवेश करने से डरा रहा है?‘ मैंने खुद से पूछा, ‘क्या ऐसा कुछ है जिससे मुझे डर लग रहा है,  शर्म आ रही है? क्या मेरा ऐसा कोई पक्ष है जो मैं नहीं चाहता कि दुनिया देखे?’ और मेरे दिमाग में इन सभी विचारों के लिए मेरे जवाब थे ‘नहीं’ । तभी मैंने अपने आप से कहा कि अगर मैं अपने आप में इतने सहज महसूस कर रहा हूँ तो क्या समस्या है, बस वहाँ जाओ, अच्छा समय बिताओ और वापस आ जाओ। और मैंने ऐसा ही किया जिसका नतीजा लाजवाब था।’

पहले सिद्धार्थ को लोग उनके निभाए गए भूमिकाओं के लिए पहचानते थे, जो सॉफ्ट और जेंटल था, फिर बिग बॉस में उनका असली रूप सामने आने के बाद लोगों ने उन्हें अलग नजरिए से देखना शुरू किया, उस शो के बाद लोगों ने उनको झगड़ा करते भी देखा और गुस्सा करते भी, तो क्या यह इमेज उन्हें पसंद आया? ,इस बारे में वे बोले थे, ‘ये सही है कि मैंने जो भूमिकाएं निभाई थी सीरियल्स में , मैं उसके जैसा बिल्कुल नहीं था। मैं जानता था लोग मुझे सॉफ्ट और जेंटल रूप में पसन्द कर रहे हैं और बिग बॉस के बाद लोगों का मेरे प्रति नजरिया अलग हो जाएगा , उन्हें झटका लगेगा, लेकिन मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं था इस बात से। जैसा कि मैंने कहा, मैं अपने आप में सहज था और मैं जानता था कि इस दुनिया में हर कोई ऐसा है, कोई भी सौ प्रतिशत परफेक्ट नहीं हो सकता। हमेशा जेंटल सॉफ्ट कोई नही रह सकता। अगर हम बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो भी हम नहीं कर सकते हैं। बल्कि बिग बॉस हमें हमारा असली चेहरा दिखा देता है और फिर हम अपने  खामियों से पूरी तरह निपटने के बारे में सोच सकते है और मैं हर दिन ऐसा करने की कोशिश करता हूं। मुझे खुशी है कि अब लोग मेरे असली स्वभाव से परिचित हो गए हैं और मुझे उसी रुप में प्यार कर रहे हैं जैसा मैं हूँ। अब सब कुछ साफ है, कोई दुराव छिपाव नहीं।क्योंकि दुनिया मुझे असली जानती है। ‘‘क्या उन्हें इस बात का मलाल है कि अब जब उनका करियर एक सुनहरे दौर की तरफ बढ़ रहा है तब इस महामारी ने सब चैपट कर दिया?” इस प्रश्न का कितना सुंदर जवाब दिया था सिद्धार्थ ने जिससे मालूम पड़ता है कि उनके मन में कोई डिप्रेशन नहीं था, वे बोले थे, ‘‘मैं आज के इस पन्डेमिक को नकारात्मक सोच में नहीं देखता। इस दौर में भी जिस तरह का काम मेरे पास आ रहा है उससे मैं खुश हूं। दुनिया ऐसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। मैं खुद को वहीं से देखता हूं जहां मैं पहले था। मैं क्या लेकर आया था और क्या लेकर जाऊँगा? जो कुछ हो रहा है वो सबके साथ हो रहा है। बल्कि मैं तो बहुत अच्छी स्थिति में हूँ । मुझे जिंदगी में कभी किसी बात का अफसोस नहीं रहा अपने को लेकर। मुझे कभी नहीं लगता कि ‘ओह, मैं और भी बहुत कुछ कर सकता था’, क्योंकि इसकी कोई सीमा नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं कुछ करना ही नहीं चाहता, आने वाले सालों में  मैं और अधिक करना और बेहतर करना चाहता हूं। मैं हर परिस्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार हूं, मेरे पास बहुत काम है और मैं इसीमें बहुत खुश हूं।”

