जब पंचम (आर.डी.बर्मन) का सूरज डूब रहा था!

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यह एक वो समय था, जब पंचम ने सफलता के आसमान को छुआ था, उस समय उन्हें रचनाकारों के बीच एक प्रतिस्पर्धा (काम्पटिशन) और प्रतिद्वंद्विता (राइवल्री) के कारण कठिन समय का सामना करना पड़ रहा था! वह पहले हर दिन दो गाने रिकॉर्ड करते थे और बाद में उन्हें महीनों तक बिना किसी काम के रहना पड़ा था! उन्होंने शराब पी कर अपनी फ्रस्ट्रेशन को काम करने कि कौशिश की थी, जिसका उनके स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने बाद में खुद को अपने कमरे तक सीमित कर लिया था!

यह वही समय था कि न्यूयॉर्क के एक एनआरआई रमेश खोसला भारत में एक हिंदी फिल्म बनाने के अपने सपने को पूरा करने के लिए आए थे, जिसे वह बहुत समय पहले बनाना चाहते थे! वह उसमे अपने बेटों रघु खोसला को अभिनेता के रूप में और रॉबिन खोसला को निर्देशक के रूप में लॉन्च करना चाहते थे!

संगीत निर्देशक के रूप में पंचम के साथ फिल्म बनाना उनका जवानी से एक सपना था! उनका अपने सपने को पूरा करना बहुत आसान था क्योंकि तब पंचम एक प्रमुख संगीतकार के रूप में अपनी स्थिति को फिर से हासिल करने के मौके का इंतजार कर रहे थे। खोसला ने अपनी फिल्म की शुरुआत पंचम द्वारा रचित सभी गीतों के साथ की। लेकिन उनकी फिल्म पर पंचम के गानों का कोई असर नहीं पड़ा था!

लेकिन फिल्म का संगीत विधु विनोद चोपड़ा ने सुना, जो पंचम के एक बहुत बड़े प्रशंसक थे। और परिणामों की चिंता किए बिना, विधु ने पंचम को अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ के संगीत का पूरा चार्ज लेने के लिए कहा!

पंचम ने इस फिल्म के संगीत पर पागलो की तरह काम किया, जिसने अपनी क्षमता को दिखाने का अवसर पाया था और उन्होंने यह साबित किया कि पंचम को ऐसे ही नहीं भुला जा सकता। इस फिल्म के संगीत ने फिल्म के रिलीज होने से पहले ही हर तरह सनसनी मचा दी थी!

विधु पंचम की वापसी का जश्न बड़े पैमाने पर मनाना चाहते थे और फिल्म सिटी में एक भव्य पार्टी का आयोजन किया गया था। पंचम को जिस तरह की प्रशंसा मिली और सभी ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उन्होंने विधु की फिल्म में अपने संगीत की सफलता के साथ एक नया जीवन शुरू किया था। वह पीलिया का शिकार हो गए थे और उन्हें ड्रिक्स लेना सक्त माना था! लेकिन संगीतकार के रूप में फिर से कामयाबी मिलने की खुशी और उम्मीद ने उन्हें स्कॉच के कुछ पेग्स से दूर नहीं रहने दिया था और वह सुबह 3 बजे घर चले गए थे और सफलता की एक नई लहर के साथ उठने की उम्मीद में सो गए थे।

लेकिन, अफसोस, वह उनकी आखिरी पार्टी थी और उनके जीवन की आखिरी रात भी थी। और सुबह उठाने से पहले ही उनका निधन हो गया था। और पंचम के पिता, एस.डी.बर्मन के मृत शरीर को सबसे पहले देखने वाले देव आनंद ने पंचम के शारीर को भी सबसे पहले देखा था। (संयोग से, देव साहब ने सबसे पहले अपने मित्र गुरु दत्त के मृत शारीर को भी सबसे पहले देखा था)

पंचम तो चले गए, लेकिन उनका हर सुर और ताल आज भी जिंदा हैं और कयामत तक जिंदा रहेगा!

अनु-छवि शर्मा 

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Mayapuri