पूर्ण लॉकडाउन हटने के बाद कैसा होगा बॉलीवुड का स्वरूप?

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धीरे धीरे पूरे देश मे कोरोना बढ़ने की गति धीमी पड़ रही है और इसीके साथ ’अनलॉक’ होने की प्रक्रिया भी शुरू होचुकी है। कोविड की तीसरी लहर (कमसजं़) आने की आशंका ने भले ही लोगों को अंदर से भयाक्रांत कर रखा है लेकिन काम पर जाने का जोखिम उठाने के लिए भी लोग तैयार हैं।करें भी तो क्या करें (?), फिल्मी लोग भी इसी भयामोह के शिकार हैं। बॉलीवुड की खबर है कि तमाम फिल्मी बैनर तैयार होकर काम करने की राह देख रहे हैं। फिल्म नगरी मुम्बई में शूटिंग के लिए लॉकबंदी उठने की समय सीमा बढ़े और सब काम पर चल पड़ें (अभी सीमित अवधि के लिए सिर्फ 9 टू 5 की अनुमति है),सब आदेश की राह तक रहे हैं। आइए देखें-लॉकबंदी उठने के बाद कैसा होगा बॉलीवुड का स्वरूप?

एग्रीमेंट का स्वरूप बदलेगा:

बदन चिपकाऊं शॉट का ‘क्लॉज़’ लिखा होगा! भले ही यह कोई ऑफिसियल बात नहीं है किन्तु कुछ निर्माताओं का मानना है कि जिस तरह दो साल पहले रुडम्म् ज्व्व्  के दौर में एग्रीमेंट में लिखा जाने लगा था कि कहानी की मांग पर रोमांटिक दृश्य में शारीरिक चिपका चिपकी होने पर  ’मोलेस्टेशन’ का आरोप नहीं लगाया जा सकेगा, वैसे ही अब कोविड- नियमों का पालन भी अनुबंध का हिस्सा होगा। जो सबको स्वीकारना होगा।यह लिखा जाएगा कि शूटिंग पर कोविड के डर से कलाकार चिपकने के दृश्यों में दूर नहीं भागेंगे।भले ही तज.चबत टेस्ट उसी दिन का देना पड़े, कलाकार चिपकने वाले दृश्यों के फिल्मांकन से दूर नहीं भाग सकेंगे। संभावना यह भी है कि निर्माता अब बलात्कार जैसे दृश्य सांकेतिक (पुरानी फिल्मों जैसा) ही रखा करेंगे। क्योंकि अब खलनायक किसी भी लड़कीं से चिपकने की हिम्मत नहीं करेगा।

रेट बढ़ेगा डुप्लीकेटों का:

हमने इमरान खान से पूछा कि क्या वह अब भी लिपलॉक चुम्बन दृश्य उसी स्फूर्ति से करना चाहेंगे? इमरान ने ’कोरोना है’, कहकर फोन ही कट कर दिया। जाहिर है कोविड-19 में  अपने बहुतेरों का दर्द सह चुके सितारे चुम्बन , लिपटा चिपटी या बहुत पास के स्पर्श वाले सीन करने से कतराएंगे। ऐसेमें, रुकी हुई पहले की वो फिल्में जिनमें ऐसे दृश्य अधूरे हैं उनको पूरा करने के लिए या फिर बोल्ड विषय की कहानी वाली फिल्मों की पूर्णता के लिए निर्माता डुप्लीकेटों का सहारा लेगा। जाहिर है सितारों के डुप्लीकेटों का रेट बढ़ जाएगा। शाहरुख, सलमान, अजय, अक्षय, कटरीना,आलिया, करीना , सारा के डुप्लीकेट करने वाले कलाकार अपनी कीमत वसूलेंगे, ऐसा समय आने वाले दिनों में हो सकता है।

कम बनेंगी क्राउड वाली फिल्में:

एक सुलझे हुए निर्देशक बताते हैं कि भले ही व्ज्ज् प्लेटफॉर्म पर फिल्म या वेब सीरीज बनाने वाले अपने को  आज़ाद महसूस कर रहे हों, महफूज वे भी नहीं रहने वाले हैं।सरकार की गाइड लाइन लागू होने के बाद वे भी वैसी ही फिल्म बनाएंगे जो थियेटर में भी चला सकें। और, थिएटर के लिए कम बजट की, कम भीड़ भाड़ की फिल्में ही बना करेंगी। अब निर्माता आंदोलन, बायोपिक, स्वामी महात्माओं की, आज़ादी- विषयक फिल्में कम बनाना चाहेंगे क्योंकि इन फिल्मों के लिए भीड़-  क्राउड की ज़रूरत पड़ती है। सरकार ने ’मास-डिस्टेंस’ का शख्ती से पालन कराने का विचार किया है। अब भीड़ के दृश्यों को कम्प्यूटर से ही किया जा सकेगा।

देश की लोकेशनों पर बनेंगी फिल्में:

सबसे अच्छी बात सम्भवतः यह होगी कि विदेशों में भी कोरोना का डर होने से, निर्माता देश मे शूटिंग करने की पहल करेंगे। कश्मीर की घाटी बहुत दिनों से कैमरों की लाइटों से चुधियायी नहीं है। शूटिंग के लिए सेंट्रल प्लेस होगा जम्मू-कश्मीर। वहां चुनाव होकर स्थाई सरकार बनने दीजिए, देखेंगे कैसे निर्माता यूनिट लेकर कश्मीर की तरफ चल पड़ेंगे। बस, कोरोना को जाने दीजिए। भारत का सिनेमा फिर से एकबार लहलहाएगा!


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Mayapuri

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