INTERVIEW!! ‘‘हमारी फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ राजनीति की बजाय इंसानियत व अमन, शान्ति की बात करती है..’’ – सलमान खान

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इन दिनों सलमान खान अपनी नई फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ को लेकर अति उत्साहित हैं। जिसका निर्माण उन्होने अपने नाम  यानी कि ‘सलमान खान फिल्मस’ के बैनर तले किया है। फिल्म में धर्म को भुलाकर इंसानियत पर चलने का संदेश है।पर सलमान खान का मानना है कि उनकी फिल्म कहानी प्रधान मनोरंजक फिल्म है। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के अंश..

फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगे?

यह एक अति ईमानदार इंसान पवन चतुर्वेदी की कहानी है, जो कि गांव का बहुत ही सीदा साधा भोला भाला युवक है। षरीफ है। मेहनती है। दस साल में हाईस्कूल पास हुआ है, पर नकल नहीं की। पवन को भले ही दस साल लगे हो हाईस्कूल पास करने में, पर ईमानदार है। वह हमेषा सच बोलता है। पवन एक दकियानूसी हिंदू परिवार में पैदा हुआ लड़का है। उसके परिवार के लोग आर एस एस से जुड़े हुए हैं। मुस्लिमों से उसका कभी वास्ता नहीं रहा। उसे पता नहीं कि मुसलमान कैसे मांसाहारी भोजन करते हैं..वगैरह वगैरह। तो हिंदू मुस्लिम को लेकर उसके दिमाग में कुछ बातें बैठी हुई हैं। जब वह पाकिस्तान जाता है, तो उसे काफी कुछ अजीब सा लगता है।

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फिल्म के कथानक का क्रेंद पवन कुमार चतुर्वेदी और छोटी बच्ची है तो फिर फिल्म का नाम ‘बजरंगी भाईजान’ क्यों?

यह सच है कि कहानी पवन कुमार चतुर्वेदी और छोटी बच्ची के इर्द गिर्द घूमती है। मगर पवन चतुर्वेदी इतना बड़ा बजरंगबली का भक्त है कि लोग उसे प्यार से ‘बजरंगी’ बुलाते हैं। जब वह पाकिस्तान जाता है, तो वहां लोग उसे ‘भाईजान’ का नाम देते हैं। इसलिए फिल्म का नाम ‘बजरंगी भाईजान’ है। मैं यहां पर फिल्म के एक छोटे से दृश्य का जिक्र करना चाहूंगा। वह पाकिस्तान में लोगों को बताता है कि वह इस खोई हुई बच्ची को इसके मां बाप से मिलाने के लिए लेकर आया है। तो लोग पूछते हैं कि, ‘आप हिंदुस्तानी हैं? क्या आप इजाजत लेकर आए हैं?’ इस पर वह कहता है, ‘नहीं।’ मैं तो भारतीय हूँ और बिना वीजा व पासपोर्ट केे इस गूंगी लड़की को इसके परिवार वालों को सौंपने आया हूं।’  उस वक्त वह गूंगी इशारा करती है कि ऐसा ना कहो, नहीं तो लोग तुम्हें कालकोठरी में डाल देंगे। पर वह ठहरा सच्चाई के रास्ते पर चलने वाला। झूठ बोलता नहीं। पर पवन की बात सुनकर पाकिस्तानी लोग कहते हैं, ‘हम दोनों के मुल्कों में हर इंसान आप जैसा हो जाए।’ दो लाइन का यह सीन है, पर बहुत कुछ कह जाता है।

फिल्म का नाम ‘बजरंगी भाईजान’ की वजह से कोई विवाद नहीं पैदा होगा?

अरे भइया! मैं खुद हिंदू हूं। मुसलमान हूं और कैथलिक भी हूं।

फिल्म में आर एस एस का परिवार रखने की वजह क्या है?

नहीं। मैंने फिल्म की पृष्ठभूमि और अपने किरदार को बताने के लिए बात कही। फिल्म में कही भी आर एस एस का जिक्र नहीं है।

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फिल्म में करीना कपूर यानि कि रशिका से आपकी मुलाकात कैसे होती है?

पांच रूपए को लेकर मुलाकात होती है। बाद में वह पवन चतुर्वेदी के घर में रहने आ जाती है। पवन इतना ईमानदार इंसान है कि उसके पास टूटे पैसे नहीं है। एक दिन बस के अंदर रशिका, पवन को पांच रूपए के टूटे दे देती है। अब वह बस से उतरते ही उसे पांच रूपए वापस देना चाहता है। पर वह उसे क्या कह कर बुलाए? तो वह ‘बहनजी’ कह कर बुलाता है। बाद में धीरे-धीरे दोनों में प्यार हो जाता है। क्योंकि पवन की सच्चाई व ईमानदारी से वह प्रभावित हो जाती है।

छः साल की बच्ची से आपकी मुलाकात कैसे होती है?

