कोरोना लाॅकडाउन के बाद थिएटर में आई फ़िल्म: ‘आह्वान’

1 min


Aahvaan

कोरोना के संकटग्रस्त दौर में  इस हफ्ते आई हिन्दी फ़िल्म ’आह्वान’ को महाराष्ट्र,गुजरात व गोवा के मल्टीप्लेक्सेज थियेटरों में रिलीज़ होने का मौका मिला है। प्रोड्यूसर- डायरेक्टर-लेखक अमृत राज ठाकुर की यह फ़िल्म एक हॉरर-काॅमेडी जोनर फ़िल्म है।

शरद राय

“आत्माओं की कहानी वाली फिल्म के लिए एडिटिंग  बहुत मायने रखती है” अमृत राज ठाकुर

Aahvaan

कालेज के लड़के लड़कियों का एक ग्रुप पिकनिक मनाने जंगल जाता है । जहां वे काफी मौज मस्ती करते हैं। एन्जॉयमेन्ट के दौरान इन जोड़े में भरपूर प्यार तथा आपस मे टकराव  का नज़ारा होता है। उनमे से एक लड़का ( मिश्रा) तांत्रिक आह्वान  करना जानता है। जो आत्माएं बुला सकता है लेकिन उनको वापस भेजने तक का ज्ञान प्राप्त नही कर पाया है।

लड़के- लड़कियां मिश्रा के इस ज्ञान को नकारते हैं और उसको चुनौती देते हैं कि वह कोई आत्मा बुला कर दिखाए।मिश्रा आत्माओं का आवाहन करता है फिर तो जंगल मे मौत का खेल शुरू हो जाता है। आपस के दोस्त भागने के लिए रास्ता तक नहीं पाते।

बिहार की एक आंचलिक कहानी और फोक गीत पर आधारित ’आह्वान (आवाहन) के स्क्रीन प्ले व डायलाग कहानी के साथ चलते हैं। बीच-बीच मे लोक गीत की तर्ज वाली लाइनें उत्सुकता जगाए रखती है कि आगे क्या होगा या अब किसकी बारी होगी ?

फ़िल्म में रघु ( अमृत राज ठाकुर) की एक खास भूमिका है जो कहानी की कड़ियां जोड़ता है। दूसरे लड़के लड़कियों के जोड़े कहानी के अनुरूप गढ़े गए हैं। देवब्रतसिंह, मुस्कान सिन्हा, जागृति तिवारी, नैना सिन्हा, सुकृति गुप्ता,मनीष शाह, सुमित रंजन, आर्य चतुर्वेदी,दीपक सिंह, दानिश आदि नए कलाकारों से निर्देशक ने संतुलित काम लिया है।

आत्माओं की कहानी वाली फिल्म के लिए एडिटिंग  बहुत मायने रखती है। अवधेश प्रताप वर्मा व राजेश लाल ने बेहतरीन रिजल्ट दिया है। बैक ग्राउंड म्यूजिक राजीव मुखर्जी का है। निर्माता, निर्देशक , लेखक  अमृत ठाकुर ( जिनकी यह दूसरी फिल्म है।

पहले वह फ़िल्म “9’ओ क्लॉक’ दे चुके हैं) की हिम्मत की भी सराहना करनी होगी जो वह कोरोना काल में भयभीत हुए बिना थिएटर में फ़िल्म रिलीज किए हैं। फ़िल्म युवा वर्ग को पसंद आएगी।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये