जब दिन भर रोती रहती थी विद्या बालन

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विद्या बालन के संघर्ष के दिनों की कथा उन्ही की जुबानी

हर इंसान को अपने कैरियर को बनाने के लिए संघर्ष तो करना ही पड़ता है, फिर वह चाहे जो क्षेत्र हो. पर मुझे कुछ ज्यादा ही संघर्ष करना पड़ गया. मेरा संघर्ष मनोवैज्ञानिक ज्यादा हो गया था. मैंने अपने अनुभवों से बहुत कुछ सीखा है.मैं अपने संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भुला सकती. मुंबई में पली बढ़ी हूँ. मैंने एकता कपूर के सीरियल ‘हम पांच’ के अलावा कई विज्ञापन फिल्में की. पढ़ाई जारी रही. 21 साल की उम्र में मैंने समाज षास्त्र विषय के साथ एमए किया. फिर सबसे पहले मोहनलाल के साथ एक मलयालम फिल्म मिली थी. इस फिल्म की शूटिंग षुरू होते ही मुझे दक्षिण भारत की 16 फिल्में मिल गयी. लेकिन मोहनलाल और निर्देषक के बीच अनबन हो जाने के बाद वह मलयालम फिल्म बंद हो गयी. जिसके चलते मुझ पर अपषकुनी का आरोप लगा. वास्तव में उस निर्देषक के साथ मोहनलाल पहले भी कई सफल फिल्म कर चुके थे. लोग मानते थे कि उनके बीच अच्छी ट्यूनिंग है. इसलिए फिल्म के बंद होने का आरोप मुझ पर लगा. अपशकुनी कह कर मुझे सभी 16 फिल्मों से बाहर कर दिया गया. नए सिरे से मेरा संघर्षत शुरू हो गया. पर इस बार मेरा संघर्ष ज्यादा तकलीफ दे रहा था.

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मुझ पर अपने उपर लगे‘ अपशकुनी’के लेबल को हटाने का दबाव था, तो दूसरी तरफ मैं जिस विज्ञापन फिल्म या फिल्म या सीरियल के लिए प्रयास कर रही थी, हर जगह सिर्फ रिजेक्षन ही मिल रहा था. मैं हर दिन अपने घर के नजदीकी साई मंदिर की सीढि़यों पर बैठकर घंटों रोती रहती थी. उस वक्त मेरी मम्मी के साथ साथ मेरे दिमाग में एक ही बात घूम रही थी कि किसी तरह से मुझे एक फिल्म मिल जाए और वह फिल्म रिलीज हो जाए, जिससे मेरे उपर लगा ‘अपशकुनी’ का लेबल हट जाए. उन दिनों मैं इस कदर परेशान थी कि एक दिन एक विज्ञापन फिल्म के लिए रिजेक्ट किए जाने के बाद मैं सोचते हुए मुंबई में नरीमन प्वाइंट से पैदल चलते चलते चेम्बूर के अपने घर पहुंच गयी थी. पर जब निर्देशक प्रदीप सरकार ने मुझे फिल्म ‘‘परिणीता’’ में काम करने का मौका दिया, तो मेरी किस्मत बदल गयी. इस फिल्म के पूरे होने और इसके पप्रदर्शन से पहले मैं सिर्फ इश्वर से यही मनाती रही थी कि यह फिल्म रिलीज हो जाए. इसकी सफलता या असफलता के बारे में मैंने कुछ नही सोचा था. मगर इस फिल्म ने मुझे एक अभिनेत्री के तौर पर रातों रात जबरदस्त शोहरत दिलायी. उसके बाद मैंने तमाम बेहतरीन फिल्में की. मुझे पुरस्कार भी मिले.


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Mayapuri

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