मूवी रिव्यू: औसत दर्जे की फिल्म साबित होती है – ‘जुबान’

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रेटिंग**

कभी कभी कोई शख्स अपने साथ घटी घटना से आक्रोशित हो अपने जीवन का मकसद ही बदल लेता है लेकिन आखिरकार उसे जब इस बात का एहसास होता है तो उसे वापस मकसद पर आना ही होता है। मोजेज सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म ‘जुबान’ ऐसा ही कुछ कहना चाहती है।

कहानी

दिलशेर यानि विक्की कौशल के साथ बचपन में एक ऐसा हादसा हो जाता है जिसकी बदौलत उसे संगीत से नफरत हो जाती है। वो अब आगे बड़ा आदमी बनना चाहता है इसलिये मुबंई आ जाता है और एक बड़े बिल्डर मनीष चौधरी से मिलता है मनीष उसे बचपन में मिले थे और उसे कुछ नसीहत दी थी। दिलशेर उन्हें याद दिलाता है तो मनीष उसे अपने यहां काम दे देते हैं। लेकिन एक गैर आदमी को अपने पिता द्वारा इतनी तवज्जो देना मनीश के बेटे को नागवार गुजरता है। इसी बीच उसे सारा जेन डायस यानि अमीरा नामक लड़की मिलती है जो म्यूजिशियन है। वो शमशेर को एक बार गाते हुये सुनती है तो वो उसे कहती है कि तुम कर कुछ और रहे हो लेकिन तुम्हारी जुबान कुछ और कह रही है। तुमने देखा कि तुम गाते हुये जरा भी नहीं हकलाते(दिलशेर बोलते हुये हकलाता है)। एक दिन जब दिलशेर को पता चलता है मनीष अपनी पत्नि और बेटे से बदला लेने के लिए उसे यूज कर रहा है तो उसे अपना मकसद याद आता है लिहाजा वो सब छोड़ कर वापस आपने गांव आकर संगीत में लग जाता है।

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निर्देशन

निर्देशक मोजेज सिंह की ये पहली फिल्म है जिसे बुसान इन्टरनेशनल फेस्टिवल तक में सराहा जा चुका है। लेकिन अगर व्यवसायिक ढंग से देखा जाये तो ये एक साधारण फिल्म है। जिसकी कथा पटकथा तथा सवांद सभी कुछ साधारण है। फिल्म शुरू से अंत तक बस चलती रहती है और अंत में खत्म हो जाती है। बीच में दर्शक न तो कोई एक्साइटमेन्ट महसूस करता है और न ही उसके मन में कोई जिज्ञासा पैदा होती है। थोड़ी और मेहनत की जाती तो फिल्म और अच्छी बन सकती थी।

अभिनय

अगर देखा जाये तो पूरी तरह से ये विक्की कौशल की फिल्म है क्योंकि उसने शुरू से अंत तक अपने अभिनय के सारे रंग बढि़या तरीके से बिखेरे हैं। सारा जेन डायस भी ठीक रही बावजूद अपने ग्लैमर अवतार के। मनीष चौधरी ने एक बार फिर एक बिजनिसमैन के रूप में उम्दा अभिनय किया है। रघुवीर चानना मनीष के बेटे के तौर पर साधारण रहे वहीं मेघना मलिक ने एक अमीर औरत के दंभ को बहुत बढि़या तरह से एक्सप्लेन किया।

Zubaan

संगीत

फिल्म में चार संगीतकार हैं बावजूद इसके एक ही गाना बेहतर बन पड़ा हैं वरना बाकी सब औसत दर्जे का है ।

क्यों देखें

औसत दर्जे की फिल्म होने के बाद भी इसे एक बार तो देखा जा सकता है।

 


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Mayapuri

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