ज़ोया अख्तर

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राइटर माता पिता की निर्देशक बेटी ज़ोया अख्तर

फिल्म निर्देशक और राइटर ज़ोया अख्तर का जन्म 14 अक्टूबर 1972 को बोम्बे (मुम्बई) में कवि गीतकार और स्क्रीन राइटर जावेद अख्तर और स्क्रीन राइटर माता हनी ईरानी के घर हुआ। शायद तभी इनमे भी एक लेखक के गुण थे यदि इनके परिवार की बात करें तो जोया की सौतेली मां शबाना आज़मी हैं। वो फरहान अख्तर की बहन और शायर जांनिसार अख्तर की पोती हैं। ज़ोया अख्तर ने मनेच्क्जी कूपर विद्यालय, मुम्बई से अपनी शिक्षा आरम्भ की और सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुम्बई से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण सिखने के लिए न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय फिल्म स्कूल में एडमिशन लिया ।

ज़ोया एक मल्टीटैलेंटेड और आज की लड़की का उदाहरण हैं उन्होंने अपना पहला काम कामसूत्र नामक फ़िल्म में एक छोटे से अभिनय से अभिनेत्री के रूप में आरम्भ किया, जहाँ उन्होंने रेखा की एक शिष्या का अभिनय किया। जोया ने विभिन्न विज्ञापनों में भी काम किया जैसे पेप्सी और फिनोलेक्स आदि

उसके बाद उन्होंने अपना निर्देशन का काम वर्ष 2011 में “लक बाइ चांस” नामक फ़िल्म से आरम्भ किया जो आलोचकों को तो बहुत पसंद आई लेकिन टिकटघर पर नहीं चल पायी,फिर ज़ोया अख्तर ने वर्ष 2011 में, अपने निर्देशन में एक बहु-सितारा फ़िल्म “ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा” नामक फिल्म बनाई जो की एक सुपरहिट फिल्म थी जिसके परिणामस्वरूप उन्हें टिकटघर पर भी एक भारी सफलता मिली और फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार भी मिला, इसके अलावा उन्होंने तलाश फिल्म के लिए भी स्क्रीन राइटिंग की है और बोम्बे बॉयज़,दिल चाहता है और लक्ष्य जैसी फिल्मो में सहायक निर्देशक भी काम किया है उनकी लास्ट मूवी भी एक मल्टी स्टारर “फिल्म दिल धड़कने दो” जो की कुछ खास कमाल न दिखा सकी ।


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Mayapuri

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