मैंने एक्टिंग को कभी मिस नहीं किया- सुनील शेट्टी

| 30-08-2019 3:30 AM No Views

बॉलीवुड के कई एक्टर्स की इस बात को लेकर आलोचना होती है कि वह बढ़ती उम्र के बाद भी फिल्मों में कम उम्र के लड़कों का किरदार अदा करते हैं या फिर वे छोटी उम्र की हीरोइनों के साथ रोमांस करते हुए नजर आते हैं। हालांकि दमदार एक्टर सुनील शेट्टी की राय इससे उलट ही है। 'अन्ना' के नाम से मशहूर सुनील शेट्टी पूरे 4 साल बाद फिल्मों में लौट रहे हैं। सुनील शेट्टी की आगामी फिल्म 'पहलवान' है, जिससे वह कन्नड़ फिल्मों में अपनी नई पारी की शुरुआत करने के लिए तैयार हैं. यह फिल्म कन्नड़ के साथ-साथ हिंदी में भी रिलीज की जाएगी यानी बॉलीवुड में सुनील के फैंस भी लंबे समय के बाद उन्हें देख सकेंगे। मीडिया से बातचीत करते हुए 58 साल के अभिनेता सुनील शेट्टी ने कहा कि, 'मैं फिल्म में सुदीप के किरदार के लिए एक मेंटर की भूमिका को निभाने जा रहा हूं, जो नायक के लिए पिता समान है. यह काफी रोमांचक है, ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से एक ऐसे किरदार को निभाना चाहता था जो कि शांत और गंभीर भी हो। साथ ही मेरा मानना है कि अपनी उम्र को निभाना हमेशा से ही बेहतर रहा है और यह सामने निखरकर भी आता है।' एक्टिंग से ब्रेक लेने के सवाल पर सुनील कहते हैं कि मैं चार साल बाद फिल्म कर रहा हूं। मैंने ब्रेक इसलिए लिया था क्योंकि मेरे पिताजी की तबीयत खराब थी। उनको लकवा की शिकायत थी। मैं बहुत डिस्टर्ब था उस वक्त। एक नाराजगी सी हो गयी थी शूटिंग से, पता नहीं क्यों लेकिन मैं अब आ गया हूं वापस लाइट कैमरा और एक्शन में।मैंने एक्टिंग को कभी मिस नहीं किया- सुनील शेट्टीक्या ब्रेक के दौरान आपने एक्टिंग को मिस किया? इस सवाल पर सुनील कहते हैं कि सच कहूं तो मैंने एक्टिंग को मिस नहीं किया, क्योंकि मैं अपने पिता में पूरी तरह से व्यस्त था. मुझे ये बात पता थी कि अगर शूटिंग पर मैं गया तो भले ही सभी बोलेंंगे कि छह बजे पैकअप हो जायेगा लेकिन आठ बज ही जाता है। उस वक्त प्राथमिकता मेरा पापा थे। पर हां मेरे जेहन में ये बात जरुर चलती रहती थी कि कहीं मैं एक्टिंग भूल तो नहीं जाऊंगा न। जल्द ही सुनील शेट्टी का बेटा भी लॉन्च होने वाला है। उसे क्या सीख देते हैं? इस पर सुनील कहते हैं कि मैं अपने बच्चों को सफलता से ज्यादा असफलता को हैंडल करने की सीख देता हूं। मुझे लगता है कि सफलता को वे हैंडल कर लेंगे। असफलता को नहीं। ये इंडस्ट्री बहुत ही डेंजर है। अभिनय में मौजूदा दौर में कितना फर्क पाते हैं? पूछने पर सुनील कहते हैं कि एक्टिग काफी बदल चुकी है। मैंने इस फिल्म में मॉनिटर देखा है। पहले नहीं देखता था। अब समझना होता है कि आप ओवरएक्टिंग तो नहीं कर रहे हैं। अब तो मैं ड्रेसिंग में भी अपने बच्चों की राय लेता हूं। मैं उन्हें सुनता हूं। मैं अपनी उम्र के अनुसार रोल करता हूं। अपने इस फिल्मी सफर को कैसे देखते हैं? जवाब में सुनील कहते हैं कि यह अजीब है, लेकिन मैं भी कुछ दिन पहले यह सोच रहा था कि मेरी डेब्यू फिल्म 'बलवान' थी, अब पहली कन्नड' फिल्म 'पहलवान' है। बाकी, फिल्मी सफर खूबसूरत ही रहा है लेकिन मैंने गलतियां भी बहुत कीं, जिसके चलते मैंने असफलताएं भी देखीं, पर अफसोस नहीं करता। मेरी कोशिश यही है कि जिंदगी का अब जो फेज है, वह भी खूबसूरत है। मेरे पास जो किरदार आ रहे हैं, वे मैच्योर, अच्छे किरदार हैं, चाहे हिंदी में हो या दूसरी भाषाओं में हो। आम तौर पर क्या होता है कि हिंदी का ऐक्टर साउथ की फिल्म करता है, तो उसे नेगेटिव रोल दे देते हैं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर रहा। मैं जो किरदार सिलेक्ट कर रहा हूं, वे अच्छे, सम्मानजनक किरदार हैं तो शुरुआत अच्छी है। चारों भाषाओं में चारों सुपरस्टार्स के साथ काम कर रहा हूं।