जाहिरा कहे दिल की बात

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मायापुरी अंक 5.1974

मैं जिंदगी को दुर्घटना से कम नही समझती। जिंदगी में घटनाएं घटती रहती। है यह घटनाएं कभी इतनी हसीन होती है कि घूम फिरकर फिर घट जाती है। मैंने एम.ए करने के पश्चात मॉडलिंग करना शुरू किया। एक दिन डैडी को इस बात की खबर हो गई। वह टेलीविजन पर मुझे देख कर आग बबूला हो गए। लंदन में रहने के बावजूद वह अब भी खालिस देशी आदमी है वे बड़े तंग नजर और रूढ़ीवादी हैं मैं किस्मत की मारी उसी समय घर में दाखिल हुई तो वे बरस रहे थे। उनको गुस्से में देखकर मैं मुंह दिखाये बिना अपनी सहेली के घर आ गई। अपने गुजारे के लिए मैं मॉडलिंग करती रही। इसी मॉडलिंग करती रही। इसी मॉडलिंग के सिलसिले में कोलम्बो जाना पड़ा। वहां से वापसी मैं बम्बई रुक गई। कुछ ऐसे ही सिक्वेन्स ‘आलिंगन’ में फिल्मायें गये थे जिनकी फिल्मबन्दी के साथ मुझे लगा था कि मैं अपने समय से बहुत पीछे चली गई हूं।

नरगिस जी से लन्दन में एक दफा मेरी मुलाकात हुई थी। मैं बम्बई आकर सीधी उन्हीं से मिली। उनकी मार्फत अमरजीत और देव आनन्द से एक पार्टी में मुलाकात हुई। अमरजीत और देव आनन्द से एक पार्टी में मुलाकात हुई। अमरजीत ‘गैम्बलर’ में नई हीरोहन पेश करना चाहते थे। मुझे देखते ही अमरजीत और देव आनन्द ने ‘गैम्बलर’ के लिये पसन्द कर लिया। लेकिन फिल्म बनते-बनते मैं हीरोइन से साइड हीरोइन बन गयी। इस तरह इतने बड़े बैनर में जगह मिलने के सही रोल न होने की वजह से आजतक मेरी मनोकामना पूरी न हो सकी। मैं वहीदा रहमान और मीना कुमारी जैसी गंभीर और करुणा और मुमताज जैसी नटखट भूमिकाएं निभाना चाहती थी। ‘आलिंगन और ‘काल गर्ल’ के बाद से फिर कुछ आशा की कलिया खिलने लगी है। राजेश खन्ना के साथ एक फिल्म ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में मिली है। एक ‘जिन्दा दिल’ चिन्टुके साथ कर रही हूं. मेरे सरताज’ ‘पिन्की’ एक हंस का जोड़ा’ दो बेशरम’ आदि कई और फिल्में हैं जो सैट पर हैं।

मैं फिल्मों में अश्लीलता और नंगेपन के खिलाफ हूं। इसीलिए मैंने इंगलिश फिल्म ‘सिद्धार्श में काम करने से इन्कार कर दिया था। वह रोल बाद में सिम्मी को दिया गया। दरअसल मैं आजाद ख्याल और मॉडर्न होते हुए भी अपने संस्कारों के खिलाफ जाने में खुद लन्दन में रहने के बावजूद डैडी पर पश्चिमी रंग नही चढ़ सका और न मैं ही अपने संस्कारों से बगावत कर सकी। यही कारण है कि मैं फिल्में हासिल करने में ज्यादा कामयाब नही रही क्योंकि मैं यहां के फिल्मी माहौल में ढल न सकी. लेकिन अपने टैलेन्ट पर भरोसा है और पूरा विश्वास है कि एक न एक दिन अपनी मंजिल पाकर रहूंगी और अगर ऐसा न कर सकी तो। शादी करके घर बसा लूंगी और लन्दन वापस चली जाऊंगी। हां डैडी अब मुझ से नाराज नही है। मैंने उन्हें मना लिया है। मैं उनके पास लन्दन चली जाती हूं कभी वह मेरे पास भारत आ जाते है।

आपके पत्रों के जरिये अपने अभिनय के बारे में आप की राय जरूर जानना चाहूंगी।


Mayapuri