मूवी रिव्यू: फिल्म साधारण लेकिन ब्रूना अब्दुला की सेक्स अपील असाधारण, यानि ‘ये तो टू मच हो गया’

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रेटिंग**

कामेडी फिल्मों के इस दौर में अली ऊनवाला तथा निर्देशक अनवर खान की कॉमेडी फिल्म ‘ये तो टू मच हो गया’ एक साधारण हास्य फिल्म साबित होती है। फिल्म में कहानी या कलाकारों से ज्यादा थाईलैंड और ब्रूना अब्दुला की सेक्सी खूबसूरती आकर्शित करती है ।

कहानी

जिम्मी शेरगिल यानि मोहन एक ऐसा बिंदास शख्स है जो गांव में सबके काम आता है। वो चौधरी मुरली शर्मा की सोतेली बहन पूजा चैपड़ा के साथ बचपन से प्यार करता हैं।  मुरली की नजर अपनी बहन की करोड़ों की दौलत पर है इसलिये वो उसकी शादी गांव से कहीं दूर करना चाहता हैं इसलिये वो दोनों को अलग करने की तिकडम लगाता रहता है। उसका एक और भाई मन -जिम्मी डबल रोल में- भी है जो काम की तलाश में थाईलैंड में रह रहा है। उसे वहीं रह रही ब्रूना अब्दुल्ला प्यार करती है। एक दिन उसकी एक बंदे से हाथा पाई हो जाती है जिम्मी उसे घायल कर अस्पताल तक पहुंचा देता है । वो बंदा वहां के डॉन अरबाज खान का छोटा भाई निकलता है जिसे अरबाज बहुत प्यार करता है।  इसलिये वो अपने भाई को मारने वाले मन को ढूढंना शुरू कर देता है। लेकिन बू्रना और मन का दोस्त उसे समझा बुझा कर इंडिया भेज देते हैं । इधर इंडिया में जब मोहन अपनी मां जरीना वहाब को मन के लिये तड़पते देखता है तो वो एक दिन उसे बिना बताये मन को ढूढंने के लिये थाइलैंड जा पहुंचता है। मन इंडिया आ कर मोहन के रूप में जब गांव पुहंचता हैं तो उसे पता चलता है कि चौधरी की प्रेमिका को मां बनाकर मोहन कहीं गायब हो गया है। बाद में उसे पता चलता है किये सब चौधरी की चाल है , तो वो बाद में चौधरी को गांव वालों के सामने एक्सपोज कर देता है। उधर मोहन को जब पता चलता हैं कि वहां के डॉन ने उसके भाई की प्रेमिका को किडनेप कर लिया है तो वो उसे उसके चुंगल से छुड़ाकर इंडिया ले आता है ।jhjk

निर्देशन

अनवर खान की इस फिल्म की गति ही नही बल्कि लगभग सभी कुछ धीमा है । कथा पटकथा तथा संवाद सभी कुछ साधारण है । फिल्म का आधा हिस्सा थाईलैंड की काफी लुभावनी लोकेषनों पर फिल्माया गया हैं बाकी आधा हिस्सा मुबंई में सैट बनाकर शूट किया है । कहानी में कोई नयापन न होने और गतिहीन होने की वजह से दर्शक न तो हास्य का मजा ले पाता है और न ही कलाकारों की कलाकारी का। फिल्म का संगीत भी ठीक ठाक रहा। बस एक गाना आशिक अवारा अच्छा लगता है।arbaz khan1

अभिनय

जिम्मी शेरगिल एक बेहतरीन कलाकार हैं लेकिन यंहा वे डबल रोल में भी कुछ प्रभाव नहीं छोड़ पाते। दरअसल न तो उनकी प्रतिभा का सही इस्तेमाल हो पाया और न ही वे इस दौहरी भूमिका में फिट दिखाई दिये। इसी तरह पूजा चोपड़ा भी कई दफा देखी जा चुकी भूमिका में बेअसर है। मुरली शर्मा के करने के लिये भी फिल्म में कुछ खास नहीं था। अरबाज खान फिल्म में डॉन कम बिजनेसमैन ज्यादा नजर आते हैं। विजय पाटकर दौहरी भूमिका में दर्षकों को हंसाने की भरकस कोशिश करते हैं।लेकिन इन सबसे अलसाये दर्शक को ब्रूना अब्दुल्ला अपनी खूबसूरती और सेक्स अपील से राहत देने में पूरी तरह कामयाब रही।

क्यों देखें

 कॉमेडी तथा  ब्रूना अब्दुला और थाईलैंड की खूबसूरती के लिये फिल्म देख सकते हैं ।


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Mayapuri

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