बहुचर्चित टेलीप्ले ‘गिद्ध’ के साथ ‘जी़ थिएटर’, 2020 को अलविदा कहने को तैयार है

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साल 2020 के दौरान अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करने के बाद, ’ज़ी थिएटर’, बॉर्डर पार के दिलचस्प टेलीप्ले ’गिद्ध’ के साथ 2020 को अलविदा कहने को तैयार है।

कंवल खूसट द्वारा लिखित और निर्देशित, इस प्ले की कहानी दो महिला किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है जो पुरुष सत्ता भरे इस समाज में जूझते हुए अपने जीवन के दुखों से बंधी हुई हैं।

सना जाफरी, रास्ती फारूक और अदील अफजल अभिनीत यह टेलीप्ले 27 दिसंबर को दोपहर 2 बजे और रात 8 बजे टाटास्काई थिएटर में प्रीमियर के लिए तैयार है। यह पहली बार है, जब प्ले को टीवी पर और भारत में दिखाया जाएगा।

सुलेना मजुमदार अरोरा

गिद्ध जिसका तात्पर्य है ‘टनसजनतम’

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‘गिद्ध’ जिसका तात्पर्य है ‘टनसजनतम’, का अचानक सलीमा की जिंदगी में प्रवेश होता है। एक दिन सलमा नामक एक महिला के उसके घर अचानक पहुंचने के बाद सलीमा की जिंदगी परेशानियों से घिर जाती है।

सलमा खुद को उसकी ननद बताती है। कहानी आगे बढ़ती है तो यह उजागर होता है कि दोनों महिलाओं की जिंदगियाँ एक ही इंसान – जुनैद की वजह से मुसीबतों से घिर गई हैं।

जुनैद सलमा का भाई और सलीमा का पति है। दोनों साथ मिलकर, अपने दुखों का अंत करने का फैसला करती हैं। उनके फैसले से एक की जिंदगी तो हमेशा के लिए बदल जाती है, लेकिन उस तरीके से नहीं जैसा उन्होंने सोचा था।

इस बारे में कंवल खूसट कहते हैं, “ज़ी थिएटर के साथ जुड़ना एक रोमांचक अनुभव रहा है।

’झांझर दी पांवां’,  ’छनकार’ और ’मुश्क’ के बाद, टेलीप्ले ’गिद्ध’ का सफर मजेदार, मनोरंजक और स्वतंत्रता की फीलिंग देने वाला रहा है क्योंकि इसके माध्यम से मैंने टेलीप्ले में अपनी शुरुआत की है।

प्ले का अनुभव प्रयोगात्मक, ऊर्जा से भरपूर और चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन कुल मिलाकर मुझे इस टीम पर गर्व है, जो मेरे साथ खड़ी रही और जिसने इस प्ले को कुछ इतना प्रामाणिक और इतना रोमांचक बनाने के लिए मुझ पर यकीन किया।”

अभिनेत्री सना जाफरी कहती हैं, इस प्ले के किरदार, उन स्टीरियोटाइप महिलाओं से बिल्कुल अलहदा हैं जिन्हें हम टीवी पर अच्छे या बुरे किरदारों के रूप में देखते हैं।

शुरुआत में मुझे लगा कि मैं खुद से बहुत अलग किसी महिला का किरदार निभा रही हूं, लेकिन बाद में मैंने महसूस किया हममें बहुत सी समानताएं हैं।

सशक्त महिलाओं के बीच काम करने से मुझे अपनी पहरेदारी को कम करने में मदद मिली, इसने महिलावाद के बारे में मेरी धारणा को बदल दिया है।

हम अपने अनूठे अनुभवों, विचारों, कहानियों को एक साथ लेकर आए, उन्हें टुकड़ों में पेश किया, जो किसी भी विशिष्ट प्रारूप से मेल नहीं खाते।“


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Mayapuri

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