क्यों नही हुआ फिल्म पी के का कलेक्शन एक हजार करोड़ रुपये–एक सच्चा आकलन

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फिल्म की कामयाबी का पैमाना फिल्म के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के आधार पर तय किया जाता है। मगर यह भी तो संभव है कि शोले या मुगल-ए-आजम को ज्यादा लोगों ने देखा हो, लेकिन उस समय टिकट दर बहुत कम थी, इसलिए दो दौर की फिल्मों की तुलना कलेक्शन के आधार पर करना गलत है।

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पीके ने भारत से लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का कलैक्शन किया और इसे लगभग साढ़े तीन करोड़ लोगों ने देखा। यानी प्रति टिकट सौ रुपये का औसत आता है। भारत की जनसंख्या को लगभग सवा सौ करोड़ माने ने तो सिर्फ 2.8 प्रतिशत लोगों ने फिल्म देखी और इसे सबसे हिट फिल्म बना दिया। स्पष्ट है कि सिनेमाघर में फिल्म देखने का चलन कितना कम है। यदि दस प्रतिशत लोग फिल्म देखने सिनेमाघर जाएं तो कलेक्शन का आंकड़ा एक हजार करोड़ रुपये तक जा सकता है, जिसकी कल्पना भी बॉलीवुड नही करता है। इसके अलावा आजकल शुक्रवार की सुबह रिलीज हुई फिल्म शाम को लोग अपने मोबाइल पर देख लेते हैं। पीके को यदि टिकट खरीद कर साढ़े तीन करोड़ लोगों ने देखा है तो गलत तरीके से चार गुना लोगों ने इसे देखा होगा। यदि पायरेसी पर रोक लग सकती तो पीके का कलेक्शन हजार करोड़ रुपये के पार हो चुका होता।आज तक यह समझ नही आया की बॉलीवुड के एक सुपरस्टार को देखने के लिए शहर उमड़ पड़ता है, लेकिन उसकी फिल्म के टिकट खरीदने वाले पांच प्रतिशत भी नहीं होते हैं। क्या हमको नही लगता की इस बारे में सोचा जाना चाहिए।


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Mayapuri

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