मुन्ना माइकल
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रेटिंग*** किसी फिल्म में मनोरजंन के सारे एलीमेनट्स होते हैं तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। निर्देशक शब्बीर खान की फिल्म ‘मुन्ना माइकल’ पर ये कहावत पूरी तरह से फिट होती है। टाइगर श्रॉफ के साथ उनकी ये लगातार तीसरी सफल फिल्म है यानि इस फिल्म के साथ द
रेटिंग**** औरत की आजादी को लेकर बड़ी बड़ी बातें की जाती हैं लेकिन क्या वास्तव में औरत आजाद हो चुकी है? ये कड़वा सच प्रोड्यूसर प्रकाश झा और एकता कपूर द्धारा प्रस्तुत और अलंकृता श्रीवास्तव द्धारा निर्देशित फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ में काफी असरदार तरीक
रेटिंग** बेशक हमारे यहां बच्चों को लेकर अच्छी फिल्में नहीं बनती या बनती हैं तो बेहद कम बनती हैं। दूसरे ऐसी फिल्मों में जब जरूरत से ज्यादा प्रयोग करने की कोशिश की जाती है तो परिणाम उल्टा निकलता है। अनुराग बासू ने अपनी फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में बच्चों को ध
रेटिंग* चंद निर्देशक किसी भी कहानी को घुमा फिरा कर और कन्फयूजन पैदा करते हुये फिल्माना पंसद करते हैं। निर्देशक ओनीर भी इन्ही मेकर्स में शामिल है। उदाहरण बतौर उनकी इस सप्ताह रिलीज फिल्म ‘शब’ देखी जा सकती है। जिसमें साधारण सी कहानी को पेचीदा बना कर पेश क
रेटिंग*** अपनी वापसी वाली फिल्म ‘इंगलिश विगंलिश के करीब चार साल बाद श्रीदेवी एक ऐसी फिल्म ‘मॉम’ में दिखाई दे रही हैं जिसमें वो बताती नजर आ रही हैं कि ओरत बेशक कमजोर है लेकिन एक मां नहीं। जब भी उसके बच्चों पर कोई आंच आती है तो वो ऐसा कुछ कर जाती है, जि