ज़ीनत अमान लंदन में परेशान

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मायापुरी अंक, 57, 1975

अपने लंदन प्रवास के दौरान एक बार ज़ीनत को अजीब किस्म की परेशानी का सामना करना पड़ा एक रोज वह अकेली सिनेमा देखने चली गईं जहां पर एक सनकी से आदमी ने उन्हें बहुत परेशान कर दिया। वह हॉल में उसके बराबर वाली कुर्सी पर आकर बैठ गया और लगातार उसी की ओर घूरता रहा पर्दे की तरफ उसने एक बार भी नहीं देखा वह उठ कर तीन चार कतारें आगे जाकर बैठ गई जहां पर वह भी आ गया। दूसरी बार वह फिर किसी अन्य सीट पर चली गई मगर वहा पर भी वह आकर साथ ही बैठ गया। इस हरकत से वह बहुत ज्यादा घबरा गई और डर के मारे उनसे हॉल में बैठा न गया और उठकर भाग खड़ी हुई उसने थियेटर को छोड़ दिया लेकिन उस सनकी पुरूष ने उसका पीछा न छोड़ा और लगातार पीछा करता रहा ज़ीनत ने सड़क पर दौड़ना शुरू कर दिया, इस पर भी वह आदमी दौड़ कर पीछा करता रहा। अचानक सड़क पर रूकावट होने की वजह से उन्हें रूकना पड़ा और वह सनकी आदमी भी उनके करीब पहुंच गया। उसने करीब पहुंच कर ज़ीनत की आंखो में आंखे गाड़ कर कहा कि देखो, मैं सिर्फ तुमसे इतना करवाना चाहता हूं कि तुम बैठ कर मेरे साथ एक काफी का प्याला पीलो। हालांकि ज़ीनत ने मना कर दिया था लेकिन होटल पहुंचने के उपरांत ही उन्हें चैन आया।


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Mayapuri

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