INTERVIEW: ‘‘ब्लांइड होते हुये भी दोनो पूरी तरह से आत्म निर्भर हैं’’ – यामी गौतम

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एडर्वटाइजिंग क्वीन यामी गौतम की पहली फिल्म ‘विकी डोनर’ हिट साबित हुई थी। उसके बाद बदलापुर, सनम रे तथा एक्शन जैक्शन आदि फिल्मों ने उसके लिये बॉलीवुड में जगह मजबूत करने की अच्छी कोशिश की। उसकी खूबसूरती और उसका अच्छा काम देखते हुये राकेश रौशन ने उसे फिल्म ‘काबिल’ में रितिक रौशन के अपोजिट साइन किया। फिल्म को लेकर क्या कहना है यामी का, बता रही हैं श्याम शर्मा को एक मुलाकात में।

नये साल की शुरूआत में आपकी बिग बजट, बिग स्टार के साथ बिग फिल्म रिलीज होने जा रही है। इसे लेकर कितनी टेंशन फील कर रही हैं?

इसे लेकर टेंशन तो कोई नहीं बल्कि बहुत खुशी है क्योंकि बड़ी फिल्म है, अच्छा रिस्पांस है फिल्म का बढ़िया प्रमोशन चल रहा है। उससे भी ज्यादा खास बात है कि प्रोफेशनल तौर पर ही नहीं बल्कि निजी तौर पर भी एक अनुभव होता है कि आपकी मूवी अच्छी जाती है या नहीं भी जाती, लेकिन इस फिल्म की बात की जाये तो इससे जुड़े इतने अच्छे, बड़े और अनुभवी लोग हैं कि यह सब उनके साथ काम में नजर आता है इसलिये उनके साथ रोजाना शूटिंग करने को मन करता है पैकअप की भी इच्छा नहीं होती। वह इसलिये नहीं कि सेट पर हंसी मजाक होता है या कुछ और। बस काम होता है जिसे करते हुये खूब आंनद आता है।

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आप फिल्म के लिये शुरू से ही राकेश रौशन की पसंद रही हैं ?

मैं लकी हूं कि उन्होंने फिल्म के लिये मुझे चुना। जंहा तक सेट पर जाने की बात है तो पहले दिन मैं वाकई नर्वस थी और यह बात मैनें राकेश जी को भी बताई थी क्योंकि फिल्म में रितिक रौशन हैं निर्देशक संजय गुप्ता हैं। इसके अलावा डांस रिहर्सल भी जारी है, वह भी रितिक जैसे डांसर के साथ और नये फार्म के साथ। इन सब के बाद भी चेहरे पर टेंशन नहीं दीखनी चाहिये, बल्कि नेचुरल एक्टिंग करनी है। यहां मुझे राकेश जी ने कहा कोई बात नहीं, आप रितिक से ऐसे ही बात करें, यहां वह आपके लिये वह बहुत हेल्पफुल साबित होने वाले हैं तथा सजंय सर  इतने स्ट्रॉग तकनीशियन हैं फिर भी वह बहुत ही नार्मल इंसान निकले।

रितिक के साथ शूटिंग का पहला दिन कैसा रहा?

सब हो जाने के बाद भी मेरी नर्वसनेस नहीं गई लिहाजा जब मेरा रितिक के साथ पहला शॉट होने वाला था तब मैं काफी नर्वस थी। मुझे रितिक ने मेरी मनोदशा देखी तो मुझे नार्मल करने के लिये कहने लगे यार यामी के साथ मैं भी काफी नर्वस हूं। यह सुन कर राकेश जी ने कहा डॉंट वरी सब ठीक हो जायेगा फिर वाकई सब ठीक हो गया। उसके बाद जो मेहनत मेरे द्धारा हुई वह सिर्फ ‘काबिल’ तक ही सीमित नहीं थी बल्कि आगे भी मेरे काम आने वाली है।

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क्या आपको ऑडिशन देना पड़ा?

