दूरदर्शन चैनल की टीआरपी यानि चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात….

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लॉकडाऊन के दौरान खुशी से झूम रहा दूरदर्शन चैनल जल्द ही ना खो बैठे अपनी खुशियां

लॉकडाऊन के दौरान हर ओर नकारात्मकता का माहौल है। इस जानलेवा वायरस ने मानो लोगों के चेहरों से मुस्कान ही छीन ली हो। लेकिन इस लॉकडाऊन दूरदर्शन चैनल के लिए मानो संजीवनी बूटी का काम किया है। मरणावस्था में पहुंच चुके एक चैनल को पुनः जीवित करके।

लेकिन यहां हम वर्तमान में मिली दूरदर्शन की खुशियों और इसके वापस लौटकर आए सुनहरे वक्त की बात नहीं कर रहे हैं। बल्कि हम तो इसके भविष्य को लेकर चिंता ज़ाहिर कर रहे हैं। जी हां….भविष्य की चिंता..जिसमें हमें दूरदर्शन उसी दौर में लौटता हुआ नज़र आ रहा है जहां वो मार्च के पहले 2 हफ्तों में था।

2 हिट सीरियल के भरोसे दौड़ रहा है दूरदर्शन चैनल

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इस वक्त दूरदर्शन केवल चल ही नहीं रहा बल्कि दौड़ रहा है वो भी बहुत तेज। इसके पीछे दो कारण है। 1987 में आई रामानंद सागर की ‘रामायण’ और 1988 में आई बी आर चोपड़ा ‘महाभारत’। दोनों के दोबारा टेलीकास्ट होने के ख़बरे जैसी ही दूरदर्शन ने दी तो लोगों के ज़हन में पुरानी यादें ताज़ा हो गई। कुछ लोगों का अपना बचपन दोबारा याद आ गया। इसीलिए रामायण और महाभारत को देखने का क्रेज़ लोगों में खूब दिखा। .नतीजा ये रहा है कि दूरदर्शन की टीआरपी ने पहले ही हफ्ते कई रिकॉर्ड तोड़ डाले। और यही हाल दूसरे हफ्ते का भी रहा। जिससे गदगद दूरदर्शन ने 90’s के दूसरे कई पॉपुलर शो का प्रसारण भी शुरू कर दिया।

देख भाई देख से लेकर शक्तिमान तक दिखाए जा रहे हैं

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रामायण और महाभारत के बाद दूरदर्शन चैनल ने देख भाई देख, ब्योमकेश बख्शी, शक्तिमान, मोगली कार्टून जैसे 90 के दशक के पुराने पॉपुलर शो का प्रसारण दोबारा शुरू कर दिया। जिसे लोग बड़े चाव से देख रहे हैं। लेकिन आज की खुशी में भविष्य की चिंता को नज़रअंदाज़ करना भी ठीक नहीं होता। और आज हम उसी ओर ध्यान खींचना चाहते हैं

कहीं पल भर की तो नहीं है ये खुशी

इस वक्त दूरदर्शन के वारे न्यारे हैं…पांचों उंगलियां मानो घी में है…आज से पहले जो कभी नहीं हुआ उसकी खुशी मनाना जायज़ भी है। लॉकडाऊन के बाद रामायण, महाभारत का प्रसारण दोबारा शुरू हुआ  तो दूरदर्शन ने टीआरपी रेटिंग के सभी रिकॉर्ड तोड़ डाले। लेकिन कहीं ये खुशी पल भर की तो नहीं है ? ये सवाल पूछना बेहद ही लाज़िमी है। क्योंकि हमने लॉकडाऊन से पहले वाले दूरदर्शन के हालात भी देखें हैं और उनसे बखूबी वाकिफ भी हैं। एक वक्त वो भी रहा है जब दूरदर्शन रिमोट के किस चैनल नंबर पर आता है ये भी हम लोग नहीं जानते थे और लॉकडाऊन खत्म होने के बाद वहीं दौर फिर से आ जाएगा इस बात में शायद कोई शक भी नहीं। क्योंकि पुराने शोज़ दिखाने के बाद दूरदर्शन के पास अपना नया कुछ भी नहीं है।

दूरदर्शन के पास नहीं है ताज़ा और एक्ट्रैक्टिव कंटेंट

सच तो ये है कि दूरदर्शन चैनल के पास इस वक्त ताज़े और एट्रैक्टिव कंटेंट की कमी है। जो सीरियल आते भी हैं उनके भी दर्शक ना के बराबर हैं। शहरों में तो अब लोग दूरदर्शन का नाम तक नहीं लेते हैं। जब लॉकडाऊन खत्म हो जाएगा, एक बार फिर लोग अपने अपने काम धंधों पर निकल जाएंगे। और दूरदर्शन पर ये पुराने सीरियल्स खत्म हो जाएंगे तब दूरदर्शन क्या करेगा…? कैसे दर्शकों को दूरदर्शन पर ही टिके रहने के लिए रोक पाएगा। क्या है कोई प्लान…? शायद नहीं। क्योंकि दूरदर्शन तो आज का जश्न मना रहा है। भविष्य की चिंता से कोई सरोकार नहीं। इसीलिए तो दूरदर्शन के लिए ये पंक्तियां पूरी तरह सटीक बैठती हैं कि चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात है…

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