जब अमिताभ ने लता मंगेशकर के सम्मान में एक कविता गायी!!

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When Amitabh sang a poem in honor of Lata Mangeshkar !!

अगले 48 घंटों या उससे कम समय में, लता मंगेशकर जिन्हें हर तरह की प्रशंसा से नवाजा गया है, जिन्होंने देश में सभी प्रमुख पुरस्कार प्राप्त किए हैं, भारत रत्न और अन्य पुरस्कारों की तरह, उन्होंने विदेशों में जितने भी पुरस्कार जीते हैं, उनके अलावा, लेखक, कवि, इतिहासकार, संत और दार्शनिक और यहां तक कि आम आदमी भी भारत के महानतम गायक की प्रशंसा करने के लिए हर संभव प्रयास करते है।

यह भारत की नाइटिंगेल को दी जाने वाली सबसे अद्भुत श्रद्धांजलि है, और यह सहस्त्राब्दी, अमिताभ बच्चन जैसे सितारे की ओर से है, जो उनके सबसे बड़े प्रशंसक हैं।

अमिताभ को अपने संगीत के एक बड़े उत्सव में लताजी का परिचय देने के लिए कहा गया और वे इस अवसर के लिए उचित रूप से तैयार होकर आए थे, सभी मेहमान लगभग एक संत की तरह दिख रहे हैं। वहां उपस्तित हर चेहरा अमिताभ को लताजी के बारे में बोलते हुए सुनने के लिए काफी उत्सुक था।

अमिताभ ने अपनी बात शुरू करते हुए एक सवाल पूछा, जिसमें उन्होंने पूछा, “मैं उन महान व्यक्तित्व का परिचय कैसे दे सकता हूं, जो अपने आप में एक परिचय है? यह मेरे दिमाग और मेरे शब्दों से परे है, लेकिन मैं अपना छोटा प्रयास करने की कोशिश करूंगा।” उन्होंने कहा कि लताजी न केवल देश की आवाज थी, बल्कि दुनिया की आवाज और सहस्राब्दी का वास्तविक सितारा है। उन्होंने कहा कि लताजी का वर्णन करना बहुत मुश्किल है, जिनके नाम के साथ सभी लोग ‘सुर, ताल और संगीत’ के बारे में बात करना शुरू करते है और खत्म करते हैं।

When Amitabh sang a poem in honor of Lata Mangeshkar !!

उन्होंने कहा, उन्होंने असीमित पुरस्कार और यहां तक कि दुनिया के विभिन्न विश्वविद्यालयों से डॉक्टरेट के सम्मान भी जीते है, लेकिन वे अभी भी उनकी महानता का वर्णन करने के लिए पर्याप्त नहीं थी, उन्होंने कहा कि जब वह पाकिस्तान से अपने दोस्तों से मिले तब भी, उन्होंने उन्हें बताया कि उनके पास वे देश हैं, जहा सब कुछ है, लेकिन केवल दो चीजें नहीं हैं, एक ताजमहल और दूसरी लता मंगेशकर।

वह एक काव्यात्मक मूड में थे जब उन्होंने कहा कि लताजी का भगवान के साथ गहरा संबंध है, जिसे उन्होंने कहा था, और मनुष्य की ‘आत्मा’ का ‘परमात्मा’ से मिलन एक काल्पनिक संबंध।
उन्होंने सितार के सिंबल का इस्तेमाल किया, जिसमें उन्होंने कहा कि 12 प्रमुख डोर थी, और उन डोरों के नीचे छोटी डोरे थी जिन्हें उन्होंने ‘सहानुभूति के डोर’ कहा था जो सितार द्वारा छोटी उंगली से छुआ गया था, वह एक मैजिकल टच के साथ था, जो उन्होंने कहा वह गायक की आवाज और अन्य उपकरणों में भी पॉवर और प्यूरिटी से प्रेरित थे।
अमिताभ ने कहा कि उनका यह भी मानना है कि मनुष्य और परमात्मा के बीच में एक डोर थी, और यह डोर लता मंगेशकर हैं!

उम्मीद थी, कि भीड़ तालियों की गडगडाहट से शोर मचा देगी, लेकिन पूरी भीड़ में एक ऐसा सन्नाटा था, मानो वे सब लताजी की आवाज के बारे में अमिताभ के वर्णन में ही खो गए हों।
अमिताभ को लताजी को एक पुरस्कार देने के लिए आमंत्रित किया गया था, जो उनके भाई हृदयनाथ के नाम पर था। दरअसल, डॉ.ए.पी.जे.कलाम, सचिन तेंदुलकर और अमिताभ यह तीन नाम उनके सामने रखे गए थे, और उनसे पूछा गया था, कि वह इस पुरस्कार को किसके द्वारा स्वीकार करना चाहती हैं? और उन्होंने कहा, “अगर इनमे अमिताभ का नाम है, तो आप मुझे दूसरे नाम क्यों दिखा रहे हैं?” मुझे समारोह में अमिताभ को आमंत्रित करने का सौभाग्य मिला। वह आए, हमेशा की तरह समय से पहले और फिर 45 मिनट तक बोले, केवल लताजी के बारे में जबकि दर्शक पूरे समय मौन बैठे रहे जब तक लताजी के बोलने का समय नहीं आया था, उनकी आंखों में आंसू थे, और उन्होंने कहा, “मैं क्या बोलू, इस महान भाषण के बादशाह के सामने?”

When Amitabh sang a poem in honor of Lata Mangeshkar !!
कुछ 30 साल पहले, यह दिलीप कुमार थे, जो अपनी ‘छोटी बहन’ की प्रशंसा में गाई थी, (इस तरह से उन्होंने लता को हमेशा संबोधित किया)

शास्त्रीय संगीत के कलाकार ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान’ परेल में एक घर की ओर से गुजर रहे थे, जब उन्होंने लताजी की आवाज सुनी और उन्होंने अपने ड्राइवर से कार रोकने के लिए कहा और अपने हाथ जोड़े और कहा, “गाडी रोको, इबादत हो रही हैं” लताजी की आवाज बंद होने के बाद ही कार आगे बढ़ी।

क्या हमारे पास कभी एक और लताजी होगी जिसका वर्णन हम मानव करते है, हालाँकि शब्द कभी भी उनके साथ न्याय करने में सफल नहीं होंगे?
अनु-छवि शर्मा


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