इसे आप क्या कहेगें मुझे नहीं पता। मुझे राकेष जी ने कुछ लाइनें देते हुये कहा आप यह लाइनें बोल कर दिखाईये मुझे सिर्फ देखना है कि आप कैसे बोलती हैं। जब मैने परफार्म किया तो उन्होंने कहा गुड। इसके बाद जब वही लाइनें मैने रितिक के साथ शूट पर बोली तो उन्होनें कहा कि मुझे याद है कि उस दिन लाइनें बोलते हुये जब आपने किसी शब्द के साथ अपनी एक आंख से जो एक्ट किया था, वही शॉट भी में किया, जबकि मैं शूट के दौरान बोलना चाहता था कि क्या आप दौबारा वैसा ही कर सकती हो लेकिन आपने वैसा ही किया। इसे आप मेरे लिये एक कांप्लीमेंट कह सकते हैं।

क्या वर्क शॉप भी किया गया था?

विधिवत वर्कशॉप तो नहीं कह सकते लेकिन मैं रितिक, राकेश जी संजय जी साथ बैठते थे और लाइनों पर डिस्कस करते थे। दरअसल फिल्म में हम दोनों ब्लाइंड यानि अंधे हैं फिर भी हम नाचते हैं शॉपिंग करते हैं काम करते हैं। मेरे कोच हैं विदुर चतुर्वेदी, उन्होंने भी मुझे कहा था कि मैं आपको लाइने बोलना नहीं सिखा सकता और न ही मैं आपको बहुत ज्यादा बॉडी लैंग्वेज सिखाउंगा क्योंकि यह सब आपको आपका डायरेक्टर बतायेगा। मैं सिर्फ आपको एक्सप्लोर कर सकता हूं कि आगे क्या किया जाये। उसके बाद मैने काफी मूवीज देखीं, यूट्यूब पर ढेर सारी ब्लाइंड लागों की फिल्में देखी कि वह कैसे खाना बनाते हैं, चलते कैसे हैं, स्टिक कैसे पकड़ते हैं, टाइम कैसे देखते हैं। मैं यहां अपना क्या नया कर सकती हूं, इसके लिये मैने डांस के तहत टैंगो सीखा तथा जो कोरियोग्राफर अहमद सर ने रिहर्सल  किया उसमें मैं अलग से ब्लांइड फेक्ट डालती थी। बाद में यह सब मैं घर जाकर दौहराती थी।

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ब्लाइंड लगने के लिये अलग क्या कुछ किया?

एक तो यह ऐसी लव स्टोरी है जिसमें दोनों ही ब्लाइंड हैं तो इसमें ऐसी कोशिश की गई है कि ऐसा नहीं लगना चाहिये कि चलो पिक्चर है तो बस कर दिया। अब पिक्चर तो है ही, नबंर वन कि उसमें लॉजिक कैसा हो सकता है, नंबर टू ऐसा भी हो सकता है कि हम ऐसे लगे कि किसी को पता ही न चले कि हम ब्लाइंड हैं क्योंकि ऐसे लोग हैं जो ब्लाइंड होते हुये भी ब्लाइंड नहीं लगते। एक धारणा है कि ऐसे लोगों में स्टिफनेस आ जाती है वह थोड़े स्टिक हो जाते हैं। इमोशनली भी दोनों किरदारों की एक स्पेश्लिटी यह है कि ब्लाइंड होने के बावजूद वह सिंपेथी फेक्टर नहीं है। वह डांस करते हैं, बाहर घूमने जाते है, काम करते हैं, ट्रैवल करते हैं यानि वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं।

अभी तक आप सिंपल लगने वाली भूमिकायें करती रही हैं, क्या आगे ऐसे रोल भी करना चाहेगीं जिसमें किसिंग या बिकनी सीन्स हों?

इसका जवाब बड़ा सिंपल है कि जो चीज किसी स्क्रिप्ट की डिमांड हो, उसे करने में मुझे कोई एतराज नहीं क्योंकि वैसे भी वो सारी चीजें रीयल लगेगीं, क्योंकि जो लोग ऐसे सींस शूट कर रहें होगें वो कितने रिस्पांसिबल होगें,  लेकिन अगर आपने सिर्फ दिखाने के लिये शूट करना है तो वहां मुझे काम नहीं करना।


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Mayapuri

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