गलतफहमियों की शिकार योगिता बाली

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मायापुरी अंक 2.1974

‘आए दिन एक न एक नई बात योगिता बाली के बारे में सुनने को मिलती रहती है। गोरे-गोरे चिट्टे रंग, मोटी-मोटी शराबी आंखो वाली योगिता बाली के बारे में हर रोज कोई न कोई हंगामा होता ही रहता है। इन हंगामों से कभी- कभी कलाकार की इमेज को बड़ा धक्का पहुंचता है बहुत से कलाकार ऐसे भी है जो स्वयं चाहते है कि उनके बारे में अफवाहें फैलें, हंगामे हों ताकि उनका नाम न्यूज में रहे। मगर योगिता बाली ने तो कभी ऐसा नही चाहा, तो फिर यकायक उनका नाम किरण से कैसे जुड़ गया? जाहिर है किरण के साथ योगिता बाली की कई फिल्में सैट पर है, इन फिल्मों में किरण और योगिता के रोमांटिक दृश्य है। इन सैट के रोमांटिक दृश्यों को वास्तविकता समझ लिया गया और फिर बस न गया कि एक बतंगड़ मानों काम से ज्यादा विवाह ही सर्वोपरि हो गया।

योगिता बाली से जब मेरी मुलाकात हुई तो वह बेहद थकी हुई थी। सुबह से शाम तक स्टूडियो की भीषण गर्मी में काम करते-करते उनका बुरा हाल था। मेकअप रूम मैं बैठी हुई योगिता ने अखबार के कागज को मोड़ कर पंखा बनाया हुआ था। एक हाथ से वह अखबार नुमा पंखे से हवा का आनंद ले रही थी और दूसरे हाथ से बार-बार पसीने में भीग गए मेकअप को संवारने की असफल कोशिश।

कमाल है योगिता जी आपका भी जो इतनी मेहनत कर रही है। इतनी बला की गर्मी में इतना कठोर परिश्रम आखिर किस लिए?

अपने लिए, अपने भविष्य के लिए। हमारे यहां एक कहावत है ना कि सोना आग में अपने तपने के बाद ही कुंदन बनता है, यह उतनी भीषण आग तो नही है ना, क्यों? योगिता ने मुस्कुराते हुए कहा।

वैसे अगर ये स्टूडियो एयर कंडीशंड हो जायें तो आप लोगों को काम में बड़ी आसानी रहे। इस बारें में आपका क्या ख्याल है, योगिता जी।

मैं तो समझती हूं कि इतना आराम मतलब नही होना चाहिए इंसान को। मान लीजिए ये एयर कंडीशंड नाम की चीज नही होती तो भी काम करते या नही। फिर एक किसान है जो सुबह से शाम तक खेतों में अपना पसीना बहाता रहता है। क्या उसके शरीर में और हमारे शरीर में कोई अन्तर है ?

सुलझे हुए विचारों की योगिता बाली दर्शनिक होती जा रही थी। मैंने विषय को दूसरी तरफ ले जाते हुए कहा योगिता जी, मुझे कुछ ऐसा लग रहा है कि आप पहले से कुछ कमजोर हो गई है क्यों ? मेरी बात पूरी होने से पूर्व ही योगिता चिंहुक उठी, पहले मोटी थी तो आप लिखते थे योगिता मोटी है। अब कमजोर नजर आ रही हूं तो लिखेंगे योगिता कमजोर है। भई बाज आए हम तो इन पत्रकारों से खैर आपसे ही बताए देती हूं, किसी से कहिएगा नही। योगिता ने बड़े अजीब अन्दाज से घूरते हुए कहा।

भाई वाह, आप कोई राज की बात बताएं और हम किसी से कहें, ऐसा हो सकता है भला, मैंने योगिता बाली को आश्वासित करते हुए कहा।

तो राज की बात यह है वशिष्ठजी कि मैं आजकल डाइटिंग कर रही हूं

डाइटिंग? मैंने चौंकते हुए कहा।

हा जरा स्लिम होने के लिए क्योंकि कुछ लोग कहने लगे थे कि मैं मोटी होती जा रही हूं अब यदि आप मुझे कमजोर लिखना शुरू कर देंगे तो फिर वही अपना खाने का कार्यक्रम चालू।

आप अपने बारे में, अपनी कला के बारे में इतनी सीरियस है, यह तो एक अच्छी बात है। वैसे बुरा न मानें तो एक बात पूंछू। मैंने योगिता की तरफ देखा।

आप इतना डरते क्यों है, पूछिए। जबान पर आई बात कह डालते है।

सुना है किरण आजकल रेखा के चक्कर मैं है। आपसे उसका कोई झगड़ा हुआ क्या ?

“किरण मेरा दोस्त है, वह रेखा का भी हो सकता है। रेखा के अलावा किसी और से उसकी मित्रता हो सकती है। इसमें झगड़े जैसी कोई बात कहां से आ गई। बड़ी ही सहजता से योगिता बोली।

आज योगिता लगभग 20 फिल्मों में काम कर रही है जिनमें से फ्री लव रईस, मेरी किश्ती, स्मगलर चौकीदार, अंगार, सौदा उजाला ही उजाला, प्यार का रंग तथा मृगतृष्णा प्रमुख है।


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Mayapuri

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