सिद्धार्थ के पास सीरियल्स और वेब सीरीज के ढेरों ऑफर्स तो थे लेकिन फिल्मों के मामले में वे जरा उदासीन थे, बहुत कम रुचि ले रहे थे फिल्में साइन करने में, ऐसा क्यों? इसका भी उनके पास बेहतरीन सोच वाला जवाब था, वे बोले थे, “मैं किसी चीज के पीछे नहीं पड़ता। फिल्मों में अच्छी भूमिका के इंतजार में टीवी और वेब के बेहतरीन ऑफर्स को क्यों ठुकराया जाए? जब अच्छी फिल्में मिलेंगी तब मिलेंगी। जब उन्हें होना होगा तो होगा। लेकिन हां, अगर मुझे कोई फिल्म ऑफर मिले तो मैं जरूर करूंगा। मिलना भी शुरू हो गया है लेकिन टीवी और वेब सीरीज को कभी नहीं छोड़ूंगा।”

सिद्धार्थ पहले की तुलना में सोशल मीडिया से ज्यादा जुड़ गए थे, उनके करोड़ो फैन फॉलोइंग होने से उनका काफी समय सोशल मीडिया इंटरैक्शन में जाता था, क्या ये वही सिद्धार्थ थे जो पहले सोशल मीडिया या कहें कि प्रिंट मीडिया से दूरी बनाए रखते थे? इस प्रश्न पर पर उनका जवाब था, ‘‘ये सही है कि मीडिया से इंटरैक्शन करने में मुझे कोई खास इंटेरेस्ट नहीं था, देखा जाए तो आज भी नहीं है। इंटरव्यू देना, अपना प्रचार करना मुझे नहीं आता। मैं लो प्रोफाइल रहना पसंद करता हूं, लेकिन बिग बॉस के बाद जिस तरह का प्यार उमड़ पड़ा, वह जबरदस्त था। मैं अपने फैन्स के प्रति आभारी महसूस करता हूँ और सिर्फ उनसे इंटरैक्ट करना पसमद करता हूँ। यह वही लोग है जिसके लिए आप वास्तव में काम करते हैं। मैं ऋणी महसूस करता हूं और जितना हो सके अपने सोशल मीडिया परिवार के साथ संवाद करने की कोशिश करता हूं। मुझे यह पढ़ना अच्छा लगता है कि वे मेरे बारे में क्या कहते हैं। कभी अच्छी चीजें होती हैं, कभी बुरी बातें भी वे करते हैं। लेकिन मैं ट्रोलिंग को भी ध्यान से देखता हूँ। मैं यह देखने की कोशिश करता हूं कि क्या कुछ ऐसा है जिसे मैं नकारात्मक टिप्पणियों से भी निकाल कर सीख सकता हूं, सुधार सकता हूँ?”

सिद्धार्थ से जब उनकी दोस्त शहनाज गिल के बारे में पूछा जाता था तो वे इसपर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त ना करते हुए सिर्फ इतना कहते थे, ‘‘जीवन में ऐसे दोस्त भी होते है जिसे कोई नाम नहीं दिया जा सकता है। वे हमारे जीवन के वो हिस्से होते है जो अपने होते है, जिनकी चर्चा नहीं कि जाती सिर्फ एहसास किया जा सकता है।” सिद्धार्थ ने बहुत कुछ महसूस किया, बहुत कुछ चाहा और बहुत कुछ जाने भी दिया। किसी बात की अति नहीं की किसी बात का अंत नहीं किया। शायद इसलिए वे अनन्त हैं। वे जहाँ भी रहेंगे वहीं रच जाएंगे। खुशबू की तरह, हवा की तरह और पानी की तरह। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को ये अपार दुख सहने की शक्ति दें।

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Mayapuri