‘ हां मैं बहुत ज्यादा बोलती हूं’ – तापसी पन्नू’

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पंजाबी परिवार की खूबसूरत और बेहद चंचल लड़की तापसी पन्नू ने कभी सोचा तक नहीं था कि वो एक दिन साउथ इंडियन फिल्मों की नामचीन स्टार बनेगी । साउथ में नाम और यश कमाने के बाद अब उसने हिन्दी फिल्मों की तरफ कदम बढ़ाये हैं । इसी सप्ताह आप उसे अक्षय कुमार, राणा दग्गुबाती आदि स्टारों के साथ फिल्म ‘बेबी’ में  देखेंगे । इस फिल्म में तापसी किस तरह की भूमिका निभा रही है । उसने बताया इस मुलाकात में ।

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फिल्म में रोल  क्या है ?
अब तो इस सप्ताह फिल्म रिलीज होने जा रही है  अच्छा यही रहेगा कि आप फिल्म सिनेमा के बड़े पर्दे पर  जाकर देखें और फिर बतायें कि किसने कैसा काम किया है । फिर भी इतना अभी बता देती हूं कि मैं एक सरकारी खुफिया ऐजेंसी की सबसे यंग ऐजेंट हूं । और मैं जिस ऑपरेशन से जुड़ी हूं उसका नाम ‘बेबी’ है । मेरे समेत मेरे सभी साथियों को अलग अलग केस दिये हुये हैं।
इस फिल्म से आपका कैसे जुड़ना हुआ ?
मुझे यह फिल्म ऑफर नहीं हुई बल्कि मैं खुद इस फिल्म के पीछे भागी थी । इसके पीछे एक बड़ी दिलचस्प कहानी है । फिल्म के निर्देशक नीरज सर ने मेरी फिल्म ‘चश्मेबद्दूर’ देखी थी । और जब उन्हें पता चला कि मैं इस फिल्म में शामिल होना चाहती हूं तो उन्हें नहीं लगा था कि मेरे जैसी नाजुक सी फिल्मी हीरोइन जैसी खूबसूरत लड़की इस फिल्म के किसी रोल में फिट हो पायेगी ?  लेकिन फिल्म में काम करने के लिये मेरा स्ट्रगल चालू था । जिसके तहत मैं  फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर से मिली  और उन्हें अपना ऑडिशन दिया । ऑडिशन के बाद उन्होंने मुझे फौरन पास कर दिया । जब ये बात नीरज सर तक पहुंची तो उन्होंने मुझसे मिल लेना जरूरी समझा । मिलने पर  पहले मुझे दो मिनट तक खोजी जैसी निगाहों ऐसे देखा, फिर उन्होंने  मुझसे कुछ संवाद बोलने के लिये दिये । लेकिन दो तीन लाइन सुनने के बाद ही उन्होंने कह दिया ठीक है । लेकिन आगे क्या  होगा ये नहीं पता था लेकिन शाम को उनके आफिस से फोन आ गया कि तुम फिल्म में काम कर रही हो।

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भूमिका के लिये पहले से क्या तैयारियां की?
मेरे ख्याल में इतना हार्डवर्क न तो मैने पहले कभी किया है और न ही आगे कर पाऊँगी।   फिजिकली ही नहीं बल्कि मुझे रोजाना दो ढाई घंटे मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग लेनी पड़ती थी ।ये कोई नार्मल मार्शल आर्ट नहीं था । क्राफमागा में एक मार्शल आर्ट है जो इजराइल से आया है । जिसके तहत करीब दो सप्ताह तक मुझे इस आर्ट को सीखने के लिये कड़ी मेहनत करनी पड़ी ।
कहा जाता है कि आप इतना बोलती हैं कि आपको चुप कराने के लिये अक्षय को आना पड़ता था ?
ये कोई सीक्रेट नहीं है । हां मैं बहुत बोलती हूं जबकि सेट पर सब चुप रहते थे लेकिन मैं बेधड़क नीरज सर के पास पहुंच कर उनसे अपने डायलॉग् की डिमांड करने लगती थीं । तब वह कहते थे तुम्हारे डायलॉग हैं कि तुम्हें चुप रहना है । सेट पर ही अक्षय सर अक्सर मुझे कहा करते थे कि बच्चा तू जितना चुप रहेगी उतना ही तेरे लिये अच्छा रहेगा।

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सुना है आप हीरोइन नहीं कुछ और बनना चाहती थी ?
जी हां । मैं बचपन में पढ़ने में बहुत तेज हुआ करती थी या यूं कह लीजिये कि मुझे पढ़ने का बहुत शौक था। मैं इंजीनियरिंग या एम बीए करने के बाद कोई बढ़िया सा जॉब करना चाहती थी । लेकिन एक बात उस वक्त भी थी और आज भी है वो ये कि मैं न तो उस वक्त  टिक कर एक जगह बैठना पंसद करती थी और न ही आज । मैं लगातार कई घंटे एक जगह बैठकर पढ़ाई  करने वालों में से नहीं थी । कॉलेज में भी मैं बहुत कम क्लास अटेन्ड करती थी । फिर भी मेरे नबंर अच्छे आते थे। उन्हीं दिनों मुझे मॉडलिंग का ऑफर मिला तो मैने अनुभव के तौर पर उसे करने का मन बना लिया । और जब मुझे उसके बदले ढेर सारे पैसे मिले तो आगे भी मैने एड करने का मन बना लिया । क्योंकि एड से हर बार मिले दस पंदरह हजार से मेरी बढ़िया शापिंग हो जाती थी । और मेरा बढ़िया खर्च भी निकल जाता था । इसके बाद मैं साउथ इडिंयन फिल्मों की नायिका बन गई । कैसे बन गई। ये आज तक मेरी समझ से बाहर है ।
तापसी पन्नू आपका ऑरीजनल नाम है ?
जी हां । मैं सिख परिवार से हूँ और मेरा नाम मेरे पैरेंटस ने ही रखा था । लेकिन जब मैं साउथ इंडियन फिल्मों में काम करने लगी तो मुझे साउथ इंडियन ही समझा जाने लगा । शायद उस दौरान हिन्दी फिल्म मेकर भी मुझे साउथ इंडियन समझते थे । फिल्म‘चश्मे बद्दूर ’के बाद लोगों को पता चला कि मैं नार्थ इंडियन हूं।

साउथ में अभी तक कितनी फिल्में  कर चुकी हैं ?

वहां मेरी पंद्रह बीस फिल्में हो चुकी हैं । जिनमें से अधिकांश सुपर हिट रही । इसलिये मुझे वहां एक स्टार का दर्जा हासिल है । कल बेशक मैं हिन्दी फिल्मों में भी व्यस्त हो जाऊं लेकिन तब भी साउथ की फिल्में करती रहूंगी।


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Mayapuri

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