‘माई साहब, माई लाइफ’ सायरा बानो एक लीजेंड व ब्यूटी क्वीन की प्रेम कहानी – अली पीटर जॉन

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साठ के दशक में लीजेंड दिलीप कुमार ने खुद को भारत के महानतम अभिनेता के रूप में स्थापित किया। उनके बारे में उस समय काफी गपशप हुआ करती थी। दिलीप कुमार उस समय सिर्फ और सिर्फ खबरों में ही बने रहते थे, वह एक गंभीर मनोरोग समस्या से जूझ रहे थे। डॉक्टरों ने बताया कि इस रोग का कारण दिलीप द्वारा निभाये गए ट्रैजिक किरदार (दुखद भूमिकाएं) हैं। ट्रैजिक किरदार निभाने के लिए दिलीप को ‘ट्रेजेडी किंग’ कहा जाता है, उन्हें विदेश में इलाज कराने की सलाह दी गई। लाइटर व हास्य भूमिका के साथ दिलीप कुमार ने वापसी की।

दिलीप कुमार सायरा बानो से बेतहाशा प्यार करते थे, वह पूरी तरह मधुबाला के प्यार में पागल थे। साथ ही वह सायरा से शादी करने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उनके पिता अताउल्लाह द्वारा इस पर काफी आपत्तियां जताई जा रही थी। साथ ही दिलीप कुमार का नाम कामिनी कौशल व वैजयंती माला के साथ भी जुड़ा था। लेकिन पूरी दुनिया तब आश्चर्यचकित रह गई जब उन्होंने खुद से 22 साल छोटी अभिनेत्री सायरा बानो से शादी की। उनकी शादी की हर खबर अखबार में सुर्खियों में रही। स्वर्गीय अभिनेता प्राण दिलीप कुमार के सबसे अच्छे दोस्त थे व शादी समारोह में सबसे करीबी मेहमान थे।

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उस दिन यूसुफ (दिलीप कुमार का असली नाम) सायरा बानो के साथ विवाह के पवित्र बंधन में बंधे थे जिससे हजारों लड़कियों के दिल भी टूटे थे। यह बात बहुत बाद में पता चली कि सायरा हमेशा से भारत के एलिजिबल बैचलर के साथ शादी के सपने संजोती थी। दोनों ने प्रेम विवाह किया व एक साथ बहुत सी फिल्मों में भा काम किया उनकी प्रेम कहानी अन्य प्रेम कहानी की तुलना में अधिक लोकप्रिय हुई। सायरा बानो जो एक स्थापित अभिनेत्री थी व उन्होंने एक लीजेंड एक्टर से शादी की थी। उस समय सायरा ने लीडिंग मेल स्टार्स के साथ काम किया था। लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना तो तब पूरा हुआ जब उन्होंने अपने आइडल दिलीप कुमार के साथ तीन फिल्मों (‘गोपी’,‘सगीना’ व ‘बैराग’) में काम किया था। दोनों ही प्ले पर आधारित फिल्म में काम करने वाले थे। दोनों ने कुछ फिल्म के कुछ दृश्यों को शूट भी किया, लेकिन फिल्म थी, जो चंद्र बारोट (चंद्र बारोट अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘डॉन’ निर्देशित की थी) द्वारा निर्देशित की जानी थी। सायरा ने शादी के बाद अन्य एक्टर्स के साथ काम करना छोड़ दिया। सायरा ने धार्मिक तौर पर बेगम सायरा बानो की भूमिका को निभाने का फैसला किया। जो उन्होंने तीन दशक तक के लिए निभायी। वह बतौर गृहिणी होने पर अपने घर परिवार में बहुत खुश थी, व उनके अनुसार दिलीप सबसे सरल, सबसे प्रबुद्ध व सबसे प्यारे व्यक्ति हैं’।

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सायरा सभी फैमिली फक्शंस में दिलीप के साथ जाती। वह उनके साथ खुद को सहज महसूस करती थी। मिसेस दिलीप कुमार बनना सायरा के लिए सबसे बड़ा सम्मान था। सायरा, 34- पाली हिल बंगलो में आयोजित सभी इवेंट्स,फंक्शंस, फेस्टिवल्स को बखूबी होस्ट करती, सायरा ने दिलीप कुमार की तरफ से सभी पुरस्कार प्राप्त किए। उन्होंने दिलीप कुमार की तरफ से पद्म भूषण भी प्राप्त किया। हाल ही में उन्होंने अपने निवास पर पद्म विभूषण अवॉर्ड भी प्राप्त किया।

