हैप्पी बर्थडे: आज कहाँ है, अभिजीत

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अभिजीत

यह लेख दिनांक 16.10.1994 मायापुरी के पुराने अंक 1047 से लिया गया है!

गायक अभिजोत से मेरी मुलाकात एक गाने को रिकॉर्डिंग के दौरान हुईं, यहाँ पेश है उनसे किए, गए सवाल जवाब्र

आपको पहला ब्रेक कौन से संगीतकार ने दिया?

मेरा मन कहता था, कि मुझे आर.डी.बर्मन के यहाँ जरूर मौका मिलेगा, उन्हें अपना कैसेट सुनाना चाहता था, कैसेट सुनने के ठीक दस दिन के भीतर उन्होंने मुझे फिल्म ‘आनन्द और आनन्द’ में ब्रेक दिया

फिल्म ‘आनन्द और आनंद’फ्लॉप रही, उसके बाद आप गुमनामी खो गए, गुमनामी से निकलने के लिए आपको दूसरा ब्रेक दिया?

फिल्म ‘आनन्द और आनन्द’ रिलीज हुई और फ्लॉप हो गई, और मुझे कोई फायदा नहीं हुआ, सन् 84 से 90 तक मैने बहुत संघर्ष किया, मुझे एक बार ब्रेक मिल चुका था, मैं बतौर प्ले और बैक सिंगर गा चुका था, इसलिए ललक जग चुकी थी और मैं हारने के लिए तैयार नहीं था। सन् 1990 में संगीतकार आनंद मिलिन्द मेरे लिए भगवान बनकर आए, उन्होंने मुझसे फिल्म ‘बागी’ में तीन गाने गवाए। ’चांदनो रात’, ‘हर कसम से बड़ा’ और ‘चंचल शोख हसीना’ आदि।

आज कहाँ है, अभिजीत

इन गानों के बाद क्या आप अपनी पहचान बना पाए?

जी हाँ, उसके बाद में पलट के नहीं देखा, एक के बाद एक मेरी फिल्म हिट होती रही जैसे फिल्म ‘सड़क’(जमाने के देख है रंग हजार) ‘जिगर’, ‘माशूक’, ‘तहलका’, बोल राधा बोल, ‘आज का गुण्डा राज’, शोला और शबनम, राजा बाबू, ‘डर’ का वगैरह एक अजीब सा संयोग यह भी है, कि मैंने गोविन्दा के लिए जितने गाने गाए सबके सब ‘हिट’ हुए।

इस सफलता ने आपको नया आत्मविश्वास दिया होगा?

जी हां मैंने अभी तक सौ प्रतिशत गायक साबित कर दिखाया, मैंने अभी तक 40 गाने गाए हैं और उसमें से 90ः से ज्यादा हिट रहे!

स्टेज शो में, और फिल्मों में गाने में, आप क्या फर्क महसूस करते है?

स्टेज में काफी पैसा है, नाम है। बड़ी बात नहीं शोज में लोग रिपीट सिंगर जल्दी पसंद नहीं पांच बार भी अगर एक ही शहर में शो करता हूं, तो पांचों बार मुझे लोगों का वही प्यार, उनको तालियां को वही गड़गड़ाहट मिलती-है, हर बार मेरा वही ‘क्रेज’ होता है, फिल्म ‘बागी’ से पहले मैं बहुत स्टेज शो किया करता था, पर फिल्मों की बड़ी ललक थी, फिल्मों से ही स्टेज पर भी मेरी ‘प्राइस’बड़ी है। आज मैं फिल्म के लिए स्टेज शो कई बार छोड़ देता हूँ! क्योंकि फिल्मों से नाम ज्यादा मिलता है!

‘गाने के लिए क्या आप घर पर भी रिहर्सल करते है?

नहीं, ज्यादातर रिकाॅर्डिंग के वक्त ही मैं रिहर्सल करता हूं, आजकल तो रिकॉर्डिंग का तकनीक इतनी आसान हो गई है कि ट्रैक पहले से तैयार रहता है! हम लोग स्टूडियो में आते है, रिहर्सल करते है और एक घंटे में गाना गाकर चले जाते है।

लेकिन ऐसे में गाना बेजान सा नहीं हो जाता?

खासकर युगल गीत, जिसमें गायक अपना हिस्सा गाकर पहले चला जाता है और गायिका अपना हिस्सा बाद में अकेली गाती है, या फिर इसका विपरीत इससे गाने में भाव तो कम हो ही जाते होंगे, बिल्कुल सही बात है, डुएट साॅन्ग में तो खासतौर पर यह दिक्कत पेश आती है, पर क्या करें!

आज सिंथेसाजर का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है, गाने को बेजान करने में क्या इसका भी हाथ नहीं हैं, आपका कहना सही है, सिंथेसाइजर का कमर्शियली इस्तेमाल करने से कभी अच्छा, रिजल्ट नहीं मिलता, जो मजा साज छेड़ते ढ़ेरों सार्जिदों के साथ रिकाॅर्डिंग करने सिंथेसाइजर में कहां?

हर सिंगर का अपना एक अलग मूड होता है ? मतलब किस मूड का गाना गाना आप ज्यादा पसंद करते है?

मैं तो अलग-अलग मूड में रहता कभी रोमांटिक गानों के मूड में, कभी एक्शन गानों के मूड में तो कभी हंसते-हंसाते गानों के मूड में, मेरी कोई बंधी हुई इमेज है भी नहीं, मैं सब तरह के गाने गा सकता हूँ, वैरायटी मुझे पसंद है ।

आज रिकाॅर्ड कम्पनियों को स्थिति काफी मजबूत है, ऐसे में क्या उभरते हुए होनहार कलाकारों को नुकसान पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है क्या?

यह सही है, कि आज म्युजिक डायरेक्टर से ज्यादा वह अधिकार रिकाॅर्ड कम्पनियों के हाथ में है, इसलिए किसी नए कलाकार के भविष्य को संवारने या बिगाड़ने में भी इनकी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता पर ऐसा नहीं करना चाहिए किसी भी प्रतिभा को दबाना सरस्वती का अपमान करना है, अनुराधा पौड़वाल को टी सीरीज का साथ मिला तो उन्होंने न सिर्फ गायिकाओं को ही नहीं गायकों को भी दबाया, उनके साथ राजनीति खेली, उन्होंने टीवी को खरीदा, रेड़ियो को खरीद लिया । माता के गाने में माता के बजाए नकली माता अनुराधा पौडवाल को दिखाया जाता है

आज के गायकों की प्रतिभा के बारे में आप क्या कहेंगे?

आज के दौर के सभी गायक सुरीले है शानू, सुरेश, उदित वगैरह, गायिकाएं बहुत अच्छी है बीच का दौर ऐसे गायकों का था जो सुर में नहीं थे, पर चल रहे थे। आज ऐसा़….

और आज के संगीतकार ?

अच्छे है, मेरे संबंध तो सबके साथ- अच्छे है, एक अच्छा गाना मुझे गाने को मिलता है तो मैं संगीतकार का एहसान मानता हूँ जब निर्माता निर्देशक संगीतकार पर दबाव डालते है तब गड़बड़ हो जाती है, कौन सा गाना किस गायक से गवाना है, यह संगीतकार से बेहतर कौन जान सकता है ।


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Mayapuri

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