बॉक्स ऑफिस पर क्या उम्मीद हैं ‘अलोन’ की

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अलोन एक थाई नाम की फिल्म से प्रेरित है, लेकिन डायरेक्टर भूषण पटेल ने इसे कहीं से कहीं पहुंचा दिया है. बिपाशा को वैसे भी बॉलीवुड में हॉरर क्वीन कहा जाता है, ऐसे में उन्होंने अपने इस रूप के अनुरूप ही काम किया है. उन्हें डर के एक्सप्रेशंस देने का काफी अनुभव है, लेकिन हॉरर फिल्में बनाने वाले हमारे डायरेक्टर्स को थोड़ा और समझदार होना पड़ेगा वर्ना सिर्फ डराने की सोच से काम नही चलेगा.

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जरा गोर फ़रमाइए की कहानी में ऐसा क्या है कि आप फिल्म देखने जायें 
दो बहनें हैं जो आपस में जुड़ी हुई हैं. दोनों ऐसे ही हमेशा जुड़े रहने की बातें करती हैं. लेकिन एक लड़का आता है और उनकी जिंदगी बदल जाती है. उन्हें उससे प्यार हो जाता है. एक बहन इससे खफा हो जाती है और अलग होने के लिए कहती है. डॉक्टर दोनों को अलग करते हैं, और

एक हादसा हो जाता है. फिर एक बहन की जिंदगी को दूसरी बहन दूभर कर देती है. फिर शुरुआत होती है बिपाशा बसु स्टाइल चीखों की, डर और सेक्स के चक्कर में दिमाग उलझ जाता है.

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बिपाशा और कारण ने क्या कमाल किया यह भी जान लेते हैं.
बिपाशा तो हॉरर की दुनिया का बड़ा नाम बन चुकी हैं और सेक्स अपील तो उनमें कमाल की है ही. लेकिन उनके डर से जुड़े एक्सप्रेशन देखने के लोग आदी हो चुके हैं. उन्होंने अपनी ऐक्टिंग दिखाने की बजाय अपनी अपनी टोंड बॉडी दिखाने की कोशिश की  है, बिल्कुल अपनी फिटनेस डीवीडी की तरह. यही हाल करण का भी है. उन्होंने भी  बॉडी और ऐब्स बनाए हैं तो वह दिखाने के लिए ही हैं. इसको वे बखूबी दिखाते भी हैं. बेशक फिल्म डराए या न डराए, भावनाएं जगाए या न जगाए, लेकिन परफेक्ट बॉडी बनाने के लिए जरूर प्रेरित करती है.

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अब देखते हैं की फिल्म की कमाई की क्या उम्मीद है.
भूषण पटेल को कहानी और तर्कों को थोड़ा सॉलिड रखना था. जब वे अपनी प्रेरणा हॉलीवुड को बनाते हैं और सीन वहां से उठाते हैं तो शायद उन्हें कहानी को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. अपने हॉलीवुड गुरुओं से सीखना चाहिए कि वे किस तरह से ‘द कन्ज्यूरिंग’, ‘इनसीडियस’ जैसी फिल्मों को बनाते हैं और उनका अंत करते हैं. बेशक इस हफ्ते कई जॉनर की फिल्में रिलीज हो रही हैं, ऐसे में ‘अलोन’ को भी दर्शक मिल ही जाएंगे.


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Mayapuri

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