आज मैं जो भी हूँ, सब लोगो का प्यार के वजह से हूँ- पद्मविभूषण अमिताभ

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उस दिन जब बहत्तर साल के अमिताभ बच्चन जब राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी के सामने खड़े हुए अपना पद्मविभूषण स्वीकार करने के लिए और उसके कहीं मिंटो बाद तक मुझे वोह सुबह याद आई जब मैं ख्वाजा अहमद अब्बास के साथ एक मामूली सा असिस्टेंट था और एक लम्बा सा जवान पांच महले सीढिया चढ़कर अपने भाई के साथ अब्बास साहब को मिलने आया था | उसको उसके दोस्त टीनू आनंद जो एक किरदार निभानेवाले था | अब्बास साहब की फिल्म “सात हिंदुस्तानी” में करने वाला था | टीनू को सत्यजीत रे ने अपना बारहा असिस्टेंट बनने के लिए बुला लिया था और वोह कलकत्ते जाने के लिए तैयार हो रहा था | अब्बास साहब जो उनके मामू जान थे वोह क्रोधित हुए थे क्यूंकि उनकी फिल्म गोवा में शूटिंग के लिए तैयार थी | उन्होंने टीनू से कहा की वोह उसको तब जाने देंगे जब वोह उसकी जगह कोई और रिप्लेसमेंट नहीं दे| टीनू के पर्स में एक छोटी सी तस्वीर थी जो उसके एक दिल्ली की एक सहेली ने दी थी और कहा था की ये लड़का फिल्मों में काम करना चाहता है जब की उसके बाद एक बहोत अच्छी नौकरी थी| टीनू ने वोह तस्वीर अब्बास साहब को दिखाई और अब्बास साहब ने सिर्फ एक झलक देखी और टीनू से कहा ” जो भी वोह जैसा भी हो उससे कहो हम थर्ड क्लास की वन वे टिकट के पैसे देंगे अगर वोह दो दिन में बम्बई आ सकता है | टीनू ने उस जवान को बम्बई बुलाया और वोह तुरंत तैयार हो गया | बम्बई पहुँचते ही वोह और उसका भाई जुहू के नार्थ बॉम्बे हाउसिंग सोसाइटी पहुंचे जहा पर अब्बास साहब का दफ्तर था | अब्बास साहब उससे कुछ सवाल किये और अंत में कहाँ की वोह उसको पूरी फिल्म के पांच हज़ार रुपिया देंगे और उसको चालीस दिन एक गोवा के डारमेट्री में जहाँ वोह खुद और बाकी की यूनिट रहनेवाली थी | सब फैसले हो गए तब अब्बास साहब ने पुछा ” बच्चन नाम उनको कहा से मिला ? कहीं तुम मेरे दोस्त हरिवंशराय बच्चन के कुछ लगते तो नहीं ?” उस जवान ने कहा, “हां मैं उनका छोटा बेटा हूँ और ये मेरा बड़ा भाई है ? अब्बास साहब ने फ़ोन उठाया और सीधा हरिवंशराय बच्चन को फ़ोन लगाया और अपनी बुलंद अव्वाज़ में कहाँ , ” अरे बच्चन, यहाँ दो लड़के आये है, एक जो लम्बा है वोह एक्टर बनना चाहता है और कहता है की वोह तुम्हारा बेटा है, नाम है अमिताभ बच्चन”| बच्चन ने दिल्ली से कहाँ “अब्बास साहब अगर तुम उसको काम देते तो मुझे कोई ऑब्जेक्शन नहीं”| तब जाके अब्बास साहब के सेक्रेटरी अब्दुल रेहमान ने एक एग्रीमेंट टाइप किया और अमिताभ बच्चन ने अपनी पहली फिल्म शाइन की|

“सात हिंदुस्तानी” में अमिताभ को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवार्ड मिला | उसके बाद उसने “आनंद” शाइन की सात हज़ार रुपये में उसके बाद “बॉम्बे टू गोवा ” की बारह हज़ार में| खूब तारीफ़ हुए, लेकिन उसके बाद एक नाकामी का एक लम्बा और कठिन सफर रहा और एक समय ऐसा आया जब वोह बम्बई छोड़कर जाने को तैयार हो गए| लेकिन उसके बाद ” ज़ंजीर” आई और एक बड़ा सुपरस्टार ने जनम लिया और उसका नाम अमिताभ बच्चन था, जो आज बयालीस सालो के बाद ना सिर्फ सुपरस्टार है लेकिन महानायक और मिलेनियम के स्टार भी है और पद्मश्री और पद्मबूषण के बाद पद्मविभूषण है |

पद्मविभूषण स्वीकारने के बाद जब वोह बम्बई लौटे तोह उनके दोनों बंगले , प्रतीक्षा और जलसा और दफ्तर , जनक फूलो और सुभकामनाये के संदेशो से भरे हुए थे | चौबीस घंटो में उनके मोबाइल, मेल और ट्विटर पर हज़ारो सन्देश आये और वोह सब को जवाब नहीं दे सके लेकिन उन्होंने सबका दिल से धन्यवाद किया और उस दिन वोह घर पर ही अपने परिवार के साथ रहे|

जब मैंने उनको मेरे सन्देश लिखा की मेरे शब्द और भावनाए दोनों में संघर्ष हो रहा था उनको कामयाबी की बधाई देने के लिए , उन्होंने तुरंत धन्यवाद किया | मैंने ये भी लिखा था की मैं लता मंगेशकर के साथ ये दुआ करता हूँ की बहोत जल्द उन्हें भारत रत्न मिले तब भी उन्होंने तुरंत जवाब दिया, “तुम लोगो की मेरे लिए ऐसा सोचना अच्छा है, लेकिन मुझे मालूम है मुझे भारत रत्न कभी नहीं मिलेगा”| उन्होंने ऐसा इतना फ़ोर्स फुल्ली ऐसा जवाब क्यों दिया मैं अभी तक समझा नहीं | मैंने उनको इतना ही जवाब दिया की काश मैं तब तक ज़िंदा रहूँ जब तक उनको भारत रत्न मिले |

अगले ही दिन वोह अपने रोज के काम में लगे रहे | इस वक़्त उनका पूरा ध्यान “पीकू” के रिलीज़ पर लगी हुयी है और अभी भी उनके पास कहीं अच्छे अच्छे ऑफर आ रहे है , लेकिन उन्होंने अभी सिर्फ अब्बास मस्तान की फिल्म को हां किया है जो “पीकू” के जैसे फिर एक बाप और बेटी की कहानी है|

पद्मविभूषण अमिताभ बच्चन ये पहले भी कह चुके है और अब भी कह रहे है की वोह कब तक काम करेंगे जब तक उनमे जान है, वोह तब भी काम करेंगे जब उनका काम सिर्फ एक भीड़ में खड़े होनेवाले आम आदमी का रोल हो | पद्मविभूषण अमिताभ बच्चन फिल्मों में एक ऐसे भूषण है जो कही हज़ारो साल में एक बार आते है , ये कहना उनको पसंद नहीं, लेकिन उन् लाखो करोडो लोगो का वो क्या कर सकते है जो ये कहते है और मानते है|


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Mayapuri

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