कुरूक्षेत्र में संपन्न हो रहे एक समारोह में हनुमान जी की पूजा हो रही है। पवन चतुर्वेदी, जिसे लोग बजरंगी के नाम से बुलाते हैं, हनुमान भक्त है। वह भी बजरंग बली के मोह में नाच गा रहा होता है, तभी उसे यह लड़की मिल जाती है। फिल्म के अंदर हर दो सीन के बाद उसे झटका लगता है कि वह क्या है? वह आर एस एस के परिवार का है। जिसकी वजह से उसकी कार्यषैली लोगों की समझ से बाहर की होती हैं।

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नवाजुद्दीन के किरदार से पवन का क्या रिश्ता है?

नवाजुद्दीन पाकिस्तानी टीवी चैनल का पत्रकार है। उसे लगता है कि पवन भारत से पाकिस्तान में घुसा है और आतंकवादी हो सकता है, तो वह अपने चैनल के लिए ‘स्टोरी’ की तलाश में उसका पीछा करता है। जब उसे हकीकत पता चलती है, तो उसकी रूचि खत्म हो जाती है।

 ‘बजरंगी भाईजान’ में नवाजुद्दीन सिद्दिकी को लेने का निर्णय किसका रहा?

यह फिल्म के निर्देशक कबीर खान का अपना निर्णय रहा।मुझे लग रहा था कि किक के बाद इस फिल्म में नवाजुद्दीन की बजाए कोई दूसरा कलाकार होगा, पर कबीर ने नवाजुद्दीन को चुना। पर नवाजुद्दीन सिद्दिकी बेहतरीन कलाकार हैं।

भारत पाक संबंधों की बात है।तो क्या फिल्म पाकिस्तान में रिलीज होगी?

इस फिल्म में कोई निगेटिव बात नहीं की गई है। सब पाॅजीटिव बात है। यह फिल्म पाकिस्तान में जरूर रिलीज होगी। जो लोग भारत पाकिस्तान को लेकर निगेटिव बात देखना चाहते हैं, वह यह फिल्म देखने ना आएं। जिन्हें पाॅजीटिव बातें देखनी हैं। मनोरंजन चाहिए। वह फिल्म देखें। फिल्म में अच्छे किरदारों की कहानी है। इमोशंस की भरमार है। यह एक मर्दानगी वाले पुरूष की कहानी है, जिसमें दिखाया है कि वह कुछ कर दिखाएगा। यह एक ऐसे इंसान की कहानी है, जिसके अंदर एक गूदा है। पर सादगी भी है। यह फिल्म इंसानियत की बात करती है। मानवता की बात करती है। शान्ति, अमन चैन की बात करती है।

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फिल्म ‘एक था टाइगर’ पाकिस्तान में रिलीज नहीं हो पायी थी?

फिल्म में ऐसा कुछ नहीं था कि यह फिल्म पाकिस्तान मे रिलीज न होती। मगर यह पाकिस्तानी सेंसर बोर्ड की अपनी सोच थी। उन्हें हमेशा शिकायत होती है कि फिल्म में लड़की पाकिस्तानी क्यों होती है? तो उनकी जो षिकायते हैं, उनको लेकर क्या कहा जाए।

करीना कपूर के साथ अपने निजी रिश्तों के चलते आपने उन्हें फिल्म में जोड़ा?

पहली बात तो फिल्म में करीना कपूर को जोड़ने का पूरा निर्णय फिल्म के निर्देशक कबीर खान का है। काम में निजि रिश्ते नहीं चलते। फिल्म बिजनेस में आप निजि रिश्तों को मिक्स नहीं कर सकते। पर फिल्मी परदे पर जब करीना कपूर, सलमान खान को कोई बात समझाती है, तो दर्शक को लगना चाहिए कि हां सही कह रही है और सलमान को उसकी बात समझ जानी चाहिए। क्योंकि फिल्म में पवन पराए धर्म की बकवास कर रहा है। पराया धर्म क्या होता है? एक छह साल की बच्ची, जो कि अपने मां बाप से बिछुड़ी हुई है, उसके धर्म को लेकर क्यों बात की जाए? तो रशिका, पवन को समझाती है कि धर्म की चर्चा करना मूर्खता की बात है। जब वह यह बात समझाती है, तो लगता है पवन को उसकी बात समझ जानी चाहिए। सच कहूं तो इस पूरी फिल्म में इस बात को रेखांकित करने की कोशिश की गयी है कि आप अपने धर्म की इज्जत करें, मगर दूसरे धर्म की खिलाफत का कोई हक भी नहीं है। एक इंसान के तौर पर हर धर्म और हर इंसान की इज्जत करनी चाहिए।