केवल एक ही समय ऐसा था जब उनकी प्रेम कहानी को बहुत बड़ा झटका मिला। दिलीप ने अपनी पत्नी सायरा का विश्वास तोड़ा, 1980 में सायरा के  सारे सपने बिखर गए जब दिलीप का नाम आसमा के साथ जुड़ा। उस समय दिलीप को ‘द बिट्रेयल ऑफ द डिकेड’ नाम दिया गया। सायरा बानो अपने जीवन के सबसे खराब दौर से गुजर रही थी। लेकिन साहब के प्रति उनके प्यार ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। आंसू और अशांति के दो साल बाद आसमा का अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो गया। सायरा बानो ने इसे ग्रहण माना जो उनके जीवन का सबसे बुरा दौर, के रूप में उनकी प्रेम कहानी पर छाया रहा। दिलीप कुमार ने उन्हें यह कह तक सांत्वना दी कि सब ठीक हो जाएगा। इसके बाद यह महान प्रेमी जोड़ी खुद के स्वर्ग में रहने लगा।

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लेकिन उनके बुरे समय ने उन्हें शांति से जीने नहीं दिया। जहां दिलीप कुमार समय समय पर बीमार पड़ने लगे थे व अस्पताल के अंदर व बाहर समय समय पर अपनी दिल की समस्याओं से लड़ रहे थे। तो वही उनकी प्यारी बेगम बतौर नर्स अपने साहब की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिका निभा रही थी। बेगम की मेहनत रंग लाई वह दिलीप को स्वस्थ करने में सफल रही।

वन टाइम ‘ट्रेजेडी किंग’ जो अपने जीवन से प्यार करते थे हालांकि वह हारे भी थे व कई स्वास्थ्य समस्याओं से पस्त हुए थे। यदि विश्वसनीय रिपोर्टों पर यकीन किया जाए, साहब अल्जाइमर बीमारी से ग्रस्त है व अन्य जटिल उम्र संबंधी बीमारियों से भी लड़ रहे है। 11 दिसंबर 2015 को वह 93 वर्ष के हुए हैं। वह ज्यादातर बिस्तर पर ही रहते है व लगभग एक दशक से पाली हिल, 34 बंग्लों से बाहर नहीं गए। लेकिन उनकी बेगम ने उनके जीवन की सारी जिम्मेदारी ली है। वह उनकी 24 घंटों व सातों दिन एक नर्स की तरह देखभाल करती है। दिलीप साहब की सभी जरूरतों का ध्यान रखती व उनके सभी मेडिकल ट्रीटमेंट करवाती।

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यह कल्पना करना मुश्किल है कि एक समय के ‘एम्पिरियर ऑफ एक्टिंग’ माने जाने वाले दिलीप कुमार इस मुश्किल भरी व्यवस्था से जूझ रहे हैं। वहीं उनकी एक समय की सुंदरी पत्नी नर्स की भूमिका निभा कर उनके प्रति समर्पित हैं। वह अपने साहब के जीवन के प्रति समर्पित हैं।

दिलीप साहब की कुछ दस साल पहले तक की याददाश्त खोने के लक्षण दिखाई देने लगे थे व समय के साथ चीजें खराब होने लगी थी। यह सायरा बानो ही थी जो हमेशा ही दिलीप के पक्ष में रहती थी। सायरा ने दिलीप का साथ कभी नहीं छोड़ा हमेशा ही उनके सुख-दुख में उनका साथ दिया। वह लगभग अपनी याददाश्त पर से अपना नियंत्रण पूरी तरह से खो चुके हैं। वह केवल एक ही व्यक्ति को पहचानते हैं और वो हैं उनकी बेगम जो उनकी जिंदगी में एक नर्स की भूमिका निभा रही हैं। व उनकी बेगम उन्हें ‘माय साहब हु इज माय लाइफ’ कहती है।

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12 साल पहले की बात है जब साहब अपने काम में व्यस्त हुआ करते थे। तब बेगम सायरा उन्हें एक मोबाइल गिफ्ट करना चाहती थी व मोबाइल को ऑपरेट करने सिखाने के बहाने उनके साथ समय बिताना चाहती थी। लेकिन दिलीप कुमार को सायरा का यह आईडिया बिलकुल भी पसंद नहीं आया लेकिन वह उनका दिल भी नहीं तोड़ना चाहते थे। वह उसी शाम दक्षिण मुंबई अपने कुछ दोस्तों से मिलने जा रहे थे। वह सायरा को यह बोल कर गए कि वह क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया (सीसीआई) जा रहे हैं। जब वह घर से जा ही रहे थे कि सायरा ने दिलीप साहब के पॉकेट में नया मोबाइल रख दिया। वह माहिम के रास्ते में ही थे कि उनके फोन की घंटी बजी व सायरा ही थी जो दिलीप साहब से पूछ रही थी की वह कहां तक पहुंचे। इसके बाद वह बार-बार फोन कर के एक ही सवाल पूछे जा रही थी। अंत में दिलीप ने सायरा को बताया कि वह ताज होटल में है। इस बात पर सायरा दिलीप से कहने लगी कि आपने मुझसे झूठ बोला आप तो कह रहे थे कि आप ‘क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया’ (सीसीआई) जा रहा हूं। दोनों में इस बात पर बहस हुई। वह आखिरी बार था जब दिलीप ने मोबाइल का इस्तेमाल किया था। जिसे वह हानिकारक वस्तु कहते थे।

 


Mayapuri