यू-ट्यूब ने जारी किया कैलाश सत्यार्थी पर आधारित अवॉर्ड विनिंग डाक्यूमेंट्री “द प्राइस ऑफ फ्री” का ट्रेलर

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नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित जानेमाने बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री कैलाश सत्यार्थी पर आधारित पुरस्कृत डाक्यूमेंट्री फिल्म “द प्राइस ऑफ फ्री” का पहला ट्रेलर आज पार्टिसिपेंट मीडिया, कनकोर्डिया स्टूडियो और यू-ट्यूब द्वारा जारी किया गया।

यह डाक्यूमेंट्री फिल्म श्री कैलाश सत्यार्थी के बाल मजदूरी और ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों को छुड़ाने के “रेड एंड रेस्क्यू आपरेशन” पर आधारित है। जिसमें श्री सत्यार्थी बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं के साथ ट्रैफिकिंग के शिकार गुमशुदा बच्चों को गुप्त छापेमारी अभियान के जरिए मुक्त कराते हैं। अपने जीते जी दुनिया से बाल दासता खत्म करने का संकल्प लेने वाले श्री सत्यार्थी के बाल हिंसा मुक्त दुनिया के निर्माण में यह फिल्म एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पार्टिसिपेंट मीडिया, कनकोर्डिया स्टूडियो और यू-ट्यूब के साथ साझेदारी में फाउंडेशन “100 मिलियन फॉर 100 मिलियन” अभियान के जरिए दुनियाभर के लोगों क बाल मजदूरी और बाल दासता में फंसे करोड़ों बच्चों की पीड़ा और दर्द से रूबरू करा पाएगा। यह फिल्म न केवल करोडों लोगों को बाल हिंसा के खिलाफ जागरुक करेगी, बल्कि इस बुराई को दूर करने के लिए पूरी दुनिया में सामाजिक और राजनैतिक इच्छा शक्ति भी पैदा करेगी।

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने बच्चों के खिलाफ होने वाली सभी प्रकार की हिंसा को रोकने और उनके बचपन को सुरक्षित बनाने के मकसद से दुनियाभर में“100 मिलियन फॉर 100 मिलियन” नामक एक अभियान चला रखा है। इस अभियान से 10 करोड़ युवाओं को जोड़ने की योजना है। ये युवा दासता और गुलामी में जीवन जीने वाले बच्चों की भलाई केलिए काम करेंगे।

आजादी सभी का नैसर्गिक और मौलिक अधिकार है। किसी भी सभ्य समाज में गुलामी और दासता का कोई स्थान नहीं है। लेकिन दुनिया के करोडों बच्चे आज भी गुलामी और दासता में जी रहे हैं।उनका बचपन कारखानों और औजारों में कैद है। फिल्म में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी लोगों से बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने की अपील करते हुए कहते हैं कि किसी नकिसी को तो इन बच्चों की आजादी की कीमत चुकानी पड़ेगी। फिल्म समाज के वंचित, कमजोर और हाशिए पर खड़े बच्चों के अधिकारों की रक्षा की न केवल वकालत करती है, बल्कि लोगों को बच्चोंके अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित भी करती है।

“द प्राइस ऑफ फ्री” विश्व प्रसिद्ध “सनडांस फिल्म फेस्टिवल-2018” में चयनित हुई थी। फिल्म को अपार सराहना के साथ-साथ यूएस डाक्यूमेंट्री ग्रांड जूरी पुरस्कार भी मिला है। इस फिल्म कानिर्माण पार्टिसिपेंट मीडिया और कनकोर्डिया स्टूडियो ने किया है। डेरेक डोनीन फिल्म के निर्देशक हैं। डेविस गुगेनहिम फिल्म के निर्माता और सारा एंटोनी सह निर्माता हैं। 90 मिनट की इसफिल्म को 27 नवंबर, 2018 को सॉल पैनकेक यू-ट्यूब चैनल (SaulPancake’s You Tube channel) पर रिलीज की जाएगी। मीडिया के लोग फिल्म “द प्राइस ऑफ फ्री” का ट्रेलर निम्नलिखित लिंकपर देख सकते हैं…

“द प्राइस ऑफ फ्री” के बारे बात करते हुए श्री कैलाश सत्यार्थी कहते हैं, “यह फिल्म बाल मजदूरी, बाल दुर्व्यापार (ट्रैफिकिंग), बाल दासता और शोषण के असली चेहरे और संकट को उजागर करती है, जो लाखों बच्चों के बचपन को लील कर उनके सपनों को बेरहमी से कुचल रही है। यह फिल्म उन वंचित और हाशिए के बच्चों की कहानी बयां करती है, जिनके लिए मैं जीवन भर लड़ता रहा हूं और अंतिम सांस तक लड़ता रहूंगा। मैं सभी से इस फिल्म को देखने की गुजारिश करता हूं और साथ ही एक ऐसी दुनिया के निर्माण में सहयोग की अपील भी करता हूं जिसमें सभी बच्चे आजाद, स्वस्थ, सुरक्षित और शिक्षित हों। एक ऐसी दुनिया जहां हर बच्चा, बच्चा होने के लिए आजाद हो। यदि दुनिया का एक भी बच्चा गुलाम है तो सही मायने में हम में से कोई भी आजाद नहीं है।”

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