मूवी रिव्यू: तलाक का गैरजरूरी मुद्दा ‘यारम’

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रेटिंग**

पिछले दिनों तीन तलाक का मुद्धा काफी दिनों तक गरमाया रहा। बाद में एक लंबी लड़ाई लड़ने के बाद इसके खिलाफ एक बिल पास हुआ जिसमें तीन तलाक को गैर कानूनी घोषित किया गया। अब इसी विषय पर निर्देशक आवैस खान ने फिल्म‘ यारम’ में दिखाने की कोशिश की है।

कहानी

रोहित बजाज (प्रतीक बब्बर) अरेंज मैरिज के लिये मीरा(शुभा राजपूत) से मिलता है लेकिन दूसरे ही पल वो मॉरिशस में दिखाई देता है। फ्लैश बैक में बताया जाता है कि रोहित के जिगरी दोस्त साहिल (सिद्धांत कपूर) और उसकी पत्नि जोया (इशिता राज) से मिलता है लेकिन दूसरी मुलाकात रोहित को पता चलता है कि साहिल और जोया का तलाक हो चुका है और अब साहिल अपनी गलती मानते हुये दौबारा जोया से निकाह करना चाहता है इसके लिये वो हलाला के तहत रोहित का जोया से निकाह करने और फिर उसे तलाक देने के लिये मनाता है। रोहित के जोया से निकाह करने के बाद क्या होता है, क्या रोहित जोया को तलाक देता है? इन सारे सवालों के जवाब फिल्म देखते हुये मिलेगें।

अवलोकन

हालांकि ऐसे गंभीर मुद्दे पर हास्य फिल्म बनाना अपने आप में ही हास्यप्रद है। दूसरे फिल्म देखते हुये कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि फिल्म में निर्देशक ने जरा भी मन लगाया हो, क्योंकि कथा, पटकथा संवाद तथा किरदार किसी पर भी काम नहीं किया गया लगता। जबरदस्ती खींचे हुये सीन और उनमें उसी तरह जबरदस्ती के गाने फिल्म को और ज्यादा उबाऊ बनाते हैं। तीन तलाक पर भाषण बाजी तथा शक्ति कपूर का आगमन कुछ खास नहीं कर पाता।

अभिनय

जैसी फिल्म वैसा ही अभिनय। जहां प्रतीक बब्बर लाउड है, वहीं सिद्धांत कपूर एक हद तक कुछ दृश्यों में ठीक काम कर गये। इशिता राज जितनी खूबसूरत लगी है, उतना ही उसने काम भी अच्छा किया है। दिलीप ताहिल मुस्कराने पर मजबूर करते हैं।

क्यों देखें

बेशक फिल्म को अनदेखा किया जा सकता है।

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