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फिल्म में क्राॅस बाॅर्डर की बात है। तो क्या फिल्म के अंदर भारत पाकिस्तान की राजनैतिक स्थितियों पर भी बात की गई है?

हमारी फिल्म राजनीति से परे है। प्यार मोहब्बत की बात करती है। जब किसी फिल्म में राजनीति आती है, तो वहां निगेटीविटी भी आती है।

आप अपनी फिल्म ईद के दिन ही क्यों रिलीज करते हैं?

मेरी फिल्म रमदान में रिलीज होगी। 17 जुलाई को फिल्म रिलीज होगी। जबकि ईद 18 या 19 जुलाई को है। मेरी हर फिल्म हमेशा रमदान पर आती है, ईद पर नहीं। इससे पहले मेरी फिल्म ‘किक’ ईद से चार दिन पहले रिलीज हुई थी। मेरी एक दूसरी फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ इस साल दीपावली में रिलीज होगी। हमारी फिल्में त्यौहार या छुट्टियों में आती हैं। आपको यह तो मानना पडे़गा कि भारत देष में हर धर्म को बढ़ाने का काम बाॅलीवुड ने किया है। हिंदी फिल्मों में भूले बिसरे त्यौहारों को भी चित्रित किया गया है। लोग कहते हैं कि आमिर खान अपनी फिल्म क्रिसमस के मौके पर रिलीज करते हैं। पर हम यह क्यों भूल जाते हैं कि मुंबई में ही सिर्फ बान्द्रा पश्चिम इलाके में ही क्रिसमस का त्यौहार ज्यादा जोरदार तरीके से मनाया जाता है। पर उनकी फिल्में तो पूरी मुंबई व पूरे देश में चलती हैं।

धर्मेन्द्र चाहते हें कि उनकी जिंदगी पर यदि फिल्म बने, तो उसमें आप अभिनय करें?

मैं उनकी बायोपिक फिल्म में काम नहीं कर सकता। धर्मेन्द्र जी की बायोपिक फिल्म में सिर्फ धर्मेन्द्र जी ही काम कर सकते हैं।

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क्या आप चाहेंगे कि आपकी जिंदगी पर फिल्म बने?

यदि ऐसा हुआ,तो बहुत सारे लोग पिटेंगे।

जब कभी आप अपनी पिछली फिल्में देखते हैं, तो कैसा लगता है?

खुद पर हंसने का मौका मिलता है। अभी कुछ दिन पहले टीवी पर ‘सनम बेवफा’ रिलीज हुई। मैं एन डी स्टूडियो में शूटिंग करके वापस आ रहा था। मेरा मेकअप मैन राजू ‘सनम बेवफा’ टीवी पर देख रहा था। उसको भी याद नही आ रहा था कि एक खास सीन कहां फिल्माया गया था? राजू तो मेरे साथ ‘मैने प्यार किया’ के समय से है। मेरा ड्रायवर अशोक भी उसी जमाने से मेरे साथ है। वास्तव में उस दौर की बहुत सी चीजें हम भूल गए हैं। यह वह दौर था, जब हम तीन तीन शिफ्ट में फिल्मों की षूटिंग करते थे। कई बार हम किसी होटल में जाते हैं, वहां हमें अपनी पुरानी तस्वीर लगी दिखायी देती हैं। जबकि हमें याद नहीं होता। होटल के लोग बताते हैं कि हमने वहां 15 दिन शूटिंग की थी। सच कह रहा हूं। हमने 15 15 दिन आउट डोर किए। पार्टीयां की। पर हमें याद नहीं रहता।मुझे याद है, मैंने ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘बीबी नंबर वन’ और ‘कुछ कुछ होता है’’ इन तीनों फिल्मों की शूटिंग एक साथ की थी। सच कहॅू तो जब हम एक साथ तीन फिल्में करते थे, तो फिल्में जल्दी पूरी हो जाती थी।  अब जब हम एक समय में एक ही फिल्म करते हैं, तो उसे पूरा होने में समय ज्यादा लगता है।


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